चर्चा में क्यों ?
भारत में स्वरोजगार करने वाले छोटे व्यापारियों और गैर-पंजीकृत व्यवसायों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनसे होने वाली आय अब भी बेहद कम बनी हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की नवीनतम रिपोर्ट ने देश के छोटे कारोबारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को उजागर किया है।

असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) 2025 रिपोर्ट क्या कहती है ?
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises (ASUSE) 2025 रिपोर्ट जारी की।
- यह रिपोर्ट गैर-कृषि क्षेत्र के छोटे, असंगठित और गैर-पंजीकृत व्यवसायों की आर्थिक स्थिति और कार्यप्रणाली पर आधारित है।
- सर्वेक्षण जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच किया गया।
- देशभर में कुल 6,70,650 प्रतिष्ठानों का सर्वे किया गया।
- इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 2,94,318 प्रतिष्ठान शामिल थे।
- वहीं शहरी क्षेत्रों के 3,76,332 प्रतिष्ठानों को भी सर्वे में शामिल किया गया।
एक साल में 58 लाख नए छोटे कारोबार
- रिपोर्ट के अनुसार भारत में छोटे और असंगठित व्यवसायों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- वर्ष 2025 तक ऐसे कारोबारों की कुल संख्या बढ़कर 7.92 करोड़ (79.2 मिलियन) हो गई, जबकि 2023-24 में यह संख्या 7.34 करोड़ थी।
- इसका अर्थ है कि केवल एक वर्ष में देशभर में लगभग 58 लाख नए छोटे और सूक्ष्म व्यवसाय शुरू हुए।
- यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब संगठित क्षेत्र में रोजगार वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
- रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोग अब छोटी दुकानों, घरेलू इकाइयों, मरम्मत कार्य, स्थानीय सेवाओं, स्वरोजगार और सूक्ष्म व्यवसायों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
75 लाख नए रोजगार पैदा हुए
- रिपोर्ट के अनुसार गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र ने एक वर्ष में लगभग 75 लाख नए रोजगार उत्पन्न किए।
- जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान इस क्षेत्र में लगभग 12.81 करोड़ लोगों को रोजगार मिला।
- इनमें स्वरोजगार करने वाले लोग, वेतनभोगी कर्मचारी, पारिवारिक सहायक तथा अन्य श्रमिक शामिल हैं।
- वर्ष 2023-24 की तुलना में रोजगार में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संख्या 5.61 करोड़ से बढ़कर 6 करोड़ हो गई।
- वहीं शहरी क्षेत्रों में रोजगार 6.45 करोड़ से बढ़कर 6.8 करोड़ तक पहुंच गया।
- इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही।
- जबकि शहरी क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
कमाई बेहद कम, न्यूनतम मजदूरी से भी नीचे
- हालांकि कारोबारों और रोजगार की संख्या में वृद्धि आर्थिक गतिविधि का संकेत मानी जा सकती है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि छोटे व्यवसायों की आय, उत्पादकता और सामाजिक सुरक्षा अब भी बेहद कमजोर बनी हुई है।
- रिपोर्ट के अनुसार प्रति प्रतिष्ठान औसत सकल मूल्य वर्धन (GVA) लगभग ₹2.5 लाख प्रतिवर्ष दर्ज किया गया।
- वहीं प्रति श्रमिक औसत GVA लगभग ₹1.6 लाख प्रतिवर्ष रहा।
- दैनिक आधार पर देखें तो एक व्यवसाय की औसत आय लगभग ₹685 प्रतिदिन बैठती है।
- जबकि प्रति श्रमिक औसत आर्थिक उत्पादन लगभग ₹440 प्रतिदिन है।
- यह राशि श्रमिक की वास्तविक आय नहीं है, बल्कि कुल आर्थिक मूल्य को दर्शाती है।
- इसमें कच्चा माल, किराया, बिजली, परिवहन और अन्य परिचालन खर्च भी शामिल होते हैं।
- इसका अर्थ है कि वास्तविक कमाई इससे भी कम हो सकती है।
न्यूनतम वेतन से भी कम आय
- देश के अधिकांश राज्यों में न्यूनतम मजदूरी ₹15,000 या उससे अधिक निर्धारित है।
- इसके बावजूद रिपोर्ट बताती है कि असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिक और छोटे कारोबारी इससे भी कम आय पर काम करने को मजबूर हैं।
औसत वार्षिक वेतन
- विनिर्माण क्षेत्र में औसत वार्षिक वेतन लगभग ₹1.40 लाख दर्ज किया गया।
- व्यापार क्षेत्र में यह औसतन ₹1.44 लाख रहा।
- वहीं अन्य सेवा क्षेत्रों में औसत वार्षिक आय लगभग ₹1.51 लाख रही।
- मासिक आधार पर यह आय लगभग ₹12,000 से ₹13,000 प्रति माह बैठती है।
- बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए यह आय बेहद सीमित और अपर्याप्त मानी जा रही है।
कर्ज के जाल में फंसे छोटे व्यवसाय
- रिपोर्ट के अनुसार छोटे व्यवसायों के लिए ऋण प्राप्त करना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
- गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र में प्रति प्रतिष्ठान औसत बकाया कर्ज लगभग ₹42,776 दर्ज किया गया।
- हालांकि लगभग 80 प्रतिशत ऋण बैंकों और अन्य संस्थागत स्रोतों से प्राप्त हुए, लेकिन ऋण की औसत राशि काफी कम रही।
- सीमित पूंजी और पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिलने के कारण छोटे व्यवसाय कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
- अधिकांश छोटे कारोबारी नई मशीनरी खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
- वे आधुनिक तकनीक में निवेश भी नहीं कर पा रहे हैं।
- साथ ही कारोबार का विस्तार करना भी उनके लिए कठिन बना हुआ है।
- यही कारण है कि असंगठित क्षेत्र के अधिकांश छोटे व्यवसाय कम आय और धीमी आर्थिक वृद्धि के दायरे में फंसे हुए हैं।
क्या संकेत देती है यह रिपोर्ट ?
- ASUSE 2025 रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत में उद्यमिता और स्वरोजगार तेजी से बढ़ रहे हैं।
- बड़ी संख्या में लोग छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्र के माध्यम से आजीविका कमा रहे हैं।
- हालांकि, इन छोटे कारोबारों की आर्थिक स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है।
- रिपोर्ट बताती है कि कम आय, सीमित पूंजी, कमजोर सामाजिक सुरक्षा और कम उत्पादकता इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे व्यवसायों को बेहतर नीतिगत और वित्तीय सहायता मिले, तो यह क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है ?
- सस्ती और आसान ऋण सुविधा
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
- तकनीकी सहायता और डिजिटलीकरण
- कौशल विकास एवं प्रशिक्षण
- बाजार तक बेहतर पहुंच
- विशेषज्ञों के अनुसार इन सुविधाओं को मजबूत करने से छोटे व्यवसायों की आय बढ़ सकती है और रोजगार सृजन को भी नई गति मिल सकती है।
निष्कर्ष
ASUSE 2025 रिपोर्ट यह दिखाती है कि भारत में असंगठित और छोटे व्यवसाय रोजगार सृजन का बड़ा आधार बन चुके हैं। लाखों लोग स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं, जिससे उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।
हालांकि, इन व्यवसायों की कम आय, सीमित पूंजी, कम उत्पादकता और कमजोर सामाजिक सुरक्षा यह संकेत देती है कि केवल व्यवसायों की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। यदि सरकार वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी समर्थन और बाजार तक पहुंच को मजबूत करती है, तो यही क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार बन सकता है।