संदर्भ
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पर्यटन केवल यात्रा और अवकाश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक शक्तिशाली इंजन है। एक पर्यटक द्वारा की गई यात्रा होटल, परिवहन ऑपरेटर, टूर गाइड, कारीगर और स्थानीय रेस्तरां जैसे अनगिनत जमीनी उद्यमों को सीधे लाभ पहुँचाती है। भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में, यह क्षेत्र क्षेत्रीय असमानताओं को दूर कर दूरदराज के क्षेत्रों में समृद्धि और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है। आर्थिक लाभों से परे, पर्यटन विश्व मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करता है।
सांख्यिकीय झलक (वर्ष 2014 से 2025 तक)
- अंतर्राष्ट्रीय आगमन : 181.25 मिलियन (विदेशी नागरिक और अनिवासी भारतीय दोनों शामिल)
- विदेशी पर्यटक आगमन (FTA) : 93.35 मिलियन (केवल विदेशी नागरिक)
अवसंरचना का कायाकल्प: स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाएँ
एक शानदार यात्रा की शुरुआत बेहतरीन कनेक्टिविटी और आधुनिक नागरिक सुविधाओं से होती है। वर्ष 2014 में सरकार द्वारा शुरू की गई स्वदेश दर्शन और प्रसाद (PRASHAD) योजनाओं ने पर्यटन बुनियादी ढाँचे के विकास में एक बड़ा बदलाव (Paradigm Shift) लाया है।
- स्वदेश दर्शन 1.0 : इस योजना के तहत 15 पर्यटक सर्किटों में ₹5,000 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
- स्वदेश दर्शन 2.0 : वर्ष 2022 में शुरू की गई इस योजना का ध्यान अनुभव-आधारित और टिकाऊ पर्यटन पर है। इसके तहत उत्तराखंड में टिहरी झील के किनारे फ्लोटिंग लॉग हट्स और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में महाभारत थीम पर आधारित सांस्कृतिक व्याख्या केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
- प्रसाद (PRASHAD) योजना : आस्था और आध्यात्मिक पर्यटन की महत्ता को देखते हुए, इस योजना के अंतर्गत ₹1,700 करोड़ से अधिक की 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसने सोमनाथ, श्रीशैलम और उत्तर प्रदेश के पवित्र गोवर्धन जैसे उच्च फुटफॉल वाले स्थलों पर सुरक्षा और सुविधाओं को अत्यधिक सुदृढ़ किया है।
क्षेत्रीय संतुलन और वित्तीय प्रोत्साहन: पूर्वोदय और एसएएससीआई (SASCI)
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पर्यटन को अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए पूर्वोत्तर राज्यों (पूर्वोदय) और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का जरिया बनाया जा रहा है। बजट 2024-25 के बाद, पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत 23 राज्यों में ₹3,295.76 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है ताकि चुनिंदा उच्च-क्षमता वाले गंतव्यों को वैश्विक स्तर के पर्यटन केंद्रों में बदला जा सके।
निरंतरता और जिम्मेदारी: सतत पर्यटन और वैश्विक पहचान
जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, पर्यावरण और स्थानीय परंपराओं का संरक्षण अनिवार्य हो गया है। ओवरटूरिज्म की चुनौती से निपटने के लिए सरकार हिमालयन ट्रेकिंग, बर्डवॉचिंग और कछुआ पर्यटन जैसे विशिष्ट (Niche) उत्पादों के जरिए पर्यटकों के प्रवाह को विकेंद्रीकृत कर रही है।
- ट्रेवल फॉर लाइफ (Travel for LiFE) : यह कार्यक्रम पर्यटकों और व्यवसायों को पर्यावरण के प्रति जागरूक विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करता है।
- वैश्विक उपलब्धि : महाबलिपुरम (मामल्लापुरम) को दक्षिण एशिया में पहला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने का गौरव मिला है जिसने प्रतिष्ठित ग्रीन डेस्टिनेशन सिल्वर ग्लोबल सर्टिफिकेशन हासिल किया है।
- चुनौती-आधारित गंतव्य विकास (CBDD) : इसके तहत ₹697.94 करोड़ की 38 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिसमें असम का पानीदिहिंग पक्षी अभयारण्य और तेलंगाना की निजाम सागर इको-पर्यटन परियोजना शामिल हैं।
वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, डिजिटल नवाचार और एमआईसीई पर्यटन
- बेहतर राजमार्गों, वंदे भारत ट्रेनों, हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण और उड़ान (UDAN) योजना ने देश के कोने-कोने तक पहुंच को आसान बना दिया है। ई-पर्यटक वीजा प्रणाली और निधि (NIDHI) व निधि प्लस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने आवास प्रदाताओं और ट्रैवल एजेंटों के लिए व्यापार प्रक्रियाओं को पारदर्शी बना दिया है।
- वैश्विक रैंकिंग में उछाल : वर्ष 2024 में भारत में 20.6 मिलियन अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक आए, जिससे भारत की वैश्विक रैंकिंग वर्ष 2016 के 25वें स्थान से सुधरकर 20वें स्थान पर पहुँच गई।
- इसके अतिरिक्त, भारत की जी20 अध्यक्षता ने दुनिया के सामने देश की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया और भारत को एमआईसीई (बैठकें, प्रोत्साहन, सम्मेलन और प्रदर्शनियाँ) पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया।
मानव पूंजी का सशक्तिकरण: देखो अपना देश अभियान
- पर्यटन की सफलता अग्रिम पंक्ति के कार्यबल पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के घरेलू पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों को समर्थन देने के आह्वान के साथ, सरकार एक वर्ष की राष्ट्रीय पहल के रूप में देखो अपना देश अभियान को फिर से लॉन्च करने के लिए तैयार है। यह अभियान अल्प-ज्ञात स्थलों, स्थानीय व्यंजनों और सांस्कृतिक कहानियों को बढ़ावा देगा।
- क्षमता निर्माण : वर्ष 2014 से 2025 के बीच 4.5 लाख से अधिक सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया गया है।
- बजट 2026-27 के नए लक्ष्य: राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थानों के विकास और प्रतिष्ठित स्थलों पर 10,000 पर्यटक गाइडों के कौशल विकास का खाका तैयार किया गया है।
विजन 2030 और विकसित भारत@2047 की ओर कदम
- वर्तमान में भारत विश्व की शीर्ष पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में 8वें स्थान पर है, और यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में 231.6 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देता है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज़्म काउंसिल (WTTC) के अनुसार, अगले एक दशक में भारत वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर पहुँच जाएगा।
- पिछले दशक में 100 से अधिक गंतव्यों को अपग्रेड किया गया है, और अब 50 अन्य प्रमुख गंतव्यों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। एक पुनर्जीवित अतुल्य भारत (Incredible India) अभियान और मजबूत होती डिजिटल व भौतिक कनेक्टिविटी के साथ, भारत एक ऐसे पर्यटन इकोसिस्टम की नींव रख रहा है जो अधिक लचीला, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी है। भारत के पर्यटन परिवर्तन का यह नया अध्याय सतत विकास और विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।