थाईलैंड में माफी कानून के अवसर और चुनौतियाँ

संदर्भ 

  • थाईलैंड लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य हस्तक्षेप और राजशाही बनाम लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों के बीच संघर्ष से जूझता रहा है। 2006 का सैन्य तख्तापलट इस राजनीतिक संकट का प्रमुख पड़ाव था। इसी पृष्ठभूमि में राजनीतिक तनाव कम करने और राष्ट्रीय सुलह को बढ़ावा देने के लिए ‘पीसफुल सोसाइटी प्रमोशन एक्ट’ लागू किया गया, जिसे जुलाई 2026 में मंजूरी मिलने के बाद 24 अगस्त 2026 से प्रभावी किया गया।
  • प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल की सरकार के लिए यह कानून संवेदनशील राजनीतिक संतुलन का प्रयास है। पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा का प्रभाव आज भी कायम है, जबकि उनके समर्थकों, राजशाही समर्थकों और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। ऐसे में यह माफी कानून पुराने राजनीतिक मामलों को सुलझाने के साथ राष्ट्रीय सुलह की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

कानून का दायरा और प्रमुख प्रावधान  

  • नए कानून के तहत 1 जनवरी 2005 से 16 जुलाई 2025 के बीच राजनीतिक संघर्षों, प्रदर्शनों और राजनीतिक अभिव्यक्तियों से जुड़े मामलों में माफी का प्रावधान है। इसके दायरे में 40 से अधिक अपराध शामिल हैं, जिनमें राजद्रोह, विद्रोह, कुछ साइबर अपराध और आपातकालीन कानूनों के उल्लंघन जैसे आरोप भी हैं। 
  • हालांकि भ्रष्टाचार, हत्या, गंभीर चोट और राजशाही के अपमान से जुड़े अनुच्छेद 112 को माफी से बाहर रखा गया है। पात्र मामलों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री या उनके प्रतिनिधि की अध्यक्षता में ‘पीसफुल सोसाइटी प्रमोशन कमेटी’ गठित होगी, जिसमें संसद, मानवाधिकार और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 
  • समिति को पात्र बंदियों की रिहाई, लंबित मामलों और जांच को समाप्त करने तथा आपराधिक रिकॉर्ड साफ करने का अधिकार होगा। इस तरह कानून का लक्ष्य करीब दो दशकों से चले आ रहे राजनीतिक मामलों का व्यापक समाधान और राष्ट्रीय सुलह सुनिश्चित करना है। 

हजारों लोगों को मिल सकती है राहत  

  • मानवाधिकार संगठन Thai Lawyers for Human Rights के अनुसार, 2006 के तख्तापलट के बाद राजनीतिक संघर्षों से जुड़े मामलों में 5,000 से अधिक लोगों पर मुकदमे चलाए गए। इनमें लगभग एक-तिहाई मामले 2020 के बाद दर्ज हुए। इन मामलों में लगभग 300 ऐसे लोग भी बताए गए हैं जो अपराध के समय नाबालिग थे। 
  • जुलाई 2026 तक राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में लगभग 54 लोग जेल में होने का अनुमान है। हालांकि, अनुच्छेद 112 के तहत आरोपित लोगों को माफी से बाहर रखने के कारण इनमें से केवल लगभग 10 लोगों को ही तत्काल राहत मिलने की संभावना बताई गई है। 
  • कानून का एक व्यापक प्रभाव उन हजारों लोगों के रिकॉर्ड पर पड़ सकता है जिनके खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों के कारण मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें थाकसिन समर्थक समूहों, राजशाही-विरोधी आंदोलनों और लोकतंत्र समर्थक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, 2006 के ‘येलो शर्ट’ आंदोलन में शामिल कुछ राजशाही समर्थकों को भी इसके प्रावधानों से लाभ मिल सकता है। इस तरह कानून की विशेषता यह है कि यह राजनीतिक संघर्ष के अलग-अलग पक्षों को एक ही कानूनी ढांचे के भीतर राहत देने का प्रयास करता है।

अनुच्छेद 112 पर सबसे बड़ा विवाद 

  • अनुच्छेद 112 को माफी से बाहर रखना नए कानून की प्रमुख आलोचनाओं में है। यह राजशाही के अपमान को अपराध मानता है और कठोर दंड का प्रावधान करता है।
  • मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इस प्रावधान का इस्तेमाल असहमति दबाने के लिए किया गया है। नाबालिगों को लेकर भी चिंता है। कानून निर्माण के दौरान 18 वर्ष से कम उम्र के अनुच्छेद 112 के दोषियों को माफी देने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन यह 126 के मुकाबले 15 मतों से खारिज हो गया।
  • आलोचकों का कहना है कि अनुच्छेद 112 के मामलों में नाबालिगों के लिए उपलब्ध पुनर्वास और वैकल्पिक न्यायिक उपायों का लाभ सीमित हो सकता है, जिससे युवा लोकतंत्र समर्थकों की कानूनी सुरक्षा प्रभावित होगी।
  • थाई संगठन 112watch ने इसे ‘चयनात्मक सुलह’ बताते हुए कहा है कि विवादास्पद अनुच्छेद 112 को माफी से बाहर रखना राष्ट्रीय मेल-मिलाप के बजाय राजनीतिक विभाजन को और गहरा कर सकता है। 

चुनाव संबंधी अपराधों पर भी प्रश्न 

  • कानून में चुनावी धोखाधड़ी से जुड़े कुछ अपराधों को संभावित माफी के दायरे में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठे हैं। आलोचकों को आशंका है कि इससे सीनेट चुनावों में कथित मिलीभगत जैसे मामलों में शामिल कुछ लोगों को भी लाभ मिल सकता है। 
  • यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजनीतिक अभिव्यक्ति और चुनावी अनियमितता दो अलग-अलग श्रेणियाँ हैं। यदि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अपराधों को भी व्यापक राजनीतिक माफी का हिस्सा बना दिया जाता है, तो इससे चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही और कानून के उद्देश्य पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। 

क्या यह वास्तविक सुलह की शुरुआत बन सकता है? 

  • थाईलैंड का नया कानून राजनीतिक सुलह का अवसर भी है और चुनौती भी। यह पुराने राजनीतिक मामलों को समाप्त कर हजारों लोगों को राहत देने और सामाजिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसकी सफलता माफी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता पर निर्भर करेगी।  
  • वास्तविक सुलह के लिए केवल मुकदमों का अंत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसी संस्थागत व्यवस्था जरूरी है, जिसमें राजनीतिक असहमति के लिए लोकतांत्रिक स्थान, न्यायपालिका पर विश्वास और राज्य संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित हो।  
  • इस लिहाज से ‘पीसफुल सोसाइटी प्रमोशन एक्ट’ थाईलैंड को लंबे राजनीतिक संघर्ष से आगे बढ़ने का अवसर देता है। यदि इसका क्रियान्वयन समानता, पारदर्शिता और मानवाधिकारों के सम्मान के साथ होता है, तो यह राष्ट्रीय सुलह की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकता है। लेकिन किसी भी बड़े राजनीतिक वर्ग को बाहर रखा गया, तो सुलह की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। 
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