New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 23rd Oct. 2026, 11:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 23rd Oct. 2026, 11:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

सावित्रीबाई फुले जयंती

सावित्रीबाई फुले: जीवनी, योगदान, शिक्षा और सामाजिक सुधार

  • सावित्रीबाई फुले 19वीं सदी की भारत की अग्रणी समाज सुधारक, शिक्षाविद् और कवयित्री थीं। 
  • उन्होंने ऐसे समय में महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा का बीड़ा उठाया, जब समाज में स्त्री शिक्षा को पाप माना जाता था। 
  • अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने न केवल भारत में महिला शिक्षा की नींव रखी, बल्कि जाति, लिंग और सामाजिक असमानता के विरुद्ध एक सशक्त आंदोलन भी खड़ा किया।

संक्षिप्त परिचय

  • जन्म: 3 जनवरी 1831
  • जन्मस्थान: नाइगांव, सतारा जिला, महाराष्ट्र
  • माता–पिता: लक्ष्मीबाई और खंडोजी नेवेशे पाटिल
  • निधन: 10 मार्च 1897 (प्लेग पीड़ित की सेवा करते हुए)
  • पहचान: भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक, कवयित्री

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

  • सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 9 वर्ष की आयु में 13 वर्षीय ज्योतिराव फुले से हुआ। उस समय वे निरक्षर थीं।
  • ज्योतिराव फुले ने स्वयं उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया—यह उस युग में एक क्रांतिकारी कदम था। शिक्षा प्राप्त करने के बाद सावित्रीबाई ने अपने जीवन का उद्देश्य महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों के सशक्तिकरण को बना लिया।

महिला शिक्षा में ऐतिहासिक योगदान

भारत का पहला महिला विद्यालय

  • वर्ष 1848 में पुणे के भिडे वाडा में भारत के पहले महिला विद्यालयों में से एक की स्थापना।
  • भारी सामाजिक विरोध, तिरस्कार और अपमान के बावजूद सावित्रीबाई प्रतिदिन विद्यालय जाती रहीं।
  • 1851 तक तीन विद्यालयों की स्थापना, जिनमें लगभग 150 छात्राएँ पढ़ती थीं।

शिक्षण में समावेशन

  • भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा बेगम शेख को नियुक्त किया।
  • दलितों और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाया।

सरकारी सम्मान

  • 1852 में ब्रिटिश सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका के रूप में सम्मानित।

सामाजिक सुधार में भूमिका

महिला अधिकार और कुरीतियों का विरोध

  • बाल विवाह, सती प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या का विरोध।
  • विधवाओं के पुनर्विवाह और स्वतंत्र जीवन के अधिकार की वकालत।

बालहत्या प्रतिबंधक गृह (1863)

  • अविवाहित और विधवा महिलाओं द्वारा जन्मे बच्चों की हत्या रोकने हेतु आश्रय गृह की स्थापना।

महिला सेवा मंडल

  • विधवाओं के सिर जबरन मुंडवाने जैसी अमानवीय प्रथाओं के विरुद्ध संघर्ष।
  • महिलाओं में आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता।

सत्यशोधक समाज (1873)

सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने मिलकर सत्यशोधक समाज की स्थापना की। इसका उद्देश्य था:

  • जाति आधारित भेदभाव का अंत
  • दलितों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा
  • अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और बाल विवाह उन्मूलन का समर्थन

साहित्यिक योगदान

सावित्रीबाई फुले एक प्रभावशाली कवयित्री भी थीं। उनके साहित्य में शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान की चेतना झलकती है।

प्रमुख कृतियाँ:

  • काव्य फुले (1854)
  • बावन काशी सुबोध रत्नाकर (1892)
  • प्रसिद्ध कविता: “जाओ, शिक्षा प्राप्त करो”

प्रसिद्ध कथन: “शिक्षाहीन स्त्री जड़हीन और पत्तोंहीन बरगद के वृक्ष के समान है।”

विरासत और महत्व

10 मार्च 1897 को प्लेग पीड़ित की सेवा करते हुए उनका निधन हुआ, लेकिन उनका जीवन स्वयं एक संदेश बन गया— शिक्षा ही सामाजिक मुक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है।

आज सावित्रीबाई फुले:

  • महिला शिक्षा की प्रतीक
  • सामाजिक न्याय की प्रेरणा
  • भारतीय नारी आंदोलन की आधारशिला
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR