प्रगति प्लेटफॉर्म

संदर्भ 

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान, रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। 

प्रगति प्लेटफॉर्म के बारे में

  • प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) भारत सरकार का एक प्रमुख मंच है, जो प्रधानमंत्री द्वारा राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ साझेदारी में परियोजनाओं, योजनाओं और शिकायत निवारण की प्रत्यक्ष एवं वास्तविक समय में या रीयल-टाइम समीक्षा के माध्यम से उन्हें तेज़ी से आगे बढ़ाता है। 
  • प्रगति इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल शासन किस प्रकार नीतिगत मंशा को वास्तविक और दृष्टिगोचर प्रगति में बदल सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2015 में प्रारंभ किया गया प्रगति, भारत में प्रमुख ढाँचागत परियोजनाओं और महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यक्रमों की निगरानी एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित कर चुका है। 

व्यवस्थित समीक्षा और अनुवर्ती प्रक्रिया  

  • प्रगति एक प्रौद्योगिकी-आधारित मंच है, जो परियोजनाओं की निगरानी, नागरिक शिकायतों का निवारण तथा केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों के जरिए योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा  करता है। इसके अलावा यह पीएम गतिशक्ति, परिवेश और पीएम रेफ पोर्टल जैसे मंचों को भी एकीकृत करता है।
  • शीर्ष स्तर पर, प्रधानमंत्री राज्यों के मुख्य सचिवों तथा केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के सचिवों के साथ प्रगति समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, जिनमें चिन्हित परियोजनाओं और योजनाओं से संबंधित मुद्दों का समाधान किया जाता है।
  • बैठकों के पश्चात्, एक बहु-स्तरीय अनुवर्ती तंत्र निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करता है। परियोजनाओं की निगरानी कैबिनेट सचिवालय द्वारा की जाती है, जबकि योजनाओं और शिकायतों की समीक्षा मंत्रालय स्तर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की निरंतर निगरानी में की जाती है।  

सहकारी संघवाद और शासन को सशक्त बनाना 

  • प्रगति मंच सहकारी संघवाद को व्यावहारिक रूप में संस्थागत रूप प्रदान करता है। वस्तुतः राज्यों के मुख्य सचिव और भारत  सरकार के सचिव एक साथ में भाग लेते हुए, वास्तविक समय में जवाबदेही निभाते हुए, राज्यों के बीच तथा केंद्र-राज्य मामलों के त्वरित समाधान को सक्षम बनाते हैं। 
  • यह मंच विभाजन को समाप्‍त कर निम्‍नलिखित सुनिश्चित करता है: 
    • विविध मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच सीधा ताल-मेल।
    • कैबिनेट सचिवालय द्वारा समयबद्ध अनुवर्ती निगरानी।
    • बँटी हुई जिम्‍मेदारी की जगह परिणामों की साझा जिम्मेदारी
  • इस मॉडल ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय को काफी हद तक बेहतर बनाया है और बड़ी सार्वजनिक परियोजनाओं में पारंपरिक रूप से देरी का कारण बनने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम किया है।

बहुआयामी प्रभाव 

अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का प्रभाव चार प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई देता है - 

  • आर्थिक: परियोजनाओं में देरी से लागत और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ता है तथा आर्थिक लाभ टलते हैं। प्रगति परियोजनाओं को तेजी से पूरा कर निवेश का बेहतर लाभ सुनिश्चित करता है।
  • सामाजिक: बेहतर सड़क, रेल, पुल और लॉजिस्टिक्स से दूर-दराज के क्षेत्रों की स्कूल, अस्पताल और बाजारों तक पहुंच बढ़ती है। इससे रोजगार, अवसर और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • पर्यावरणीय: प्रगति और पीएम गतिशक्ति के माध्यम से पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों की पहले से पहचान कर वैकल्पिक मार्ग और टिकाऊ डिजाइन अपनाए जा सकते हैं। डिजिटल समीक्षा से अनावश्यक यात्रा और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है।
  • सुशासन: यह समयबद्ध जवाबदेही, पारदर्शिता और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करता है तथा परियोजनाओं की तेज और प्रभावी डिलीवरी की संस्कृति विकसित करता है। 

प्रगति @ 50 

  • प्रगति ने 50वीं बैठक की है,जो इस बात का महत्‍वपूर्ण उदाहरण है कि प्रौद्योगिकी-सक्षम नेतृत्व, सहकारी संघवाद और सतत निगरानी से कैसे राष्ट्रीय स्तर पर इरादों को ठोस परिणामों में बदला जा सकता है। 
  • प्रधानमंत्री ने इस बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों - सड़क, रेलवे, विद्युत, जल संसाधन और कोयला की पाँच महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएँ 5 राज्यों में फैली हैं, जिनकी कुल लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह पिछले एक दशक में भारत में शासन की संस्कृति में आए गहन परिवर्तन का प्रतीक है।  
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