New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

पेंडोरा मिशन

(प्रारंभिक परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1: विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
(मुख्य परीक्षा :  सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

चर्चा में क्यों 

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ द्वारा एक्सोप्लैनेट के अध्ययन के लिए ‘पेंडोरा मिशन’(Pandora mission) लॉन्च करने घोषणा की गई।  

पेंडोरा मिशन’ के बारे में 

  • परिचय : पेंडोरा एक लघु उपग्रह है जिसे बाह्य ग्रहों के वायुमंडल और उनके मेजबान तारों की विशेषता बताने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • लॉन्च : वर्ष 2025 के अंत में 
  • लक्ष्य : बाह्यग्रहों (एक्सोप्लैनेट) के वायुमंडल का विश्लेषण करना 
    • यह मिशन, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से प्राप्त आंकड़ों को परिष्कृत करके  बाह्य ग्रहों के वायुमंडल का विश्लेषण करेगा।
  • संयुक्त प्रयास : यह मिशन मैरीलैंड स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर और कैलिफोर्निया स्थित लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी का एक संयुक्त प्रयास है।

मिशन के उद्देश्य 

  • एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल का अध्ययन 
  • मिशन के तहत 20 एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल का विश्लेषण किया जाएगा ताकि इनके संघटन तथा संरचना को समझने के लिए इनमें जलवाष्प, मीथेन और अन्य गैसों की उपस्थिति का पता लगाया जा सके है।  
  • तारकीय गतिविधि और प्रेक्षणों पर इसके प्रभाव की निगरानी 
    • यह मिशन लगातार दृश्यमान और अवरक्त प्रकाश दोनों में मेजबान तारों का निरीक्षण करेगा जिससे उनकी चमक का एक्सोप्लैनेट पर पड़ने वाले प्रभाव को समझा जा सके। 
    • मिशन वास्तविक वायुमंडलीय विशेषताओं और तारकीय हस्तक्षेप  के बीच अंतर करने में सहायता करेगा। 

तारकीय हस्तक्षेप : यह विशाल आकाशीय पिंडों के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के कारण प्रकाश पैटर्न में होने वाली विकृति या परिवर्तन है जिसके कारण तारों और अन्य खगोलीय पिंडों से आने वाले प्रकाश पर प्रभाव पड़ता है।

  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और अन्य एक्सोप्लैनेट मिशनों का समर्थन करना
    • यह मिशन जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, हबल और अन्य दूरबीनों से प्राप्त डाटा  का उपयोग करके एक्सोप्लैनेट वायुमंडलीय मॉडल की सटीकता में सुधार करेगा।
      • जिससे ग्रहों के निर्माण एवं विकास के बारे में समझ को विस्तारित किया जा सके। 
    • इसके अलावा यह मिशन JWST के विपरीत, लंबे समय तक बाह्यग्रहों का निरीक्षण कर सकता है।
  • एक्सोप्लैनेट विज्ञान में स्मॉलसैट क्षमताओं का प्रदर्शन
    • यह मिशन कम लागत वाले स्मॉलसैट खगोल भौतिकी और ग्रह विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। 
    • इसके अलावा,  यह मिशन भविष्य के कम बजट तथा उच्च प्रभाव वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए संभावनाएँ उत्पन्न करता है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR