हाल ही में भारत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में स्वीकार करते हुए रामसर कन्वेंशन के तहत रामसर साइट का दर्जा दिया गया है।
इस घोषणा के साथ ही भारत में रामसर साइट्स की कुल संख्या बढ़कर 99 हो गई है, जबकि उत्तर प्रदेश में अब ऐसी संरक्षित आर्द्रभूमियों की संख्या 12 तक पहुँच गई है।
शेखा झील पक्षी अभयारण्य के बारे में
शेखा झील एक आंशिक रूप से मानव-निर्मित वेटलैंड परिसर है।
इसका विकास 1850 के दशक में अपर गंगा नहर के निर्माण के दौरान हुआ था। झील के साथ लगा हुआ पतझड़ी वन इसकी जैव विविधता को और समृद्ध बनाता है।
शेखा झील सेंट्रल एशियन फ्लायवे (पक्षी प्रवास मार्ग) पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण ठहराव स्थल (Stopover point) है। सर्दियों के मौसम में यहाँ बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रजातियों की बत्तखों का जमावड़ा रहता है।
जैव विविधता का अनूठा केंद्र
यह अभयारण्य केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि यह स्थल कई दुर्लभ जलीय जीवों का भी घर है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा इसे महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव-विविधता क्षेत्र (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहाँ कछुओं की तीन संकटग्रस्त प्रजातियाँ पाई जाती हैं:
ब्लैक पोंड टर्टल
इंडियन फ्लैप-शेल्ड टर्टल
गंगा सॉफ्ट-शेल्ड टर्टल
उत्तर प्रदेश के रामसर साइट
ऊपरी गंगा नदी (ब्रजघाट से नरोरा) : गंगा नदी का वह हिस्सा जहाँ लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन पाई जाती है।
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव) : इसे चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है।
पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य (गोंडा) :यहाँ दो गहरी झीलें (पार्वती और अरगा) शामिल हैं।
समन पक्षी अभयारण्य (मैनपुरी) : यह सारस क्रेन (Sarus Crane) के लिए प्रसिद्ध है।
समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली) : यहाँ पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।
सांडी पक्षी अभयारण्य (हरदोई) :प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र।
सरसई नावर झील (इटावा) :यहाँ सारस क्रेन की बड़ी आबादी निवास करती है।
सूर सरोवर (कीठम झील) (आगरा) : यह एक मानव निर्मित जलाशय है, जो भालुओं के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है।
हैदरपुर वेटलैंड (बिजनौर/मुजफ्फरनगर) :गंगा और सोलानी नदी के बीच बना एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र।
बखिरा वन्यजीव अभयारण्य (संतकबीर नगर) :पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक विशाल प्राकृतिक वेटलैंड।
पटना पक्षी अभयारण्य (एटा) :यह उत्तर प्रदेश में सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है।
शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़) : नवीनतम साइट (99वीं भारतीय साइट) सेंट्रल एशियन फ्लायवे का हिस्सा।
वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति
वर्ष 1971 में हस्ताक्षरित रामसर कन्वेंशन के तहत वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 2,594 आर्द्रभूमियाँ नामित हैं।
एशिया में भारत अब सबसे अधिक रामसर साइट्स वाला देश बन गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह तीसरे स्थान पर है।
इस सूची में यूनाइटेड किंगडम (176) प्रथम और मेक्सिको (144) द्वितीय स्थान पर काबिज हैं।
संरक्षण की दिशा में बढ़ते कदम
पिछले एक दशक में भारत ने अपनी आर्द्रभूमियों के संरक्षण में अभूतपूर्व तेजी दिखाई है। 11 वर्ष पहले देश में मात्र 26 रामसर साइट्स थीं, जो अब बढ़कर 99 हो गई हैं। विशेष रूप से पिछले चार वर्षों में ही 57 नई साइट्स को इस सूची में जोड़ा गया है।
वेटलैंड्स क्यों महत्वपूर्ण हैं ?
वेटलैंड्स या आर्द्रभूमियाँ धरती के वे क्षेत्र हैं जो स्थायी या मौसमी रूप से जलमग्न रहते हैं। इन्हें पृथ्वी के गुर्दे भी कहा जाता है क्योंकि ये जल को शुद्ध करते हैं, बाढ़ को नियंत्रित करते हैं और भोजन, फाइबर व कच्चे माल जैसे संसाधनों का मुख्य स्रोत हैं।
ईरान के रामसर शहर में 1971 में अपनाया गया यह कन्वेंशन आज भारत सहित 172 देशों को अपने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। शेखा झील को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल अलीगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।