पारंपरिक भू-स्वामित्व की बाध्यता को दरकिनार कर महिला किसान प्रमाण पत्र की प्रगतिशील व्यवस्था लागू करना ग्रामीण भारत के लिए एक रोल मॉडल है। मौजूदा दौर में जहां जलवायु परिवर्तन के संकट बढ़ रहे हैं और आजीविका की तलाश में पुरुषों का शहरों की ओर पलायन हो रहा है, ऐसे में इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि एक समतावादी ग्रामीण आर्थिकी की नींव भी रखेगा।