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भारत में मेडिकल टूरिज्म: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास व रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

बढ़ते स्वास्थ्य देखभाल खर्चों और भारत में समय पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता ने गैर-निवासी भारतीयों (NRI) को भारत की ओर आकर्षित किया है। भारत ने मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में यह साबित कर दिया है कि गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना किफायती उपचार संभव है।

मेडिकल टूरिज्म की अवधारणा

  • मेडिकल टूरिज्म का अर्थ चिकित्सा उपचार के लिए एक देश से दूसरे देश की यात्रा करने से है। 
  • भारत में यह अवधारणा किफायती लागत पर विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करने के कारण लोकप्रिय हो रही है। 
  • इसका प्रसार न केवल सर्जरी बल्कि नियमित उपचार, दवाइयों एवं स्वास्थ्य बीमा तक है।

विशेषताएँ

  • किफायती लागत : भारत में हार्ट बाईपास सर्जरी की लागत 5,000-8,000 डॉलर है, जबकि अमेरिका में यह 70,000-1,50,000 डॉलर तक हो सकती है। 
  • घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी भारत में 4,000-6,000 डॉलर में हो जाती है जबकि अमेरिका में इसकी लागत 50,000 डॉलर तक हो सकती है।
  • उच्च गुणवत्ता : भारत के शीर्ष अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और जटिल सर्जरी, जैसे- लीवर, किडनी प्रत्यारोपण एवं दंत चिकित्सा में उत्कृष्टता प्रदान करते हैं।
  • डिजिटल सुविधा : डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एन.आर.आई. आसानी से स्वास्थ्य बीमा खरीद सकते हैं और कैशलेस दावों का लाभ उठा सकते हैं।
  • वैश्विक पहुँच : भारत में उपचार केवल महानगरों तक सीमित नहीं है; अब टियर-3 शहरों, जैसे- थ्रिसूर, कोल्लम एवं ठाणे में भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

प्रभाव

  • मेडिकल टूरिज्म का प्रभाव केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह परिवारों की वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाता है क्योंकि एन.आर.आई. को विदेशों की तुलना में 60-90% कम व्यय करना पड़ता है। 
  • यह बचत उनके अन्य वित्तीय लक्ष्यों, जैसे- बच्चों की शिक्षा, मॉर्गेज (Mortgage) एवं रिटायरमेंट योजना में मदद करती है। 
  • इसके अलावा भारत में सस्ती दवाइयाँ (वैश्विक बाजारों की तुलना में 90% तक सस्ती) और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम (अमेरिका या खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों की तुलना में 25-40 गुना सस्ता) इस क्षेत्र को अधिक आकर्षक बनाते हैं।

भारत में स्थिति

  • भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 13 बिलियन डॉलर को पार करने की ओर अग्रसर है। 
  • हैदराबाद, चेन्नई, कोच्चि एवं तिरुवनंतपुरम जैसे महानगर चिकित्सा पर्यटन के लिए विश्वसनीय केंद्र बने हुए हैं और छोटे शहर भी तेजी से उभर रहे हैं। 
  • लगभग 50% एन.आर.आई. स्वास्थ्य बीमा दावे अब टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। 
  • पिछले एक वर्ष में एन.आर.आई. के बीच स्वास्थ्य बीमा की स्वीकृति 150% से अधिक बढ़ी है जिसमें 35 वर्ष से कम आयु के युवा (148% वृद्धि) और महिलाएँ (125% वृद्धि) अग्रणी हैं।
  • विशेष रूप से 60% एन.आर.आई. भारत में रहने वाले अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं।

एन.आर.आई. द्वारा भारत के चुनाव का कारण 

  • निम्न लागत : भारत में उपचार एवं बीमा लागत विदेशों की तुलना में बहुत कम है।
  • गुणवत्ता का आश्वासन : भारत के अस्पताल अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों से सुसज्जित हैं।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव : एन.आर.आई. के लिए भारत में उपचार कराना न केवल किफायती है, बल्कि सांस्कृतिक एवं भावनात्मक रूप से भी सुविधाजनक है।
  • परिवार की देखभाल : एन.आर.आई. अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदकर उनकी दीर्घकालिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को सुरक्षित कर रहे हैं।

विकास के कारक

  • बुनियादी ढांचे में सुधार : छोटे शहरों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म : ऑनलाइन बीमा खरीद और कैशलेस दावों की सुविधा
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा : भारत की किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ वैश्विक स्तर पर अन्य देशों से आगे हैं।
  • बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता : एन.आर.आई. अब स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति पहले से अधिक सजग हैं और दीर्घकालिक योजना बना रहे हैं।

सरकारी पहल एवं नीतियाँ

भारत सरकार की ‘हील इन इंडिया’ पहल ने मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पहल एन.आर.आई. एवं विदेशी मरीजों को भारत में उपचार के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके अलावा:

  • उदारीकृत नियम : स्वास्थ्य बीमा दावों और नीतियों को सरल बनाया गया है।
  • डिजिटल पहल : डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बीमा खरीद और दावों की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
  • अस्पतालों का नेटवर्क : कैशलेस उपचार के लिए अस्पतालों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया गया है।

चिंताएँ

  • जागरूकता की कमी : कई एन.आर.आई. अभी भी भारत में उपलब्ध चिकित्सा एवं बीमा सुविधाओं से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।
  • बुनियादी ढांचे की असमानता : टियर-3 शहरों में सुविधाएँ बढ़ रही हैं किंतु बड़े शहरों की तुलना में अभी भी अंतर है।
  • दीर्घकालिक देखभाल : कैंसर एवं हृदय रोग जैसी बीमारियों के लिए दीर्घकालिक उपचार की योजना बनाना चुनौतीपूर्ण है।
  • नियमन : मेडिकल टूरिज्म उद्योग में मानकीकरण व गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • जागरूकता अभियान : एन.आर.आई. के बीच भारत की चिकित्सा एवं बीमा सुविधाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
  • बुनियादी ढांचे का विस्तार : छोटे शहरों में अधिक चिकित्सा सुविधाएँ स्थापित की जानी चाहिए।
  • तकनीकी एकीकरण : डिजिटल व टेलीमेडिसिन सेवाओं को और बढ़ावा देना होगा।
  • नीतिगत सुधार : स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा पर्यटन के लिए अधिक उदार नीतियों की आवश्यकता है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण : विश्वास निर्माण के लिए सभी अस्पतालों में एकसमान गुणवत्ता मानकों को लागू करना होगा।
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