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आजीविका का अधिकार

संदर्भ 

  • आजीविका का अधिकार (Right to Livelihood) अत्यंत महत्वपूर्ण मानवाधिकारों में शामिल है क्योंकि यह प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवनयापन हेतु आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है। यदि व्यक्ति के पास आजीविका के साधन न हों, तो उसका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाता है और अन्य मौलिक अधिकार भी व्यवहारिक रूप से अर्थहीन हो जाते हैं। 
  • भारतीय संविधान में ‘आजीविका का अधिकार’ को पृथक रूप से मौलिक अधिकार के रूप में नहीं दर्शाया गया है किंतु इसे भारतीय संविधान के अंतर्गत, विशेषकर अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या के माध्यम से, जीवन के अधिकार का अभिन्न तत्व माना गया है। 

आजीविका के अधिकार का संवैधानिक आधार 

हालाँकि, संविधान में इसे अलग से मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया है परंतु न्यायपालिका ने इसे अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) के दायरे में सम्मिलित किया है। 

अनुच्छेद 21– जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता 

  • यह प्रावधान करता है कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने इस अनुच्छेद की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि गरिमापूर्ण जीवन के लिए आजीविका अनिवार्य है।
  • यह सिद्धांत प्रसिद्ध निर्णय ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (1985) में स्थापित किया गया। 

अनुच्छेद 39(क) – राज्य नीति-निर्देशक तत्व 

राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध हों। इसका उद्देश्य आर्थिक न्याय और समान अवसर को बढ़ावा देना है। 

अनुच्छेद 41 – कार्य का अधिकार 

राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरूप कार्य, शिक्षा एवं सार्वजनिक सहायता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी देता है। यह प्रावधान रोजगार गारंटी कार्यक्रमों का संवैधानिक आधार प्रदान करता है। 

अनुच्छेद 43– जीवनयापन योग्य वेतन 

राज्य को श्रमिकों के लिए उचित वेतन और मानवीय कार्य परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित करता है। इसका उद्देश्य श्रमिकों की गरिमा और आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ करना है। 

अनुच्छेद 14– समानता का अधिकार 

विधि के समक्ष समानता तथा विधि के समान संरक्षण की गारंटी देता है। यह मनमाने ढंग से किसी को उसकी आजीविका से वंचित किए जाने पर रोक लगाता है। 

अनुच्छेद 19(1)(ग) – पेशा, व्यापार या व्यवसाय की स्वतंत्रता 

  • प्रत्येक नागरिक को वैध पेशा, व्यापार या व्यवसाय अपनाने का अधिकार प्रदान करता है।
  • यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के हित में लगाए गए युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन है। 

आजीविका के अधिकार से संबंधित प्रमुख न्यायिक निर्णय 

1. पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स बनाम भारत संघ (1982)

यह प्रकरण एशियाई खेलों से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में श्रमिकों के शोषण से संबंधित था, जहाँ न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा था। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि न्यूनतम मजदूरी का अभाव अनुच्छेद 23 के तहत जबरन श्रम के समान है। न्यायालय ने यह भी कहा कि उचित पारिश्रमिक गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका के लिए आवश्यक है।

2. बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत संघ (1984)

यह मामला अमानवीय परिस्थितियों में कार्यरत बंधुआ मजदूरों की समस्या से संबंधित था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बंधुआ मजदूरी अनुच्छेद 21 और 23 का उल्लंघन है तथा सरकार को ऐसे श्रमिकों की पहचान, मुक्ति एवं पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

3. एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987)

दिल्ली में ओलियम गैस रिसाव की घटना के बाद यह मामला सामने आया, जिससे कई लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने खतरनाक उद्योगों के लिए ‘पूर्ण दायित्व’ (Absolute Liability) का सिद्धांत प्रतिपादित किया और कहा कि प्रभावित व्यक्तियों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। 

4. महाराष्ट्र राज्य बनाम चंद्रभान ताले (1983)

इस प्रकरण में निलंबित कर्मचारियों को अत्यल्प निर्वाह भत्ता दिए जाने को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि अत्यंत कम निर्वाह भत्ता अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है और आजीविका को केवल जीवित रहने के न्यूनतम स्तर तक सीमित नहीं किया जा सकता है। 

आजीविका के अधिकार को सुदृढ़ करने हेतु सरकारी पहलें 

  • भारत सरकार ने रोजगार सृजन और आजीविका सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं, जैसे- 
    • विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025 ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी देता है।
    • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 समाज के कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
    • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत संचालित कौशल विकास कार्यक्रम।
    • स्वरोजगार तथा स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न सरकारी योजनाएँ। 
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