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जीवित पशु परिवहन: नियम, चुनौतियाँ एवं समाधान

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

25 जुलाई, 2025 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए, ताकि अनधिकृत रूप से जीवित पशुओं के परिवहन को रोका जा सके।

क्या है हालिया मुद्दा

  • हाल के समय में कई यात्री उचित दस्तावेज या अनुमति के बिना जीवित पशुओं को भारत ला रहे हैं जिन्हें ‘अज्ञात आयात’ (Unbeknownst Imports) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 
  • यह न केवल भारतीय कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि जैव-सुरक्षा एवं पशु कल्याण के लिए भी खतरा पैदा करता है। 
  • ऐसी घटनाओं ने डी.जी.सी.ए. को एयरलाइंस से सख्त निगरानी एवं रोकथाम तंत्र विकसित करने की मांग की है।

जीवित पशुओं के परिवहन के नियम

भारत में जीवित पशुओं के परिवहन को कई कानूनों एवं नियमों द्वारा नियंत्रित किया जाता है-

  • पशु संगरोध एवं प्रमाणन सेवा (AQCS) : यह सुनिश्चित करता है कि आयातित पशु रोगमुक्त हों और उनके पास उचित स्वास्थ्य प्रमाणपत्र हों।
  • भारतीय सीमा शुल्क सेवा : यह आयातित पशुओं के लिए दस्तावेज एवं अनुमति की जाँच करती है। बिना अनुमति के लाए गए पशुओं को तत्काल उनके मूल देश में वापस भेजा जाता है।
  • वैमानिकी सूचना परिपत्र (AIC), 1985 : यह हवाई मार्ग से पशुओं के परिवहन के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है। इन नियमों के अनुसार, बिना उचित अनुमति के लाए गए पशुओं को तुरंत निर्वासित (Deported) करना अनिवार्य है और संबंधित देश के अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाती है।

DGCA के हालिया दिशा-निर्देश

डी.जी.सी.ए. ने एयरलाइंस को निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • रोकथाम तंत्र : एयरलाइंस को ऐसी रणनीतियाँ विकसित करने को कहा गया है जो अनधिकृत पशु परिवहन का पता लगाएँ और उसे रोकें।
  • एयरलाइंस की जिम्मेदारी : यदि कोई अनधिकृत पशु भारत में पाया जाता है तो उसे लाने वाली एयरलाइन को तत्काल निर्वासन की जिम्मेदारी लेनी होगी। निर्वासन से संबंधित सभी व्यय (जैसे- पशु देखभाल, दस्तावेज एवं लॉजिस्टिक्स) एयरलाइन को वहन करने होंगे।
  • कर्मचारी प्रशिक्षण : चेक-इन काउंटर, बोर्डिंग गेट एवं उड़ान संचालन में तैनात कर्मचारियों को सीमा शुल्क और संगरोध नियमों के बारे में प्रशिक्षित किया जाए।
  • यात्री जागरूकता : जीवित पशुओं के आयात पर प्रतिबंधों के बारे में यात्री सलाह एवं साइनेज को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

चुनौतियाँ

  • जागरूकता की कमी : कई यात्री जीवित पशुओं के परिवहन से संबंधित नियमों से अनजान हैं।
  • निगरानी की कमी : हवाई अड्डों पर सभी यात्रियों एवं उनके सामान की जाँच करना चुनौतीपूर्ण है।
  • लागत एवं लॉजिस्टिक्स : अनधिकृत पशुओं के निर्वासन की प्रक्रिया महंगी एवं जटिल है जिसमें पशु कल्याण व अंतर्राष्ट्रीय समन्वय शामिल है।
  • प्रशिक्षण की आवश्यकता : एयरलाइन कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देना समय एवं संसाधन मांगता है।

आगे की राह

  • जागरूकता अभियान : यात्रियों को जीवित पशुओं के परिवहन नियमों के बारे में शिक्षित करने के लिए हवाई अड्डों एवं एयरलाइंस द्वारा जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग : सामान की स्कैनिंग एवं दस्तावेज जांच के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग : अन्य देशों के संगरोध और सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
  • कठोर दंड : नियमों का उल्लंघन करने वाली एयरलाइंस और यात्रियों के लिए कठोर दंड लागू किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं कम हों।
  • नियमित ऑडिट : एयरलाइंस के अनुपालन की जांच के लिए डी.जी.सी.ए. द्वारा नियमित ऑडिट किए जाएं।

निष्कर्ष 

DGCA की यह पहल भारत की जैव सुरक्षा, कानून व्यवस्था एवं यात्रा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। विमानन कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना और यात्रियों को जागरूक करना ही ऐसे मामलों को रोकने की दिशा में पहला तथा सबसे कारगर कदम है। यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि भारत में कोई भी जीवित पशु कानूनी प्रक्रिया के तहत ही प्रवेश करे, ताकि देश में किसी भी प्रकार की बीमारी, अव्यवस्था या गैरकानूनी व्यापार को रोका जा सके।

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