मिशन कर्मयोगी – उद्देश्य, चुनौतियाँ,संदर्भ

  • मिशन कर्मयोगी भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य सिविल सेवाओं में क्षमता निर्माण और अधिकारियों के पेशेवर विकास को सुनिश्चित करना है। इसे राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (NPCSCB) के हिस्से के रूप में 2021 में लॉन्च किया गया था।
  • सिविल सेवाओं में सुधार और प्रशिक्षण की आवश्यकता का आधार बदलती प्रशासनिक चुनौतियाँ, डिजिटल गवर्नेंस की मांग और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण हैं। 

  • इस मिशन के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि सिविल सेवक केवल नियम पालनकर्ता नहीं, बल्कि नवोन्मेषी, भूमिका-केंद्रित और दक्ष अधिकारी बनें।
  • हाल ही में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission - CBC) की स्थापना के तीन वर्ष पूरे हुए। 
  • CBC का उद्देश्य सिविल सेवा में समान प्रशिक्षण दृष्टिकोण विकसित करना और अनुभव साझा करने के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है।

NPCSCB-मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य

  • पेशेवर, प्रशिक्षित और भविष्योन्मुखी सिविल सेवा निर्माण:
    • अधिकारियों को भारत की विकास संबंधी आकांक्षाओं, राष्ट्रीय कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं के अनुरूप सक्षम बनाना।
  • संपूर्ण सरकार का समावेश:
    • केंद्रीय मंत्रालय, विभाग, संगठन और एजेंसियों के सभी सिविल सेवक (अनुबंधित कर्मचारी सहित) शामिल हैं।
    • इच्छुक राज्य सरकारें अपनी क्षमता निर्माण योजनाओं को इसी तर्ज पर संरेखित कर सकती हैं।
  • समान दृष्टिकोण अपनाना:
    • CBC की स्थापना का उद्देश्य सिविल सेवा में विश्वास बहाली, सहयोगात्मक कार्यशैली और अनुभव साझा करना है।

मार्गदर्शक सिद्धांत

भूमिका-आधारित प्रशिक्षण

  • पारंपरिक नियम-आधारित प्रशिक्षण से हटकर, भूमिका-आधारित और मांग-संचालित क्षमता निर्माण पर जोर।
  • इसका अर्थ है कि प्रशिक्षण अधिकारियों की वास्तविक कार्य जिम्मेदारियों के अनुरूप होना चाहिए।

योग्यता-आधारित दृष्टिकोण (ASK मॉडल)

  • A – Attitude (व्यवहार/आचार)
  • S – Skills (कौशल)
  • K – Knowledge (ज्ञान) – यह मॉडल प्रशिक्षण को केवल ज्ञान तक सीमित नहीं करता, बल्कि व्यवहार और कौशल विकास को भी प्राथमिकता देता है।

70-20-10 अधिदेश

  • 70% सीखना – नौकरी के अनुभवों से
  • 20% सीखना – दूसरों के साथ काम करने से
  • 10% सीखना – नियोजित प्रशिक्षण से
  • यह सिद्धांत इस बात को रेखांकित करता है कि अधिकांश सीखने का अनुभव वास्तविक कार्य संदर्भ में होता है।

संगठन और व्यक्तिगत लक्ष्य का संरेखण

  • प्रशिक्षण को संगठनात्मक लक्ष्यों और अधिकारी के करियर विकास के अनुरूप बनाना।
  • अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलती है कि उनका व्यक्तिगत विकास सीधे संगठन की सफलता से जुड़ा है।

निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली

  • प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ, निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन।
  • यह प्रणाली अधिकारियों के विकास और सुधार के लिए सटीक प्रतिक्रिया और मार्गदर्शन प्रदान करती है।

निरंतर और आजीवन सीखने का अवसर

  • विभागों और मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देना।
  • आधुनिक प्रशासन में सीखना एक सतत प्रक्रिया है, न कि केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम।

iGOT-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म

iGOT (Integrated Government Online Training) – कर्मयोगी प्लेटफॉर्म डिजिटल माध्यम से अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास का एक व्यापक मंच है।

विशेषताएँ

  1. अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का निरंतर निगरानी और मूल्यांकन।
  2. प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत लर्नर, पर्यवेक्षक, सामग्री प्रदाता और निर्माता शामिल हैं।
  3. हाल ही में अमृत ज्ञान कोष पोर्टल को iGOT में शामिल किया गया – यह पूरे भारत से सर्वोत्तम प्रथाओं का संग्रह प्रस्तुत करता है।
  4. पोर्टल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में से 15 लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करता है।

महत्व

  • ऑनलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से लागत में कमी और विस्तृत पहुंच।
  • अधिकारियों को नई तकनीक और ज्ञान से लैस करना।
  • विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करना।

NPCSCB-मिशन कर्मयोगी का महत्त्व

  • पेशेवर विकास:
    • बदलती भूमिकाओं के अनुसार अधिकारियों की व्यवहारिक, कार्यात्मक और डोमेन संबंधी दक्षताओं का विकास।
  • एक समान प्रशिक्षण दृष्टिकोण:
    • देशभर में मानक प्रशिक्षण स्तर सुनिश्चित करना।
  • प्रशिक्षण लागत में कमी:
    • ऑनलाइन कोर्सेज़ और iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशी प्रशिक्षण पर खर्च कम करना।
  • प्रेरणादायक नैतिकता:
    • नैतिक आचरण और मूल्य प्रणाली को बढ़ावा देना।
  • आर्थिक संवृद्धि:
    • व्यापार अनुकूल नीतियों और सेवा वितरण में सुधार।
  • नागरिक केंद्रित प्रशासन:
    • टीम वर्क और सेवा वितरण में सुधार के लिए भूमिका आधारित दृष्टिकोण।

NPCSCB-मिशन कर्मयोगी से जुड़ी चुनौतियाँ

  • विस्तार की चुनौती:
    • 1.5 करोड़ सरकारी अधिकारियों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन करना एक विशाल प्रशासनिक कार्य।
  • अति-केंद्रीकरण:
    • केंद्रीकृत प्रशिक्षण मॉडल राज्यों में प्रतिरोध उत्पन्न कर सकता है।
  • सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता:
    • हिमालयी और रेगिस्तानी क्षेत्रों के अधिकारियों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करना कठिन।
  • नौकरशाही में प्रतिरोध:
    • बड़े सुधारों के प्रति भारतीय नौकरशाही अक्सर सावधान और प्रतिरोधी रहती है।
  • तकनीकी और डिजिटल क्षमता:
    • सभी अधिकारियों के पास डिजिटल प्रशिक्षण के लिए समान तकनीकी क्षमता न होना।

नीति और प्रशासनिक विश्लेषण

  • मिशन कर्मयोगी लोकतांत्रिक प्रशिक्षण, समान अवसर और क्षमता निर्माण पर आधारित है।
  • यह सिविल सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने में योगदान करता है।
  • राज्यों और केंद्र के सहयोग से सेवा वितरण में सुधार संभव है।
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ संरेखण इसे वैश्विक प्रशासनिक मानकों के अनुरूप बनाता है।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

  • विकसित देशों जैसे सिंगापुर और न्यूजीलैंड में सिविल सेवा सुधार के लिए व्यावहारिक और डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल अपनाए गए हैं।
  • मिशन कर्मयोगी का iGOT प्लेटफॉर्म डिजिटल प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है।

निष्कर्ष

  • मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य सिविल सेवाओं को भूमिका आधारित, नागरिक केंद्रित, पेशेवर और नैतिक बनाना है। यह पहल प्रशिक्षण को लोकतांत्रिक और सर्वव्यापी बनाने, जटिलता को कम करने और असमानताओं को समाप्त करने के लिए महत्व रखती है।
  • यदि राज्यों की सहभागिता और CBC की निगरानी प्रभावी रूप से हो, तो यह मिशन सिविल सेवा की गुणवत्ता, सेवा वितरण और आर्थिक विकास में निर्णायक साबित हो सकता है।
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