अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार पर प्रोटोकॉल

(प्रारम्भिक परीक्षा: भूगोल)

(मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन, प्रश्नपत्र- 3: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन)

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में, भारत और बांग्लादेश ने अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार  के प्रोटोकॉल के दूसरे परिशिष्ट पर हस्ताक्षर किये।
  • यह प्रोटोकॉल दोनों देशों के बीच न सिर्फ विश्वसनीयता बढ़ाएगा बल्कि लागत प्रभावशीलता के द्वारा व्यापार को और सुविधाजनक बनाएगा।

प्रमुख बिंदु

पारगमन और व्यापार पर प्रोटोकॉल :

  • भारत और बांग्लादेश के बीच अंतर्देशीय जलमार्ग के माध्यम से पारगमन और व्यापार पर प्रोटोकॉल पर पहली बार वर्ष 1972 में हस्ताक्षर किये गए थे।
  • इसे वर्ष 2015 में पाँच साल के लिये नवीनीकृत किया गया था और  5 वर्षों पश्चात इसे पुनः नवीनीकृत करने की बात की गई थी।

प्रोटोकॉल के लिये दूसरा परिशिष्ट :

दूसरे परिशिष्ट में, दोनों देशों के बीच व्यापार की सुविधाओं को बढ़ाने के लिये, नए इंडो-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (IBP) मार्ग और नए पोर्ट्स ऑफ़ कॉल (Ports of Call) की घोषणा शामिल है।

प्रमुख मार्ग

  • अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार के प्रोटोकॉल के अनुसार , एक देश के अंतर्देशीय जहाज़ दूसरे देश के निर्दिष्ट मार्गों से पारगमन कर सकते हैं। प्रोटोकॉल के तहत, भारतीय और बांग्लादेशी जहाज़ों द्वारा, 50:50 के अनुपात में कार्गो के बँटवारे को पारगमन और अंतर्देशीय व्यापार के लिये अनुमति दी जाती है।
  • आई.बी.पी. मार्गों की संख्या 8 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है।
  • प्रोटोकॉल में गुमटी नदी (Gumti river) के सोनमुरा-दाउदकंडी खंड (Sonamura-Daudkandi stretch) को शामिल करने से भारत और बांग्लादेश के आर्थिक केंद्रों के साथ त्रिपुरा और आसपास के राज्यों के सम्बंधों में सुधार होगा।
  • राजशाही-धुलियान-राजशाही मार्ग  (Rajshahi-Dhulian-Rajshahi Route)  का परिचालन और अराइका (बांग्लादेश) तक इसका विस्तार बांग्लादेश में बुनियादी ढाँचे के विस्तार में मदद करेगा।

पोर्ट्स ऑफ़ कॉल

  • पोर्ट्स ऑफ़ कॉल एक प्रकार के मध्यवर्ती बंदरगाह होते हैं, जहाँ जहाज़ माल की आपूर्ति, मरम्मत या ट्रांसशिपमेंट के लिये रुकते हैं। इनका प्रयोग कई बार सामान और यात्रियों को चढ़ाने या उतारने के लिये किया जाता है तथा कई बार ईंधन आपूर्ति के लिये भी प्रयोग किया जाता है।
  • प्रोटोकॉल के तहत भारत और बांग्लादेश दोनों जगह 6-6 पोर्ट्स ऑफ़ कॉल हैं। ये भारत में कोलकाता, हल्दिया, पांडु, करीमगंज, सिलघाट और धुबरी में स्थित हैं और बांग्लादेश में नारायणगंज, खुल्लन, मोंगला, सिराजगंज, अशुगंज और पनगाँव में स्थित हैं।
  • पाँच नए पोर्ट्स ऑफ़ कॉल : धुलियन, माइया, कोलाघाट, सोनमुरा और जोगीगोपा भारतीय सीमा पर हैं, जबकि राजशाही, सुल्तानगंज, चिलमारी, दाउदकंडी और बहादुरबाद बांग्लादेश की तरफ हैं।
  • दो विस्तारित पोर्ट्स ऑफ कॉल भारत के तरफ ट्रिबेनी (बंदेल, पश्चिम बंगाल) और बदरपुर (असम) हैं और बांग्लादेश की तरफ घोरसाल और मुक्तापुर स्थित हैं।
  • भारत में जोगीघोपा और बांग्लादेश में बहादुरबाद को शामिल करने से मेघालय, असम और भूटान के बीच सम्बंधों को और ज़्यादा विस्तार मिलेगा।
  • एक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क को भी जोगीगोपा में स्थापित करने का प्रस्ताव है।

कार्गो गतिविधियों के नए अवसर

  • इस प्रोटोकॉल के तहत, दोनों देशों के अंतर्देशीय जहाज़ कार्गो के लोडिंग / अनलोडिंग के लिये अधिसूचित प्रोटोकॉल मार्ग और डॉक पर काम कर सकते हैं।
  • भारतीय पारगमन कार्गो में मुख्य रूप से उत्तर पूर्व क्षेत्र में बिजली परियोजनाओं के लिये इस्तेमाल किया जाने वाला कोयला, फ्लाई-ऐश, ओवर डायमेंशनल कार्गो (ODC) आदि आते हैं।
  • इसके आलावा कई बार जहाज़ कार्गो के रूप में उर्वरक, सीमेंट, खाद्यान्न, कृषि उत्पाद, आदि भी ले जाते हैं।

आगे की राह

हाल के दिनों में भारत के लगातार चीन और नेपाल जैसे देशों से सीमा विवाद उभर कर सामने आए हैं और उनमें से अधिकतर भारत द्वारा किये जा रहे विकासात्मक कार्यों कि वजह से सुर्ख़ियों में रहे हैं। इस परिस्थिति में भारत और बांग्लादेश के बीच जलमार्गों द्वारा उभरते नए समीकरण कहीं न कहीं उपमहाद्वीप में भारत कि स्थिति को और मज़बूत करेंगे।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT