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कोरकू समुदाय (Korku Community)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में मध्य प्रदेश के स्वदेशी कोरकू (Korku) समुदाय ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। वनों पर आजीविका के लिए निर्भर खंडवा एवं बुरहानपुर जिलों के लगभग 150 गाँवों के करीब 2,000 कोरकू समुदाय के लोगों ने अपनी मांगों से राज्य के मुख्यमंत्री को अवगत कराने के लिए एक विशाल मार्च निकाला। वस्तुतः समुदाय का कहना है कि वन भूमि से अतिक्रमण हटाना उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा, आजीविका की सुरक्षा तथा वन संसाधनों के सतत संरक्षण के लिए आवश्यक है।

कोरकू समुदाय (Korku Community) के बारे में 

  • कोरकू एक प्राचीन एवं मुख्य रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि वाला आदिवासी जातीय समूह है।
  • इसे भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 
  • यह एक मुंडा जातीय समूह है, जो द्रविड़ भाषा बोलने वाली गोंड जनजाति के निकट भौगोलिक सामीप्य में निवास करता है। 

आवास और वितरण (Habitat and Distribution):

  • प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र : यह समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी मध्य प्रदेश के खंडवा, बुरहानपुर, बैतुल और छिंदवाड़ा जिलों में निवास करता है। इसके अलावा इस समुदाय के लोग महाराष्ट्र के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेष रूप से अमरावती जिले में मेलघाट टाइगर रिजर्व की पहाड़ियों के निकट) में भी निवास करते हैं। 

ऐतिहासिक साक्ष्य: 

  • ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, कोरकू एक शिकारी-संग्रहकर्ता (Hunter-gatherer) समुदाय था, जो ताप्ती नदी के दोनों ओर सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों में रहता था। 

प्रमुख विशेषताएँ:

  • विशिष्ट मुंडा भाषा : कोरकू समुदाय कोरकू भाषा बोलता है, जो एक लुप्तप्राय (Endangered) ऑस्ट्रो-एशियाटिक मुंडा भाषा है और सामान्यतः देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।
  • पारंपरिक शासन व्यवस्था : इस समुदाय में गाँव के मामलों का प्रबंधन कोरकू पंचायत द्वारा किया जाता है, जिसका नेतृत्व एक पटेल द्वारा किया जाता है और उसकी सहायता पडिहार, कोटवार तथा सम्मानित बुजुर्गों द्वारा की जाती है। 
  • अद्वितीय आवास वास्तुकला : इनके गाँवों में फूस की झोपड़ियों की पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें से प्रत्येक में आमतौर पर फसल और मवेशियों के चारे के भंडारण के लिए एक ऊंचा लकड़ी का मंच (प्लेटफॉर्म) होता है।  
  • कुशल कृषक : कोरकू समुदाय अनाज, दलहन और तिलहन की मौसमी दोहरी फसल (Double-cropping) की खेती करता है। यद्यपि भैंसदेही के कोरकू लोगों ने स्थानीय स्तर पर आलू और कॉफी की खेती भी करना प्रारंभ किया है।
  • सामाजिक संप्रदाय और गोत्र : इस समुदाय में चार प्रमुख उप-संप्रदाय और 16 गोत्र हैं, जो अक्सर प्राकृतिक तत्वों के नाम पर होते हैं और विवाह संबंधों को विनियमित करते हैं।
  • समुदाय-आधारित संरक्षण : हरि और जितोरी त्योहारों के दौरान, कोरकू समुदाय पर्यावरण क्षरण (Environmental Degradation) से निपटने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वृक्षारोपण करता है।  

महत्व और समकालीन चुनौतियाँ:

  • कोरकू समुदाय अपनी आजीविका के लिए महुआ, चिरौंजी, तेंदू पत्ते और औषधीय पौधों पर निर्भर है, जिसके कारण अवैध वन कटाई को रोकने और चराई भूमि (गोचर) की रक्षा करने की मांगें तेज हो रही हैं।
  • वस्तुतः भूमि पर बढ़ते दबाव और वनों पर प्रतिस्पर्धी दावों ने विवादों को तीव्र कर दिया है, जिसके चलते कोरकू समुदाय मजबूत सीमा सुरक्षा, संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और वनों पर पुनः अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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