हाल ही में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की हैदराबाद टीम ने वारंगल में एक व्यक्ति के पास से जीवित भारतीय लाल रेत बोआ (Red Sand Boa) सांप बरामद किया। यह व्यक्ति अवैध रूप से सांपों की तस्करी और व्यापार में शामिल था। यह सांप एरीक्स जॉनी प्रजाति का है।
रेड सैंड बोआ (Red Sand Boa) के बारे में
रेड सैंड बोआ एक दोमुंहा या मटिया सांप है।
इस सांप में जहर नहीं होता।
वैज्ञानिक नाम
इसे एरीक्स जॉनी (Eryx johnii) कहा जाता है।
आवास
यह सांप मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान और ईरान में मिलता है।
इसे सूखी, रेतीली और ढीली मिट्टी वाले इलाके पसंद हैं। ऐसी मिट्टी में यह आसानी से गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर छिप जाता है।
यह सांप अपना ज्यादातर समय जमीन के नीचे ही बिताता है। यह रात के समय बाहर निकलता है (रात्रिचर) और दिन में छिपा रहता है।
यह सांप अंडे नहीं देता, बल्कि इसके अंडे शरीर के अंदर ही विकसित होते हैं और यह सीधे बच्चों को जन्म देता है।
रंग और आकार
इसका शरीर काफी मोटा होता है और रंग आमतौर पर लाल-भूरा होता है। इसकी औसत लंबाई लगभग 2.5 फीट (75 सेंटीमीटर) होती है।
इस सांप की पूंछ का हिस्सा भी आगे के सिर जैसा ही गोल और मोटा होता है। इसी वजह से दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे इसके दो सिर हों, हालांकि इसका मुंह एक ही होता है।
इसकी सुरक्षा और स्थिति
जंगलों में इस सांप की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है, इसलिए इसे निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) जीवों की सूची में रखा गया है।
भारत में रेड सैंड बोआ को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची (Schedule) के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इसे पकड़ना, बेचना, या घर में रखना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
रेड सैंड बोआ की तस्करी का कारण
हाल के वर्षों में, भारत के घरेलू अवैध बाजारों में रेड सैंड बोआ की मांग में भारी उछाल देखा गया है, जिसका मुख्य कारण उनसे जुड़े नए जमाने के अंधविश्वास हैं।
वे अपने मालिक के लिए सौभाग्य लाते हैं।
यह दावा भी है कि इस सांप में इरिडियम (पृथ्वी की पपड़ी में पाए जाने वाले सबसे दुर्लभ और अत्यधिक महंगे तत्वों में से एक) होता है और इसलिए इसमें अलौकिक शक्तियां होती हैं।