- प्रगति (Pro-Active Governance and Timely Implementation - PRAGATI) प्लेटफॉर्म भारत सरकार का एक अभिनव और एकीकृत डिजिटल मंच है, जो प्रमुख कार्यक्रमों, परियोजनाओं और शिकायतों की निगरानी, समीक्षा तथा समाधान के लिए विकसित किया गया है।
- यह प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की सहायता से आंतरिक रूप से डिज़ाइन किया गया है।
- हाल ही में, प्रगति ने अपनी 50वीं बैठक के सफल आयोजन के साथ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जो इसके प्रभावी योगदान को दर्शाता है।
- प्रगति का मुख्य उद्देश्य ई-पारदर्शिता (e-Transparency) और ई-जवाबदेही (e-Accountability) को बढ़ावा देना है, जिससे सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- यह मंच तीन आधुनिक तकनीकों डिजिटल डेटा प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी को एक साथ जोड़ता है, जो इसे एक अनोखा उपकरण बनाता है।

प्रगति प्लेटफॉर्म की पृष्ठभूमि और संरचना
प्रगति की शुरुआत बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी से हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं और सार्वजनिक शिकायतों तक विस्तारित हो गया है।
यह एक त्रिस्तरीय प्रणाली है:
- शीर्ष स्तर: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)।
- मध्य स्तर: केंद्रीय सरकार के सचिव।
- निचला स्तर: राज्यों के मुख्य सचिव।
- इस संरचना के माध्यम से, प्रधानमंत्री सीधे केंद्रीय और राज्य अधिकारियों के साथ संवाद कर सकते हैं।
- समीक्षा बैठकों में, प्रधानमंत्री की स्क्रीन पर मुद्दे से संबंधित नवीनतम अपडेट, दृश्य साक्ष्य और परियोजना स्थलों की जानकारी प्रदर्शित होती है।
- बैठकें वास्तविक समय में होती हैं, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी हितधारक जुड़ते हैं।
- प्रगति प्लेटफॉर्म जनता की शिकायतों, चल रहे कार्यक्रमों और लंबित परियोजनाओं से संबंधित डेटाबेस से मुद्दों का चयन करता है।
- यह शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS), परियोजना निगरानी समूह (PMG) और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के डेटाबेस को एकीकृत करता है। इसके अलावा, आम जनता, राज्य के उच्च अधिकारी या सार्वजनिक परियोजनाओं के विकासकर्ताओं द्वारा PMO को भेजे गए पत्रों पर भी विचार किया जाता है।
प्रमुख विशेषताएं
प्रगति प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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विशेषता
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विवरण
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एकीकृत निगरानी
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केंद्रीय और राज्य सरकारों की परियोजनाओं की वास्तविक समय में समीक्षा। प्रधानमंत्री परियोजना स्थलों से प्राप्त जानकारी और दृश्य साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों से संवाद करते हैं।
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तकनीकी एकीकरण
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डिजिटल डेटा प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का संयोजन, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
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शिकायत समाधान
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जनता की शिकायतों का त्वरित निवारण, जिसमें CPGRAMS जैसे डेटाबेस का उपयोग।
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अनुवर्ती तंत्र
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बहुस्तरीय फॉलो-अप सिस्टम, जो निर्णयों के समयबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है। परियोजनाओं की निगरानी कैबिनेट सचिवालय द्वारा, जबकि योजनाओं और शिकायतों की PMO द्वारा।
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विस्तारित दायरा
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शुरू में बुनियादी ढांचा पर केंद्रित, अब सामाजिक योजनाओं और शिकायतों तक विस्तारित, इसे जन-केंद्रित शासन उपकरण बनाता है।
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कार्यान्वयन और प्रभाव
- प्रगति की बैठकों में प्रधानमंत्री चिन्हित मुद्दों की अध्यक्षता करते हैं, जहां राज्य मुख्य सचिव और केंद्रीय सचिव भाग लेते हैं।
- बैठक के बाद, अनुवर्ती तंत्र निर्णयों को लागू करने पर नजर रखता है।
- यह प्रणाली न केवल देरी को कम करती है, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है।
- उदाहरण के लिए, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे रेलवे, सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं में प्रगति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- 50वीं बैठक की सफलता से स्पष्ट है कि प्रगति ने शासन में दक्षता बढ़ाई है। यह प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल इंडिया विजन का हिस्सा है, जो ई-गवर्नेंस को मजबूत करता है।