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REPM विनिर्माण प्रोत्साहन योजना

(प्रारंभिक परीक्षा: महत्त्वपूर्ण योजनाएं एवं कार्यक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: सरकारी नीतियों व विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग व रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)

संदर्भ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 7,280 करोड़ के वित्तीय परिव्यय से एक नई योजना को मंज़ूरी दी है जिसका उद्देश्य भारत में सिंटर्ड ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ (REPM) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के बारे में

  • सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सबसे शक्तिशाली स्थायी चुंबक होते हैं जो नियोडिमियम एवं सैमरियम जैसी दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों के मिश्रधातुओं से बनाए जाते हैं। सिंटरिंग एक निर्माण प्रक्रिया है जिसमें पाउडर को गर्म करके संपीड़ित किया जाता है ताकि ठोस चुंबक बनाया जा सके। 
  • इसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड को धातुओं में, धातुओं को मिश्र धातुओं में और मिश्र धातुओं को आर.ई.पी.एम. में परिवर्तित करना शामिल है। कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई यह योजना एकीकृत आर.ई.पी.एम. विनिर्माण इकाईयाँ स्थापित करने में सहायक होगी।
  • REPM की मुख्य विशेषताओं में उच्च चुंबकीय शक्ति, उच्च ताप प्रतिरोध, बेहतर प्रदर्शन के साथ कॉम्पैक्ट आकार के साथ-साथ उच्च-प्रदर्शन अनुप्रयोगों में इसका कोई व्यवहार्य विकल्प उपलब्ध न होना शामिल है। 

क्या है REPM ईकोसिस्टम 

  • REPM ईकोसिस्टम से तात्पर्य उस संपूर्ण औद्योगिक ढाँचे से है जिसमें दुर्लभ धातु ऑक्साइड्स (Rare Earth Oxides) को धातु में बदलना, धातु से अलॉय (Alloy) तैयार करना और अंत में उन अलॉय से उच्च गुणवत्ता वाले परमानेंट मैग्नेट बनाना जैसी सभी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। यह अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है जिसमें संपूर्ण घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाएगी।
  • इस पहल का उद्देश्य एक घरेलू आपूर्ति शृंखला बनाना है जो NdPr (नियोडिमियम-प्रेज़ोडिमियम) ऑक्साइड को हाई-परफॉर्मेंस सिंटर्ड NdFeB (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) मैग्नेट में बदल दे। इनका प्रयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), विंड टर्बाइन, एयरोस्पेस एवं रक्षा अनुप्रयोगों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल इमेजिंग इक्विपमेंट में अत्यधिक होता है क्योंकि REPM दुनिया के सबसे शक्तिशाली व कुशल मैग्नेट माने जाते हैं।
    • विशेष रूप से NdFeB चुंबक विश्व स्तर पर उपलब्ध सबसे शक्तिशाली वाणिज्यिक चुंबक हैं जो नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन जैसे दुर्लभ-पृथ्वी-आधारित मिश्रधातुओं को सिंटर करके बनाए जाते हैं।
      • एक सामान्य मिड-साइज़ इलेक्ट्रिक कार के लिए 1-2 kg NdFeB मैग्नेट की ज़रूरत होती है जबकि एक 3-MW ऑफशोर विंड टर्बाइन के लिए लगभग 600 kg की ज़रूरत होती है।

REPM योजना के बारे में

  • मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित यह योजना भारत में 6,000 MTPA (मेट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमता वाले एकीकृत REPM विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए लाई गई है।
  • इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 7,280 करोड़ है जिसमें पाँच वर्षों के लिए आर.ई.पी.एम. बिक्री पर 6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन और भारत में प्रतिवर्ष 6 हजार मीट्रिक टन एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट-आर.ई.पी.एम. विनिर्माण इकाईयाँ स्थापित करने के लिए 750 करोड़ की पूंजीगत सहायता शामिल है।
  • इसके कार्यान्वयन की देखरेख भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा परमाणु ऊर्जा विभाग, खान मंत्रालय और नीति आयोग के सहयोग से किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

  • इस योजना के तहत भारत में पहली बार संपूर्ण एकीकृत REPM उत्पादन श्रृंखला स्थापित होगी जिसमें ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक शामिल हैं।
  • कुल 5 लाभार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली (Global Competitive Bidding) के माध्यम से चयनित किया जाएगा।
  • प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 1,200 MTPA क्षमता आवंटित की जाएगी। योजना की कुल अवधि 7 वर्ष होगी जिसमें 2 वर्ष सेट-अप अवधि और 5 वर्ष इंसेंटिव अवधि है।

भारत में वर्तमान स्थिति

  • भारत के पास 6.9 मिलियन टन REE भंडार है जो विश्व स्तर पर पाँचवाँ सबसे बड़ा है। इसके बावजूद भी वैश्विक उत्पादन में इसका योगदान लगभग 1% है। वर्तमान में भारत की REPM की लगभग पूरी माँग आयात पर निर्भर है।
    • चीन वैश्विक REPM आपूर्ति के लगभग 90% को नियंत्रित करता है।
  • भारत का वर्ष 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक गाड़ियों की पहुंच के लक्ष्य और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज वृद्धि के साथ वर्ष 2030 तक REPM की माँग दोगुनी होने की संभावना है।
  • रेयर अर्थ मिनरल्स के सर्वाधिक व्यवहार्य स्रोत अधिकांशत: दक्षिण भारत में हैं। केरल में सर्वाधिक मोनाज़ाइट बेल्ट हैं। ये विशेषकर कोल्लम-अलपुझा-कन्याकुमारी क्षेत्र में हैं जहाँ इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड चावरा व मनावलकुरिची में बड़े संयंत्र संचालित करती है।
  • ओडिशा के गंजाम, बालासोर एवं मयूरभंज ज़िलों, विशेषकर छत्रपुर मिनरल सैंड बेल्ट में, तीन मिलियन टन से अधिक हैवी मिनरल रिसोर्स होने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश के तटीय ज़ोन श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम व कृष्णा-गोदावरी इलाके के साथ-साथ तमिलनाडु के तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली व कन्याकुमारी ज़िले भी इसके स्रोत हैं।

मुख्य विशेषताएँ

  • पहली बार देश में REPM के लिए संपूर्ण एकीकृत विनिर्माण अवसंरचना स्थापित होगी।
  • योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करेगी और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को समर्थन देगी।
  • यह परियोजना EV, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा एवं एयरोस्पेस जैसी उच्च-तकनीकी उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी।
  • प्रोत्साहन सीधे तैयार किए गए मैग्नेट की बिक्री से जुड़े होंगे, जिससे उद्योगों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
  • REPM विनिर्माण से नई तकनीक, शोध, कौशल एवं रोजगार सृजन बढ़ेगा।
  • भारत को वैश्विक REPM बाजार में एक उभरती शक्ति के रूप में स्थापित किया जाएगा।
  • यह पहल भारत की नेट जीरो 2070 प्रतिबद्धता को गति देगी।

क्या आप जानते हैं?

  • मोनाज़ाइट लाल-भूरे रंग का एक फॉस्फेट मिनरल है जिसमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स (जैसे- सेरियम, लैंथेनम व नियोडिमियम) और थोरियम भरपूर मात्रा में होते हैं जो प्राय: बीच एवं नदी की रेत में पाए जाते हैं।
  • 17 अलग-अलग रेयर अर्थ एलिमेंट को अलग करने के लिए सैकड़ों स्टेज में सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन की ज़रूरत होती है जिसमें अत्यधिक अम्ल लगता है और बहुत ज़्यादा ज़हरीला व रेडियोएक्टिव कचरा निकलता है। एक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड बनाने से 70–100 टन खतरनाक टेलिंग्स उत्सर्जित हो सकता हैं।
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