KeywordsPM Internship Scheme 2026, PMIS Pilot Round 3, PM Internship Scheme UPSC, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, MSME Internship Scheme, GCC India, कौशल विकास, युवा रोजगार, CSR, UPSC Current Affairs 2026 Focus AreaGS Paper-II सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ, युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास, सहकारी संघवाद GS Paper-III रोजगार सृजन, MSME क्षेत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश, समावेशी विकास, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, मानव पूंजी विकास |
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (Prime Minister Internship Scheme–PMIS) के Pilot Round 3 (अप्रैल 2026 से) के अंतर्गत योजना का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs), वैधानिक निकायों तथा पेशेवर संस्थानों को भी इसमें शामिल करने की अनुमति दी है। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि योजना के पहले दो पायलट चरणों में इंटर्नशिप स्वीकार करने वाले उम्मीदवारों की संख्या अपेक्षा से कम रही तथा बीच में योजना छोड़ने (High Attrition) की समस्या सामने आई। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना को अधिक आकर्षक, सुलभ तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बनाने के उद्देश्य से इसमें व्यापक सुधार किए हैं।
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विवरण |
जानकारी |
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योजना |
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) |
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शुभारंभ |
अक्टूबर 2024 |
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नोडल मंत्रालय |
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) |
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उद्देश्य |
युवाओं को अग्रणी उद्योगों में संरचित इंटर्नशिप उपलब्ध कराकर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना |
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लक्ष्य |
पाँच वर्षों में 1 करोड़ इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराना |
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योजना की प्रकृति |
Paid इंटर्नशिप कार्यक्रम |
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Pilot Round 3 |
अप्रैल 2026 से प्रभावी |
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वर्तमान लक्ष्य |
दिसंबर 2026 तक 1.10 लाख इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराना |
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सुधार |
पहले |
अब (Pilot Round 3) |
|---|---|---|
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पात्र आयु |
21–24 वर्ष |
18–25 वर्ष |
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मासिक स्टाइपेंड |
₹5,000 |
₹9,000 |
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इंटर्नशिप अवधि |
12 माह |
6–9 माह |
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पात्र कंपनियाँ |
लगभग 500 |
लगभग 2,000 |
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पायलट अवधि |
सीमित |
दिसंबर 2026 तक विस्तारित |
अधिक से अधिक युवाओं को स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप उपलब्ध कराने तथा उद्योगों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने योजना का दायरा देश की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों से आगे बढ़ाते हुए कई नई संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया है।
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नई पात्र संस्थाएँ |
महत्व |
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MSMEs |
स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप उपलब्ध कराकर युवाओं के पलायन को कम करने में सहायक |
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Global Capability Centres (GCCs) |
वैश्विक स्तर की तकनीक, अनुसंधान एवं व्यावसायिक प्रक्रियाओं का अनुभव प्रदान करेंगे |
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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) |
विमानन एवं एयरपोर्ट प्रबंधन क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण |
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शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) |
समुद्री परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुभव |
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भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) |
लेखांकन, ऑडिट एवं वित्तीय प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण |
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भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI) |
कॉर्पोरेट गवर्नेंस एवं अनुपालन (Compliance) का अनुभव |
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भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (ICMAI) |
लागत लेखांकन एवं वित्तीय विश्लेषण का प्रशिक्षण |
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अन्य वैधानिक निकाय |
विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों में इंटर्नशिप के अवसरों का विस्तार |
MSMEs भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं तथा इनकी उपस्थिति देश के लगभग सभी राज्यों, जिलों और छोटे शहरों में है। इन्हें योजना में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके निवास स्थान के निकट इंटर्नशिप उपलब्ध कराना है, जिससे यात्रा और स्थानांतरण से जुड़ी कठिनाइयाँ कम हों तथा अधिक उम्मीदवार योजना का लाभ उठा सकें। इसके अतिरिक्त, यह पहल स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित युवा कार्यबल उपलब्ध कराएगी, छोटे एवं मध्यम शहरों में रोजगार क्षमता बढ़ाएगी तथा क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति प्रदान करेगी।
Global Capability Centres (GCCs) वे केंद्र हैं जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में स्थापित करती हैं ताकि वे अपनी उच्च मूल्य वाली व्यावसायिक गतिविधियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाएँ, अनुसंधान एवं विकास (R&D), साइबर सुरक्षा तथा डेटा एनालिटिक्स का संचालन भारत से कर सकें।
PM Internship Scheme के अंतर्गत GCCs में इंटर्नशिप मिलने से भारतीय युवाओं को वैश्विक कार्य संस्कृति, अत्याधुनिक तकनीकों तथा अंतरराष्ट्रीय उद्योग मानकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनकी वैश्विक रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक राज्य सरकार को अधिकतम 20 कंपनियों को प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में शामिल करने के लिए नामित करने का अधिकार दिया गया है। इससे राज्यों को अपने स्थानीय उद्योगों और क्षेत्रीय आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कंपनियों को योजना से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
यह प्रावधान सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को भी मजबूत करेगा, क्योंकि केंद्र और राज्य मिलकर स्थानीय औद्योगिक क्लस्टरों तथा रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप इंटर्नशिप अवसर विकसित कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत अधिक कंपनियों को शामिल करने के साथ-साथ कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल वित्तीय रूप से सक्षम और प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने वाली कंपनियाँ ही इस योजना का हिस्सा बनें। इसके लिए कंपनियों के चयन हेतु कुछ न्यूनतम वित्तीय मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
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पात्रता मानदंड |
आवश्यक शर्त |
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CSR संबंधी मानदंड |
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के आधार पर चयन |
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अतिरिक्त शर्त |
वार्षिक टर्नओवर ₹1,000 करोड़ से अधिक या |
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वैकल्पिक शर्त |
पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी की कुल नेटवर्थ ₹500 करोड़ से अधिक |
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पायलट चरण |
इंटर्नशिप ऑफर |
वास्तव में शामिल हुए उम्मीदवार |
|---|---|---|
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प्रथम चरण |
82,000 से अधिक |
8,760 |
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द्वितीय चरण |
83,000 से अधिक |
लगभग 7,300 |
पहले दो पायलट चरणों में कंपनियों द्वारा 1.65 लाख से अधिक इंटर्नशिप ऑफर जारी किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से इंटर्नशिप जॉइन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम रही। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल इंटर्नशिप अवसरों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें छात्रों के लिए भौगोलिक रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से आकर्षक और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना भी आवश्यक है।
सरकार ने अब केवल इंटर्नशिप अवसरों की संख्या बढ़ाने के बजाय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, जागरूकता फैलाने तथा स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
इस उद्देश्य से निम्नलिखित प्रमुख पहलें की जा रही हैं —
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क्षेत्र |
महत्व |
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रोजगार (Employment) |
यह योजना युवाओं को उद्योगों में कार्य करने का वास्तविक अनुभव प्रदान करती है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ती है और नौकरी प्राप्त करने की संभावना मजबूत होती है। |
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कौशल विकास (Skill Development) |
कक्षा आधारित शिक्षा के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने से युवाओं के तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल में सुधार होता है। |
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MSME विकास |
स्थानीय MSMEs को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी तथा क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। |
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जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) |
भारत की विशाल युवा आबादी को कुशल कार्यबल में परिवर्तित कर दीर्घकालिक आर्थिक विकास और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा। |
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भर्ती प्रक्रिया में सुधार |
कंपनियाँ इंटर्नशिप के दौरान प्रतिभाशाली युवाओं की पहचान कर भविष्य में उन्हें स्थायी रोजगार दे सकेंगी, जिससे भर्ती और प्रशिक्षण की लागत कम होगी। |
सरकार को एक मजबूत डिजिटल मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिसके माध्यम से इंटर्नशिप की गुणवत्ता, प्रशिक्षण की प्रगति, पूर्णता दर (Completion Rate) तथा इंटर्नशिप के बाद रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं का नियमित मूल्यांकन किया जा सके। इससे योजना की प्रभावशीलता बढ़ेगी और समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालयों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs), Skill India मिशन, राज्य सरकारों तथा उद्योग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिक युवाओं तक योजना की पहुँच बढ़ाई जा सकती है। यदि इंटर्नशिप को भविष्य की भर्ती प्रक्रिया से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए तो यह योजना भारत के कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल सिद्ध हो सकती है।
Prelims MCQप्रश्न: प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 Mains Practice Question"भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तभी आर्थिक शक्ति में परिवर्तित हो सकता है, जब कौशल विकास को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए।" इस संदर्भ में संशोधित प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के महत्व का विश्लेषण कीजिए। |
Frequently Asked Questions (FAQs)1. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) क्या है ?प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना अक्टूबर 2024 में शुरू की गई भारत सरकार की एक सवेतन इंटर्नशिप योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना है। 2. सरकार ने MSMEs को इस योजना में क्यों शामिल किया है ?MSMEs देशभर में व्यापक रूप से फैले हुए हैं, जिससे युवाओं को अपने घर के निकट इंटर्नशिप के अवसर मिल सकेंगे। इससे यात्रा और स्थानांतरण की समस्या कम होगी तथा योजना में भागीदारी बढ़ेगी। 3. प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का संचालन कौन-सा मंत्रालय करता है ?इस योजना का संचालन कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs - MCA) द्वारा किया जाता है तथा विभिन्न कंपनियाँ एवं साझेदार संस्थाएँ इसके क्रियान्वयन में सहयोग करती हैं। 4. Pilot Round 3 में कौन-कौन से प्रमुख बदलाव किए गए हैं ?Pilot Round 3 में मासिक स्टाइपेंड ₹9,000 किया गया है, इंटर्नशिप अवधि 12 माह से घटाकर 6–9 माह की गई है, आयु सीमा 18–25 वर्ष कर दी गई है तथा MSMEs, GCCs और वैधानिक निकायों सहित अधिक संस्थाओं को योजना में शामिल किया गया है। 5. UPSC परीक्षा की दृष्टि से यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है ?यह योजना रोजगार, कौशल विकास, MSME, जनसांख्यिकीय लाभांश, सरकारी योजनाओं, समावेशी विकास तथा मानव पूंजी निर्माण जैसे विषयों से संबंधित है, इसलिए यह UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। |
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