New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 6th Feb., 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

पार्सियाना पत्रिका : एक युग का अंत

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य एवं वास्तुकला के मुख्य पहलू)

संदर्भ

पारसी समुदाय में प्रसिद्ध ‘पार्सियाना पत्रिका’ का 60 वर्षों के बाद अंतिम संस्करण अक्तूबर 2025 में प्रकाशित हो रहा है। इस समुदाय के सदस्यों ने इसे ‘युग का अंत’ कहा है क्योंकि पारसियों की संख्या घट रही है और युवा पीढ़ी में इसे संभालने वाले कम हैं।

पार्सियाना के बारे में

  • पार्सियाना द्वि-साप्ताहिक पत्रिका है जो अंग्रेजी में प्रकाशित होती है और मुख्यत: पारसी (Zoroastrian) समुदाय के लिए समर्पित है।
  • यह समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक जिंदगी को कवर करती रही है।
  • मुंबई से प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका पारसियों की उपलब्धियों, विवाह-मृत्यु जैसे व्यक्तिगत समाचारों और वैश्विक घटनाओं को जोड़ती थी।
  • इसकी मूल (ऐतिहासिक) टैगलाइन ‘पुराने ज्ञान के लिए एक नया माध्यम’ (A new Medium for Old Wisdom) है।
  • वर्तमान में इसका वार्षिक सदस्यता शुल्क भारत में 1200 रुपए है और यह मुंबई से पाकिस्तान, अमेरिका तक पहुंचती थी।
  • पत्रिका की वेबसाइट वर्ष 2005 में शुरू हुई, जहां ई-मैगजीन उपलब्ध है।

इतिहास

  • पार्सियाना की शुरुआत नवंबर 1964 में मुंबई में पारसी डॉक्टर पेस्टोंजी वॉर्डन ने की, जो चंदन व्यापार में भी सक्रिय थे।
  • शुरू में यह मासिक पत्रिका थी, जो जोरोस्ट्रियन धर्म, इतिहास, रीति-रिवाजों पर लेख प्रकाशित करती थी।
  • अमेरिका से लौटे पत्रकार जहांगीर पटेल ने वर्ष 1973 में इसे 1 रुपए में खरीद लिया।
  • पटेल ने इसे द्वि-साप्ताहिक बनाया और 5 सदस्यों की टीम के साथ पहला संस्करण निकाला, जिसमें मात्र 400 प्रतियां बिकीं।
  • वर्ष 1987 से यह जन्म, विवाह, मृत्यु जैसे समाचार भी छापने लगी। पत्रिका ने वर्ष 1978 में ‘पार्सियाना बुक ऑफ ईरानी नेम्स’ भी प्रकाशित किया।

समापन का कारण 

  • पार्सियाना का समापन 21 अक्टूबर 2025 को होगा।
  • संपादक पटेल के अनुसार, मुख्य कारण पारसी आबादी का घटना है।
  • सदस्यता घटकर 1500 रह गई है जोकि ज्यादातर ई-मैगजीन है।
  • हालांकि, पुराने अंक ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे।

जोरोस्ट्रियन धर्म के बारे में

  • जोरोस्ट्रियन धर्म दुनिया का सबसे पुराना एकेश्वरवादी धर्म है, जिसकी स्थापना ईरान में पैगंबर जरथुस्त्र (Zoroaster) ने दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में की।
  • यह अच्छाई (Ahura Mazda) और बुराई (Angra Mainyu) के बीच संघर्ष पर आधारित है।
  • इसका मुख्य ग्रंथ अवेस्ता (Avesta) है, जिसमें गाथाएं (गीत) शामिल हैं।
  • इसके अनुयायी अच्छे विचार, अच्छे शब्द और अच्छे कर्मों पर जोर देते हैं।
  • इसमें अग्नि को पवित्र माना जाता है, जो ईश्वर का प्रतीक है। यहाँ कोई मठवासी जीवन नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी की संकल्पना है।
  • मृत्यु के बाद आत्मा का न्याय होता है और पुनर्जन्म की अवधारणा सीमित है।

इतिहास

  • जोरोस्ट्रियन भारत में 8वीं-10वीं सदी में ईरान से आए, जब मुस्लिम आक्रमणों से बचने के लिए पारसी (Parsi) (फारसी) शरणार्थी गुजरात पहुंचे।
  • किंवदंती के अनुसार, वे संजन (गुजरात) में उतरे, जहां राजा ने कुछ शर्तों पर आश्रय दिया, जैसे- गुजराती भाषा-वेशभूषा अपनाना, हथियार त्यागना और रात्रि में पूजा।
  • वे पहले दीव (Diu) में बसे, फिर गुजरात के संजन एवं नवसारी में। 17वीं सदी में ब्रिटिश व्यापार से मुंबई चले गए।
  • वर्ष 1854 में दीनशॉ मानेकजी ने ईरानी जोरोस्ट्रियनों की मदद के लिए फंड बनाया।
  • भारत ने उन्हें स्वतंत्रता और समृद्धि दी, जिससे वे व्यापार, शिक्षा एवं स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हुए।

भारत में वर्तमान स्थिति

  • भारत में जोरोस्ट्रियन (मुख्यतः पारसी) की आबादी 50,000 से 70,000 है, जो दुनिया में सबसे बड़ी है किंतु यह धीरे-धीरे घट रही है।
  • मुंबई में इनकी संख्या 50,000 से कम है और गुजरात व अन्य शहरों में बिखरे हैं।
  • कारण: निम्न जन्म दर, अंतर-धर्म विवाह (विवादास्पद), प्रवास।
  • वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं- टाटा, गोदरेज जैसे उद्योगपति।
  • सामाजिक चुनौतियां: अगियारी (अग्नि मंदिर) कम होना, पुजारी की कमी।
  • सकारात्मक: शिक्षा और सैन्य सेवा में योगदान (जैसे- 1971 युद्ध में सैम मानेकशॉ)
  • सरकार इन्हें अल्पसंख्यक मानती है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X