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भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ी उपलब्धि - पेरिस समझौते के 2030 लक्ष्य से 5 वर्ष पहले

  • भारत ने वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 
  • अप्रैल 2026 तक देश ने अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म (Non-fossil) स्रोतों से प्राप्त कर लिया है। 
  • यह उपलब्धि पेरिस समझौता के 2030 लक्ष्य से पांच वर्ष पहले हासिल की गई है।
  • कुल गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 283 गीगावाट (GW) तक पहुंच चुकी है, जिसमें 274.68 GW नवीकरणीय ऊर्जा और लगभग 8.78 GW परमाणु ऊर्जा शामिल है। 
  • यह कुल 520 GW से अधिक स्थापित बिजली क्षमता का हिस्सा है।

सौर और पवन ऊर्जा 

भारत की ऊर्जा वृद्धि में सौर ऊर्जा सबसे आगे है।

  • सौर क्षमता : 150.26 GW (2014 में 2.82 GW से 50 गुना वृद्धि) 
  • पवन ऊर्जा : 56.09 GW 
  • बड़े जलविद्युत : 51.41 GW 
  • लघु जलविद्युत : 5.17 GW 
  • बायोएनर्जी : 11.75 GW 

वित्त वर्ष 2025–26 में ही भारत ने रिकॉर्ड 55.3 GW गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़ी। 

फरवरी 2026 में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन (बड़े हाइड्रो को छोड़कर) 25,295 मिलियन यूनिट (MU) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25% अधिक है।

AI और डेटा सेंटर का बढ़ता प्रभाव

भारत में AI और डेटा सेंटर का तेजी से विस्तार ऊर्जा मांग को बढ़ा रहा है।
एक 100 मेगावाट का डेटा सेंटर हजारों घरों जितनी बिजली खपत करता है और 24×7 बिजली की आवश्यकता होती है।

इससे ऊर्जा क्षेत्र में एक “सुपर-साइकिल” बन रही है, जिसमें :

  • नवीकरणीय ऊर्जा पार्क (Solar + Storage) 
  • बैटरी स्टोरेज 
  • हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश हो रहा है। 

वैश्विक तुलना: भारत की स्थिति

  • चीन : 2258 GW नवीकरणीय क्षमता (दुनिया में सबसे आगे) 
  • संयुक्त राज्य अमेरिका : 468 GW 
  • यूरोपीय संघ : सौर 300 GW+, पवन 220 GW+ 
  • भारत : 250+ GW (दुनिया में तीसरा स्थान) 
  • भारत की विशेषता उसकी तेज़ वृद्धि दर है, हालांकि अभी भी कोयले पर निर्भरता बनी हुई है।

नीतियां और सरकारी पहल

  • PM-KUSUM योजना(2019) → कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा 
  • रूफटॉप सोलर प्रोग्राम → घरों में सौर उत्पादन 
  • हाइब्रिड प्रोजेक्ट (Solar + Wind) → स्थिर ऊर्जा आपूर्ति 
  • बैटरी स्टोरेज के लिए Viability Gap Funding 
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी (जैसे अदाणी, रिलायंस) से तेज़ विस्तार 

जियोथर्मल ऊर्जा: नया आयाम

  • गुजरात में भारत का पहला जियोथर्मल प्रोजेक्ट शुरू  किया गया है बंद पड़े तेल/गैस कुओं का उपयोग 
  • संभावित उत्पादन : 450 kW सतत ऊर्जा 
  • भविष्य में बेसलोड क्लीन एनर्जी का विकल्प 

तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग

  • भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत अभी भी कम भविष्य में तेजी से बढ़ेगी 
  • कारण : आर्थिक विकास  ,शहरीकरण  ,डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (AI, डेटा सेंटर) 
  • इसलिए भारत को ऊर्जा विस्तार और  हरित संक्रमण दोनों साथ-साथ करना होगा 

प्रमुख चुनौतियां

  • ग्रिड इंटीग्रेशन (Solar/Wind की अनियमितता) 
  • भूमि अधिग्रहण समस्याएं 
  • वित्तीय आवश्यकता (सैकड़ों अरब डॉलर) 
  • कोयले पर निर्भरता (बेसलोड के लिए अभी जरूरी) 
  • सप्लाई चेन बाधाएं और परियोजना देरी 

आगे की रणनीति (Way Forward)

  • बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो का विकास 
  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridors) और HVDC(High-Voltage Direct Current) लाइनों का विस्तार 
  • ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा 
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इकोसिस्टम का विस्तार 
  • घरेलू निर्माण : सोलर मॉड्यूल, बैटरी, उपकरण 
  • डेटा सेंटर के लिए किफायती और विश्वसनीय हरित ऊर्जा 

दीर्घकालिक लक्ष्य

  • 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता 
  • 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन (वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की कुल मात्रा को शून्य के बराबर करना)
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