चर्चा में क्यों ?
- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (Frontier Nagaland Territorial Authority-FNTA) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। नागालैंड विधानसभा ने 3 सितंबर, 2026 को इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था।
- नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने इसे पूर्वी नागालैंड के लोगों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बताया है।

फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) क्या है?
- FNTA का उद्देश्य पूर्वी नागालैंड के लिए एक ऐसी क्षेत्रीय स्वशासी व्यवस्था स्थापित करना है, जिसके अंतर्गत संबंधित क्षेत्र को राज्य के भीतर विधायी, कार्यकारी और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जाएगी।
- यह व्यवस्था नागालैंड राज्य से अलग एक नया राज्य बनाने के बजाय राज्य के भीतर विकेंद्रीकृत शासन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
FNTA के अंतर्गत शामिल छह जिले
- तुएनसांग (Tuensang)
- मोन (Mon)
- लोंगलेंग (Longleng)
- किफिरे (Kiphire)
- नोक्लाक (Noklak)
- शामाटोर (Shamator)
FNTA की प्रमुख विशेषताएँ
- क्षेत्रीय स्वायत्तता: पूर्वी नागालैंड के निर्धारित क्षेत्र को विधायी, कार्यकारी और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने का प्रावधान है।
- विकेंद्रीकृत शासन: क्षेत्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक स्वशासन के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से संबोधित करना।
- अंतरिम परिषद: संक्रमणकालीन अवधि में नागालैंड सरकार एक अंतरिम परिषद गठित करेगी, जो चुनावों के माध्यम से FNTA के गठन तक इसके मामलों की देखरेख करेगी।
- अंतरिम परिषद की अवधि: परिषद अपने गठन की तिथि से एक वर्ष तक या पहली FNTA के गठन तक कार्य करेगी, जो भी पहले हो।
- संवैधानिक संरक्षण: विधेयक के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 371A के अंतर्गत लागू विशेष प्रावधानों तथा बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (BEFR), 1873 और पंचायत राज से संबंधित छूट की व्यवस्था जारी रहेगी।
FNTA की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- पूर्वी नागालैंड में लंबे समय से विकास संबंधी असमानताओं, क्षेत्रीय उपेक्षा और स्थानीय आकांक्षाओं को लेकर असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है।
- ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (Eastern Nagaland People’s Organisation-ENPO) वर्ष 2010 से पूर्वी नागालैंड के लिए अलग राज्य की मांग करता रहा है।
- संगठन का तर्क रहा है कि क्षेत्र को विकास, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाओं के मामले में पर्याप्त लाभ नहीं मिला है।
- इस मांग के समाधान के लिए केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ENPO के बीच बातचीत हुई।
- इसके परिणामस्वरूप 5 फरवरी को एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Agreement-MoA) पर हस्ताक्षर किए गए।
- FNTA विधेयक इसी समझौते के अनुरूप क्षेत्रीय स्वशासन की व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में कदम है।
- ENPO पूर्वी नागालैंड की आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है-चांग, खियामन्युंगन, कोन्याक, फोम, संगतम, तिखिर, यिमखियुंग और ईस्टर्न सुमी।
अनुच्छेद 371A क्या है?
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371A नागालैंड के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान करता है।
- इसे संविधान (तेरहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1962 के माध्यम से शामिल किया गया था।
इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं—
- धार्मिक एवं सामाजिक प्रथाएँ: नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं से संबंधित संसद का कोई अधिनियम, नागालैंड विधानसभा के निर्णय के बिना लागू नहीं होगा।
- प्रथागत कानून: नागा प्रथागत कानून और उससे संबंधित न्याय प्रशासन के विषयों पर संसद के कानूनों के लागू होने के लिए विशेष शर्तें निर्धारित हैं।
- भूमि एवं संसाधन: भूमि और उसके संसाधनों के स्वामित्व तथा हस्तांतरण से संबंधित संसद के कानूनों के लिए भी विशेष संवैधानिक संरक्षण है।
- राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी: नागालैंड के राज्यपाल को कानून-व्यवस्था के संबंध में विशेष जिम्मेदारी दी गई है, जिसकी संवैधानिक सीमाएँ निर्धारित हैं।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: अनुच्छेद 371A नागालैंड की विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रथागत व्यवस्थाओं की रक्षा करता है। FNTA की क्षेत्रीय स्वायत्तता की व्यवस्था इसी विशेष संवैधानिक संदर्भ में विकसित की जा रही है।
बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (BEFR), 1873 क्या है?
- बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 औपनिवेशिक काल का एक विनियमन है, जो संरक्षित क्षेत्रों में बाहरी लोगों के प्रवेश और निवास को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था का आधार है।
- इसके अंतर्गत इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit-ILP) व्यवस्था लागू होती है। नागालैंड में सामान्यतः राज्य के बाहर के भारतीय नागरिकों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रवेश के लिए ILP की आवश्यकता होती है।
- इसका उद्देश्य स्थानीय जनजातीय समुदायों की पहचान, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना है।
FNTA का महत्त्व
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना: स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ने से विकास योजनाओं को क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सकता है।
- जनजातीय अधिकारों का संरक्षण: क्षेत्रीय स्वशासन स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
- लोकतांत्रिक भागीदारी: स्थानीय प्रतिनिधियों और समुदायों की शासन प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ सकती है।
- शांति एवं स्थिरता: लंबे समय से चली आ रही अलग राज्य की मांग का संस्थागत समाधान क्षेत्र में विश्वास और शांति को मजबूत कर सकता है।
- सहकारी संघवाद को बढ़ावा: केंद्र, राज्य सरकार और क्षेत्रीय संगठनों के बीच बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान भारतीय संघीय व्यवस्था में संवाद के महत्त्व को दर्शाता है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- वित्तीय स्वायत्तता: FNTA को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और राजस्व संबंधी अधिकार उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
- अधिकारों का स्पष्ट विभाजन: राज्य सरकार और FNTA के बीच विधायी, कार्यकारी एवं प्रशासनिक अधिकारों को लेकर अस्पष्टता से बचना होगा।
- प्रभावी क्रियान्वयन: अंतरिम परिषद से निर्वाचित प्राधिकरण तक संक्रमण सुचारु रूप से सुनिश्चित करना होगा।
- विकास संबंधी असमानताएँ: शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार और रोजगार में मौजूद कमियों को दूर करना आवश्यक होगा।
- सामाजिक समावेशन: विभिन्न जनजातीय समुदायों के हितों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होगा।
- जवाबदेही: स्वायत्त संस्थाओं में पारदर्शिता, नियमित लेखा-परीक्षा और सार्वजनिक निगरानी की व्यवस्था जरूरी होगी।
आगे की राह
- FNTA और नागालैंड सरकार के बीच अधिकारों एवं जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए।
- क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत संरचना में सुधार के लिए समयबद्ध योजनाएँ बनाई जाएँ।
- अंतरिम परिषद से निर्वाचित प्राधिकरण तक संक्रमण पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से पूरा किया जाए।
- स्थानीय जनजातीय समुदायों, नागरिक समाज और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- अनुच्छेद 371A के अंतर्गत प्राप्त संवैधानिक संरक्षणों का सम्मान करते हुए जवाबदेह और प्रभावी शासन व्यवस्था विकसित की जाए।
निष्कर्ष
- फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी की स्थापना पूर्वी नागालैंड की क्षेत्रीय आकांक्षाओं और विकास संबंधी मांगों को राज्य के भीतर स्वशासन के माध्यम से संबोधित करने का प्रयास है।
- इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वायत्तता को पर्याप्त वित्तीय संसाधनों, स्पष्ट प्रशासनिक अधिकारों, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और प्रभावी जवाबदेही से कितना जोड़ा जाता है।
- यह पहल भारतीय संघवाद में क्षेत्रीय विविधता और स्थानीय स्वशासन के बीच संतुलन स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
UPSC MCQs
प्रश्न: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371A के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह नागालैंड के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान करता है।
- यह नागाओं की धार्मिक एवं सामाजिक प्रथाओं तथा प्रथागत कानूनों से संबंधित विशेष संरक्षण प्रदान करता है।
- यह नागालैंड को भारतीय संघ से अलग होने का संवैधानिक अधिकार प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3
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FAQs
FNTA का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर :-पूर्वी नागालैंड में क्षेत्रीय स्वशासन के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई आकांक्षाओं को पूरा करना।
अनुच्छेद 371A किस राज्य से संबंधित है?
उत्तर :- नागालैंड।
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