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भारत में दूतावास संचालन के नियम

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: सरकारी नीतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ

गाजियाबाद में एक फर्जी दूतावास का पर्दाफाश हुआ, जहां एक व्यक्ति ने आधिकारिक रूप से अस्तित्वहीन देश ‘वेस्ट आर्कटिका’ के राजदूत के रूप में फर्जी दस्तावेजों एवं नंबर प्लेटों का उपयोग किया। यह घटना भारत में दूतावास संचालन के नियमों एवं उनकी निगरानी की आवश्यकता को उजागर करती है।

भारत में दूतावास संचालन के नियम

  • वैश्विक राजनयिक व्यवस्था में दूतावासों को ‘वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस’ (1961) के तहत संचालित होना चाहिए।
  • भारत में दूतावास स्थापित करने के लिए मेजबान देश (भारत) से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • दूतावास कर्मचारियों को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित होना चाहिए और बिना अनुमति के कोई भी राजनयिक गतिविधि अवैध है।
  • राजनयिक वाहनों को विशेष नंबर प्लेट्स के लिए MEA से अनुमोदन लेना होता है।
  • दूतावास परिसर की मेजबान देश की अनुमति के बिना जांच नहीं की जा सकती है किंतु संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी होती है।
  • भारत के 201 देशों के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध हैं जिनका संचालन विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा नियंत्रित होता है।

MEA नीतियाँ और UN चार्टर

  • MEA भारत में विदेशी मिशनों के लिए दिशानिर्देश जारी करता है, जिसमें वीजा, पासपोर्ट एवं कांसुलर सेवाएँ शामिल हैं।
  • UN चार्टर (अनुच्छेद 2) देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर जोर देता है।
  • MEA विदेशी दूतावासों की गतिविधियों पर नजर रखता है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आंतरिक स्थिरता बनी रहे।
  • गैर-मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा दूतावास जैसी गतिविधियाँ संचालित करना अवैध है और इसे संप्रभुता का उल्लंघन माना जाता है।

इसे भी जानिए!

माइक्रोनेशन : यह एक स्वघोषित राजनीतिक इकाई होती है जो संप्रभुता का दावा करती है किंतु किसी भी स्थापित राष्ट्र या अंतर्राष्ट्रीय निकाय द्वारा राज्य (देश) के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं होती है। मूलतः ये ऐसी इकाइयाँ हैं जो देशों की तरह कार्य करती हैं (अपनी सरकारों, कानूनों, मुद्राओं आदि के साथ) किंतु अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की औपचारिक मान्यता का अभाव होता है। प्राय: जिन क्षेत्रों पर किसी देश का दावा नहीं होता है, वहां व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा ‘माइक्रोनेशन’ की घोषण कर ली जाती है। ‘वेस्ट आर्कटिका’ एक प्रकार ‘माइक्रोनेशन’ ही है। 

फर्जी दूतावासों से संप्रभुता एवं आंतरिक सुरक्षा को खतरे

  • फर्जी दूतावास राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं क्योंकि वे गैर-कानूनी रूप से राजनयिक विशेषाधिकारों का दावा करते हैं।
  • ये धोखाधड़ी, मानव तस्करी एवं अवैध आप्रवासन को बढ़ावा दे सकते हैं, जैसा कि गाजियाबाद मामले में देखा गया।
  • फर्जी दस्तावेज एवं नंबर प्लेट्स का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है।
  • ऐसी गतिविधियाँ आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग एवं जासूसी जैसी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं।

चुनौतियाँ

  • फर्जी दूतावासों की पहचान एवं निगरानी में खुफिया तंत्र और समन्वय की कमी
  • राजनयिक छूट का दुरुपयोग, जैसा कि कुछ मामलों में देखा गया (उदाहरण: 2018 में खशोगी हत्या)
  • स्थानीय एवं केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी
  • तकनीकी प्रगति से फर्जी दस्तावेजों एवं पहचान पत्रों में आसानी 

आगे की राह

  • MEA और गृह मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय एवं खुफिया साझाकरण तंत्र 
  • दूतावासों और उनके कर्मचारियों की नियमित निगरानी एवं सत्यापन
  • फर्जी दस्तावेजों की जांच के लिए उन्नत तकनीक और डाटाबेस का उपयोग
  • राजनयिक विशेषाधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई
  • नागरिक को फर्जी दूतावासों के प्रति सचत करने के लिए जन जागरूकता अभियान 
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