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अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

संदर्भ 

  • हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा जारी एक चौंकाने वाली वैश्विक रिपोर्ट ने कार्यस्थल पर श्रमिकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। “मनोसामाजिक कार्य वातावरण: वैश्विक विकास और कार्रवाई के मार्ग” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, लंबे कार्य घंटे, नौकरी की असुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे मनोसामाजिक जोखिमों के कारण दुनिया भर में हर साल 8,40,000 से अधिक लोगों की जान जा रही है। 

रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु  

अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कार्य-संबंधी ये जोखिम न केवल व्यक्तिगत जीवन को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं :

  • मौतें और विकलांगता : इन जोखिमों के कारण सालाना 8.4 लाख मौतों के अलावा, लगभग 4.5 करोड़ विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALYs) का नुकसान होता है। 
  • जीडीपी को झटका : हृदय रोग और मानसिक विकारों के संयुक्त प्रभाव से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रतिवर्ष 1.37% की गिरावट आने का अनुमान है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के बारे में 

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) एक वैश्विक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानव एवं श्रम अधिकारों की रक्षा करना है। 
  • इसका मूल सिद्धांत यह है कि सामाजिक न्याय ही सार्वभौमिक और स्थायी शांति की आधारशिला है।

परिचय 

  • आईएलओ की स्थापना 1919 में हुई थी और यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रिपक्षीय एजेंसी है। 
  • इसकी विशेषता यह है कि इसमें 187 सदस्य देशों की सरकारें, नियोक्ता और श्रमिक तीनों मिलकर नीतियाँ बनाते हैं। 
  • यह संरचना श्रम से जुड़े मुद्दों पर संतुलित और समावेशी निर्णय सुनिश्चित करती है।

मिशन और प्रमुख उद्देश्य

  • श्रम मानकों का निर्धारण और संरक्षण
  • सम्मानजनक रोजगार के अवसर बढ़ाना
  • सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना
  • त्रिपक्षीय व्यवस्था और सामाजिक संवाद को मजबूत करना

प्रमुख जोखिम कारक और उनकी व्यापकता

आईएलओ ने मौत के इन आंकड़ों के पीछे पांच मुख्य कारकों को चिन्हित किया है :  

  • अत्यधिक कार्यभार : वैश्विक स्तर पर लगभग 35% श्रमिक प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं, जो स्ट्रोक और हृदय रोग का सीधा कारण बन रहा है।
  • हिंसा और उत्पीड़न : रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 23% श्रमिकों ने अपने करियर में कभी न कभी हिंसा या उत्पीड़न झेला है। इसमें 18% के साथ मनोवैज्ञानिक हिंसा सबसे शीर्ष पर है। 
  • नौकरी की असुरक्षा : भविष्य की अनिश्चितता श्रमिकों के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित कर रही है। 
  • प्रयास-पुरस्कार असंतुलन : मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक, प्रोन्नति और वेतन में वृद्धि न होना तनाव का बड़ा कारण है।
  • कार्य तनाव : काम की उच्च मांग और उस पर कर्मचारी का न्यूनतम नियंत्रण होना भी तनाव का प्रमुख कारण है।  

सुधार के लिए प्रस्तावित मार्ग 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, आईएलओ ने सरकार और उद्योग जगत के लिए नीतिगत हस्तक्षेप के सुझाव दिए हैं : 

  • ढाँचागत बदलाव : कार्यभार, कार्य नियंत्रण और संगठनात्मक न्याय जैसे पहलुओं पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • सामूहिक सौदेबाजी : रिपोर्ट में कार्यबल के सामूहिकरण और सामाजिक संवाद को सशक्त बनाने की वकालत की गई है, ताकि कानूनी प्रावधानों को धरातल पर उतारा जा सके।
  • निवारक दृष्टिकोण : केवल उपचार के बजाय, कार्यस्थल के माहौल को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए एक व्यापक निवारक दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की गई है।  

निष्कर्ष  

  • आईएलओ की यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि नीति और नियामक ढाँचे के बीच के अंतर को कम नहीं किया गया, तो कार्यस्थल से जुड़े ये मनोसामाजिक जोखिम आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकते हैं। वस्तुतः प्रभावी निगरानी और व्यवस्थित नीति मूल्यांकन ही एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की कुंजी है।
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