चर्चा में क्यों?
भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए उन्हें ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद की गई।

संबंधों को मिला नया दर्जा
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम अब संस्कृति, कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा, सतत विकास और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
- भारत वर्ष 2007 में वियतनाम के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने वाले शुरुआती देशों में शामिल था। यह ASEAN क्षेत्र में भारत की पहली रणनीतिक साझेदारी थी। बाद में 2016 में दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) तक बढ़ाया था।
- अब दोनों देशों ने इसे और मजबूत करते हुए ‘Enhanced Comprehensive Strategic Partnership’ का दर्जा दिया है।
2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य
- भारत और वियतनाम ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
- पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारतीय दवाओं की वियतनाम में पहुंच आसान होगी।
- कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
- भारत से अंगूर और अनार का निर्यात बढ़ेगा।
- भारत में वियतनाम के ड्यूरियन और पोमेलो फलों की उपलब्धता बढ़ेगी।
11 समझौतों पर हस्ताक्षर
- दोनों देशों के बीच कुल 11 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े हैं:
- रेयर अर्थ मिनरल्स
- डिजिटल पेमेंट
- शहरी प्रबंधन
- संस्कृति और पांडुलिपियां
- विज्ञान एवं तकनीक
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर फोकस
- भारत और वियतनाम ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को अपनी साझेदारी का प्रमुख आधार बताया।
- दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक के संयुक्त उत्पादन, नौसेना सहयोग, सूचना साझा करने और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने पर सहमति जताई।
- संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से UNCLOS, का पालन करने की आवश्यकता दोहराई।
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल हुआ वियतनाम
- बैठक के दौरान वियतनाम ने भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने का भी फैसला किया। इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-वियतनाम संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं ?
- विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती देगा।
भारत-वियतनाम द्विपक्षीय संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक विश्वास, उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक सहयोग पर आधारित हैं।
- वर्ष 1972 में दोनों देशों ने औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए, हालांकि इनके संबंध इससे पहले ही मजबूत हो चुके थे।
- वर्ष 1954 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हनोई की मुक्ति के तुरंत बाद वियतनाम का दौरा करने वाले पहले विदेशी नेता बने।
- वियतनाम युद्ध के दौरान भारत ने लगातार वियतनाम की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया।
- वर्ष 1975 में वियतनाम के पुनर्मिलन के बाद भारत उसे मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में शामिल था।
- बाद में 2007 में दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया, जो ASEAN क्षेत्र में भारत की पहली रणनीतिक साझेदारी थी।
- वर्ष 2016 में इस सहयोग को और मजबूत करते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया गया, जिससे राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में संबंधों को नई दिशा मिली।
निष्कर्ष
भारत और वियतनाम के संबंधों को ‘Enhanced Comprehensive Strategic Partnership’ तक बढ़ाना दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और रणनीतिक सहयोग का संकेत है। व्यापार, रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है।