शी-मार्ट्स: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना
चर्चा में क्यों ?
Ministry of Rural Development (ग्रामीण विकास मंत्रालय) ने SHE-MARTs (Self Help Entrepreneurs–Marketing Avenues for Rural Transformation) के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण विपणन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु एक राष्ट्रव्यापी रोडमैप शुरू किया है, जिसका उद्देश्य महिला उद्यमों को सशक्त बनाना, ग्रामीण आय में वृद्धि करना तथा देशभर के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए बाजार तक पहुँच का विस्तार करना है।
इस रोडमैप पर चर्चा 14–15 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम में की गई, जिसका आयोजन Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihoods Mission के अंतर्गत किया गया।
SHE-MART क्या है ?
SHE-MART (Self Help Entrepreneurs–Marketing Avenues for Rural Transformation) की घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी।
इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के क्लस्टर स्तरीय संघों (Cluster Level Federations-CLFs) के अंतर्गत सामुदायिक स्वामित्व वाले खुदरा केंद्रों एवं विपणन मंचों की स्थापना कर महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना है।
यह पहल महिला-नेतृत्व वाले उत्पादक समूहों के उत्पादों के लिए ब्रांडिंग, संग्रहण (Aggregation), विपणन, पैकेजिंग, खुदरा बिक्री तथा बाजार तक पहुँच को मजबूत करने का कार्य करेगी।
SHE-MARTs को विकेंद्रीकृत, पेशेवर रूप से प्रबंधित, सामुदायिक स्वामित्व वाले तथा महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाएगा, न कि सब्सिडी आधारित खुदरा संस्थानों के रूप में।
SHE-MART पहल के उद्देश्य
SHE-MART का उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सुदृढ़ करना तथा ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए स्थायी बाजार अवसरों का निर्माण करना है।
यह पहल SHG उत्पादों के लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन, संग्रहण तथा विपणन तंत्र को मजबूत कर बाजार तक पहुँच का विस्तार करने का प्रयास करती है।
SHE-MART का लक्ष्य महिला उत्पादक समूहों एवं सामुदायिक संस्थाओं के लिए स्थायी आय एवं उद्यम अवसर उत्पन्न कर ग्रामीण आय में वृद्धि करना है।
यह पहल DAY-NRLM को केवल आजीविका संवर्धन कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर उद्यम-आधारित ग्रामीण बाजार प्रणाली की ओर परिवर्तित करने का प्रयास करती है।
यह पहल सरकार के 2029 तक तीन करोड़ अतिरिक्त “लखपति दीदी” बनाने के लक्ष्य को भी समर्थन प्रदान करेगी।
SHE-MART राष्ट्रीय परामर्श : प्रमुख चर्चाएँ
राष्ट्रीय परामर्श में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (SRLMs), National Bank for Agriculture and Rural Development, वित्तीय संस्थानों, विकास विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा अन्य भागीदार संस्थाओं ने भाग लिया।
परामर्श के दौरान SHE-MARTs के क्रियान्वयन हेतु संस्थागत ढाँचे, वित्तीय मॉडल, शासन व्यवस्था, व्यावसायिक प्रक्रियाएँ, प्रौद्योगिकी एकीकरण, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन रणनीतियों पर चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने प्रारूप संचालन ढाँचे की समीक्षा करते हुए उसमें आवश्यक सुधार, सुझाव तथा क्रियान्वयन सुरक्षा उपायों पर विचार प्रस्तुत किए।
परामर्श के दूसरे दिन मानव संसाधन संरचना, महिला नेतृत्व, तकनीकी डिजाइन, कार्यान्वयन रणनीति तथा क्षमता निर्माण व्यवस्था पर विशेष चर्चा की गई।
परामर्श के दौरान व्यापक सहमति बनी कि SHE-MARTs को विकेंद्रीकृत, पेशेवर रूप से संचालित तथा सामुदायिक स्वामित्व वाले उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि सब्सिडी आधारित खुदरा दुकानों के रूप में।
महिला सशक्तिकरण में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका
वित्तीय समावेशन
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं तथा उन्हें संस्थागत ऋण, बीमा सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ते हैं।
SHGs ने ग्रामीण महिलाओं की औपचारिक वित्तीय प्रणाली में भागीदारी बढ़ाने तथा साहूकारों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उदाहरण :बैंक सखी कार्यक्रम के अंतर्गत SHG से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग संवाददाता के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है।
उद्यमिता विकास
स्वयं सहायता समूह कौशल विकास, बाजार संपर्क, उत्पादन नेटवर्क तथा उद्यम सहायता तंत्र के माध्यम से महिला उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं।
SHGs महिलाओं को सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के अवसर प्रदान करते हैं।
उदाहरण : Mahila Arthik Vikas Mahamandal महिलाओं को उद्यमिता कौशल एवं आजीविका अवसर प्रदान करता है।
राजनीतिक सशक्तिकरण
स्वयं सहायता समूह महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को बढ़ाते हैं तथा निर्णय निर्माण, स्थानीय शासन और राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
SHGs महिलाओं में आत्मविश्वास का विकास कर उन्हें सामुदायिक नेतृत्व के लिए तैयार करते हैं।
उदाहरण : Self Employed Women's Association असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करती है तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।
गरीबी उन्मूलन एवं ग्रामीण विकास
स्वयं सहायता समूह आय के अवसरों का निर्माण कर आजीविका सुरक्षा को मजबूत करते हैं तथा साहूकारों पर निर्भरता कम करते हैं।
SHGs ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास तथा गरीबी उन्मूलन को बढ़ावा देते हैं।
उदाहरण : Kudumbashree महिला-नेतृत्व वाले गरीबी उन्मूलन एवं स्थानीय शासन का सफल मॉडल है।
सामाजिक सुधार एवं लैंगिक समानता
स्वयं सहायता समूह बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशाखोरी तथा लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देते हैं।
SHGs सामाजिक सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामुदायिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभरे हैं।
महिला SHGs के लिए प्रमुख सरकारी पहलें
दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
यह एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है जिसने 10.05 करोड़ से अधिक महिलाओं को लगभग 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया है।
यह कार्यक्रम वित्तीय समावेशन, संस्थागत विकास तथा ग्रामीण महिलाओं की आजीविका वृद्धि पर केंद्रित है।
लखपति दीदी पहल
यह पहल DAY-NRLM के अंतर्गत संचालित होती है और इसका उद्देश्य SHG से जुड़ी महिलाओं की न्यूनतम वार्षिक आय ₹1 लाख सुनिश्चित करना है।
यह कार्यक्रम उद्यमिता विकास, कौशल निर्माण, मूल्य संवर्धन तथा बाजार संपर्क को बढ़ावा देता है।
स्वयं सहायता समूह – बैंक लिंकेज कार्यक्रम (SHG-BLP)
यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने का कार्य करता है।
SARAS मेला
SARAS मेला SHG उत्पादों को प्रदर्शनी, विपणन, ब्रांडिंग तथा प्रत्यक्ष बाजार संपर्क का मंच उपलब्ध कराता है।
यह महिला उद्यमियों को व्यापक उपभोक्ता बाजारों तक पहुँचने में सहायता प्रदान करता है।
SHE-MARTs के समक्ष चुनौतियाँ
SHE-MARTs के सफल संचालन के लिए पेशेवर खुदरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के साथ-साथ सामुदायिक स्वामित्व और महिला-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक होगा।
इस पहल के लिए मजबूत क्षमता निर्माण, तकनीकी एकीकरण, सतत वित्तीय व्यवस्था तथा प्रभावी बाजार संपर्क प्रणाली की आवश्यकता होगी।
दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग, संग्रहण तथा मूल्य संवर्धन प्रणालियों को भी मजबूत करना होगा।