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PM-RAHAT: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय कैशलेस उपचार मिशन

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक) के जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी (DHO) ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री राहत (PM-RAHAT) योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को राहत प्राप्त करने के लिए अब चेहरे की पहचान (Facial Identification) की अनिवार्यता नहीं रहेगी। 
  • यह निर्णय दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार सुनिश्चित करने और प्रशासनिक बाधाओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है PM-RAHAT योजना ?

  • PM-RAHAT (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर और नकदरहित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। 
  • इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा संचालित किया जाता है।
  • योजना के तहत किसी भी श्रेणी की सड़क पर दुर्घटना का शिकार हुए पात्र व्यक्ति को दुर्घटना की तिथि से सात दिनों तक अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। 
  • यह योजना अन्य केंद्रीय अथवा राज्य स्तरीय योजनाओं पर प्राथमिकता रखती है।

उपचार व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ

  • योजना के अंतर्गत दुर्घटना पीड़ितों को नामित अस्पतालों में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। 
  • गैर-जीवन-घातक परिस्थितियों में 24 घंटे तक तथा जीवन-घातक परिस्थितियों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण (Stabilization) उपचार प्रदान किया जाएगा। 
  • इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद के ‘गोल्डन ऑवर’ का प्रभावी उपयोग कर मृत्यु दर को कम करना है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा संचालन

PM-RAHAT योजना को दो प्रमुख डिजिटल प्रणालियों के एकीकरण के माध्यम से लागू किया गया है —

1. eDAR (Electronic Detailed Accident Report) 

  • यह प्लेटफॉर्म पुलिस अधिकारियों द्वारा दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग और जांच संबंधी विवरण दर्ज करने के लिए उपयोग किया जाता है।

2. TMS 2.0 (Transaction Management System)

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा संचालित यह प्रणाली अस्पतालों को उपचार विवरण दर्ज करने, दावा प्रस्तुत करने और भुगतान प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करती है।
  • उपचार शुरू होने पर अस्पताल TMS पर उपचार आईडी जनरेट करेगा, जिसे eDAR के माध्यम से संबंधित पुलिस अधिकारियों को भेजा जाएगा। पुलिस को सामान्य मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे के भीतर प्रमाणीकरण करना होगा।

ERSS-112 से एकीकरण

  • योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (Emergency Response Support System-112) से जोड़ा गया है। 
  • इसके माध्यम से दुर्घटना पीड़ित अथवा ‘गुड समैरिटन’ (सहायता करने वाला नागरिक) 112 पर कॉल कर निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा एम्बुलेंस सहायता का अनुरोध कर सकते हैं।

भुगतान की व्यवस्था

योजना के अंतर्गत अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund-MVAF) के माध्यम से किया जाएगा।

  • यदि दुर्घटना में शामिल वाहन बीमित है, तो भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से किया जाएगा।
  • हिट-एंड-रन तथा बिना बीमा वाले मामलों में भुगतान भारत सरकार के बजटीय आवंटन से किया जाएगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही

  • योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूर्ण डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली है। दुर्घटना की सूचना मिलने से लेकर अस्पताल में भर्ती, उपचार, पुलिस प्रमाणीकरण, दावा निपटान और अंतिम भुगतान तक प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। 
  • इससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी तथा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

शिकायत निवारण तंत्र

  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में एक शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी जिला सड़क सुरक्षा समिति के अधीन कार्य करेगा, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।
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