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भारत के पहले डुगोंग संरक्षण रिजर्व को IUCN ने औपचारिक रूप से मान्यता दी

चर्चा में क्यों है ?

  • अंतर्राष्ट्रीय मान्यता: तमिलनाडु सरकार द्वारा 21 सितंबर, 2022 को स्थापित डुगोंग संरक्षण रिजर्व को IUCN (International Union for Conservation of Nature) ने औपचारिक रूप से मान्यता दी।
  • वैश्विक समर्थन: ओमकार फाउंडेशन द्वारा प्रस्ताव को IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन 2025, अबू धाबी में पेश किया गया और इसे पूरी दुनिया के सदस्यों का समर्थन मिला।
  • महत्वपूर्ण संदेश: यह भारत की समुद्री संरक्षण नीतियों और प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और समर्थन प्रदान करता है।

डुगोंग संरक्षण रिजर्व की विशेषताएँ

बिंदु

विवरण

स्थान

उत्तरी पाक खाड़ी, तमिलनाडु तट

क्षेत्रफल

448.34 वर्ग किलोमीटर

समुद्री घास

12,250 हेक्टेयर से अधिक; डुगोंग और अन्य समुद्री जीवों के लिए मुख्य भोजन

प्रजाति स्थिति

डुगोंग IUCN की लाल सूची में Vulnerable (विलुप्ति के प्रति संवेदनशील)

पारिस्थितिक महत्व

समुद्री घास के मैदान समुद्री जीवन, मछली प्रजनन और कार्बन सिंक के लिए महत्वपूर्ण

संरक्षण चुनौतियाँ

आवास क्षरण, विनाशकारी मछली पकड़ने की प्रथाएं, जलवायु परिवर्तन

संरक्षण रणनीति

समुदाय-नेतृत्व वाली संरक्षण योजनाओं की आवश्यकता

डुगोंग (Dugong) का जैविक और पारिस्थितिक महत्व

  • वैज्ञानिक नाम: Dugong dugon
  • आवास: उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्र; मुख्यतः पाक खाड़ी,मन्नार की खाड़ी , दक्षिण-पूर्व एशिया
  • आहार: समुद्री घास (Seagrass)
  • लाल सूची स्थिति: Vulnerable (विलुप्ति के प्रति संवेदनशील)
  • शारीरिक आकार: लंबाई 2.5–4 मीटर, वजन 250–500 किलोग्राम
  • प्रजनन: गर्भधारण अवधि 13–15 महीने, आमतौर पर 1 बच्चा

पारिस्थितिक महत्व:

  1. समुद्री घास के मैदान बनाए रखने में मदद करता है।
  2. महासागर में कार्बन सिंक के रूप में कार्य करता है।
  3. मछली प्रजनन स्थल के रूप में स्थानीय मछुआरों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा।

भारत में स्थिति:

  • मुख्य रूप से तमिलनाडु तट पर पाए जाते हैं।
  • अनुमानित संख्या: लगभग 240।
  • संरक्षण हेतु पहला डुगोंग संरक्षण रिजर्व 2022 में स्थापित।

संरक्षण के लिए मुख्य कारण और महत्व

  1. समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र: डुगोंग समुद्री घास के मैदान को बनाए रखता है, जो समुद्री जीवन और मछली प्रजनन के लिए जरूरी हैं।
  2. जलवायु नियंत्रण: समुद्री घास महासागर में कार्बन भंडारण (Carbon Sink) में मदद करती है।
  3. स्थानीय समुदाय: मछुआरों की आर्थिक सुरक्षा और भोजन सुरक्षा से जुड़ा।
  4. वैश्विक संरक्षण: विलुप्ति के खतरे से प्रजातियों को बचाने में योगदान।

डुगोंग संरक्षण रिजर्व का अंतर्राष्ट्रीय महत्व

  • पहली बार IUCN द्वारा मान्यता प्राप्त भारत में समुद्री संरक्षण क्षेत्र।
  • यह भारत की समुद्री पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करता है।
  • वैश्विक समुदाय के समर्थन से यह क्षेत्र वैश्विक संरक्षण नेटवर्क का हिस्सा बन गया।

IUCN (International Union for Conservation of Nature) की भूमिका

  • स्थापना: 1948,
  • मुख्यालय: ग्लैंड, स्विट्ज़रलैंड
  • उद्देश्य:
    • जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
    • सतत विकास को बढ़ावा
    • पर्यावरण चुनौतियों के समाधान में सहयोग

मुख्य कार्य:

  1. Red List (IUCN Red List): विश्व की प्रजातियों की संरक्षण स्थिति।
  2. पारिस्थितिक तंत्र संरक्षण: वन्यजीव, समुद्री जीवन, आर्द्रभूमि, नदियों का संरक्षण।
  3. सतत विकास और नीतिगत सुझाव: ऊर्जा, कृषि, जल, जलवायु परिवर्तन क्षेत्र।
  4. वैश्विक सहयोग: संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों के साथ कार्य।

संरचना:

  • 160+ देशों की सरकारें
  • 1,400+ NGOs, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ
  • गैर-लाभकारी संगठन

भारत में योगदान:

  • प्रोजेक्ट टाइगर
  • बायोस्फीयर रिजर्व
  • हॉटस्पॉट्स की पहचान
  • आर्द्रभूमि संरक्षण
  • भारत की कई प्रजातियाँ IUCN Red List में सूचीबद्ध: एशियाई शेर, बंगाल टाइगर, गंगा डॉल्फिन, एक-सींग वाला गैंडा
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