संदर्भ
हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के पास एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल कुशा (Kusha) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया।
कुशा (Kusha) मिसाइल के बारे में
- कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को व्यापक दूरी और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है।
- इस हथियार प्रणाली के सभी प्रमुख घटकों, जिनमें मिसाइलें, रडार, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर शामिल हैं, का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और उद्योग साझेदारों द्वारा किया गया है।
- यह पहला परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के विरुद्ध किया गया, जो उच्च गति और उच्च ऊंचाई वाले हवाई खतरे का अनुकरण कर रहा था। मिसाइल प्रणाली द्वारा इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (नष्ट) किया गया।
- यह सफल परीक्षण भारत के स्वदेशी लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस प्रोग्राम प्रोजेक्ट कुशा की दिशा में एक अहम पड़ाव है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रूस के S-400 ट्रायम्फ और अमेरिका के MIM-104 पैट्रियट जैसे
- आधुनिक वायु रक्षा तंत्रों के समकक्ष एक स्वदेशी प्रणाली तैयार करना है।
- यह एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) मिसाइल प्रणाली है, जिसमें तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं:
- M1 इंटरसेप्टर: लगभग 150 किमी तक मारक क्षमता
- M2 इंटरसेप्टर: लगभग 250 किमी तक मारक क्षमता
- M3 इंटरसेप्टर: लगभग 350 से 400 किमी तक मारक क्षमता
मुख्य विशेषताएं और क्षमताएं:
- बहुआयामी सुरक्षा: पूर्णतः सक्रिय होने के बाद यह मिसाइल शील्ड दुश्मन के लड़ाकू विमानों, स्टील्थ एयरक्राफ्ट, ड्रोन्स, क्रूज मिसाइलों, प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों और कई श्रेणियों की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होगी।
- अत्याधुनिक तकनीक: लगभग मैक 5.5 की हाइपरसोनिक गति से उड़ने वाले इन इंटरसेप्टर्स को एडवांस रडार, सटीक फायर-कंट्रोल सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक कमांड इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन प्राप्त होगा।
- उत्पादन पार्टनर: सितंबर 2023 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायु सेना के लिए इसके 5 स्क्वाड्रन की खरीद हेतु आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) दी थी। इसमें रडार सिस्टम और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) मुख्य औद्योगिक साझेदार है।
रणनीतिक महत्व और मिशन सुदर्शन चक्र:
- आईएसीसीएस (IACCS) के साथ एकीकरण: यह स्वदेशी प्रणाली भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से सीधे जुड़ेगी, जिससे हवाई खतरों की रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। इससे विदेशी वायु रक्षा प्रणालियों पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा चक्र: यह प्रोजेक्ट प्रस्तावित मिशन सुदर्शन चक्र का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिशन के तहत भारत 2035 तक एक बहुस्तरीय राष्ट्रीय वायु और मिसाइल रक्षा कवच तैयार कर रहा है। इसमें लंबी दूरी के इंटरसेप्टर्स के अलावा क्विक-रिएक्शन SAM, वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस (VSHORAD), डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (DEW) और स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणालियाँ शामिल होंगी।