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मायरिस्टिका स्वैम्प्स

चर्चा में क्यों? 

एक हालिया अध्ययन में संकेत दिया गया है कि मायरिस्टिका स्वैम्प्स (Myristica Swamps) विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए हैं। वस्तुतः ये अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र हैं, जिनका संरक्षण जैव विविधता और जल सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। 

मायरिस्टिका स्वैम्प्स क्या हैं? 

  • मायरिस्टिका स्वैम्प्स उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले मीठे पानी के दलदली वन हैं। 
  • इनमें सदाबहार वृक्षों की ऐसी प्रजातियां प्रमुख होती हैं, जो मायरिस्टिकेसी (Myristicaceae) कुल से संबंधित हैं। इन पौधों की आदिम विशेषताओं के कारण इन्हें कई बार ‘जीवित जीवाश्म’ भी कहा जाता है। 
  • इन वनों की एक प्रमुख पहचान पेड़ों की बड़ी और उभरी हुई जड़ें हैं, जो वर्षभर पानी से भरी मिट्टी से बाहर निकली दिखाई देती हैं। इनका विकास मुख्यतः उपजाऊ, जलभराव वाली जलोढ़ मिट्टी वाले मैदानी क्षेत्रों में होता है। 

भारत में वितरण 

  • भारत में मायरिस्टिका स्वैम्प्स मुख्य रूप से पश्चिमी घाट में पाए जाते हैं। 
  • इनके छोटे क्षेत्र अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और मेघालय में भी मौजूद हैं। 
  • वैश्विक स्तर पर मीठे पानी के दलदली वन पृथ्वी की कुल सतह के लगभग 2.1 प्रतिशत से भी कम हिस्से में पाए जाते हैं, जिससे इनका संरक्षण महत्व और बढ़ जाता है।
  • इन दलदली वनों की आनुवंशिक विविधता अत्यंत प्राचीन मानी जाती है और इसकी जड़ें लगभग 50 करोड़ वर्ष पुराने विकासक्रम तक जाती हैं।

पारिस्थितिक महत्व 

  • मायरिस्टिका स्वैम्प्स प्राकृतिक जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बाढ़ के प्रभाव को नियंत्रित करने, भूजल पुनर्भरण और वर्षभर मीठे जल के प्रवाह को बनाए रखने में सहायता करते हैं। 
  • इन वनों की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता उनकी कार्बन अवशोषित करने की क्षमता है, जो सामान्य गैर-दलदली वनों की तुलना में अधिक हो सकती है। इस कारण वे जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी योगदान देते हैं। 
  • इसके अलावा, ये दलदली पारिस्थितिक तंत्र विभिन्न कशेरुकी और अकशेरुकी जीवों को आवास प्रदान करते हैं। इसलिए मायरिस्टिका स्वैम्प्स का संरक्षण केवल दुर्लभ वनस्पतियों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संसाधनों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है।  
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