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स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक

संदर्भ 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR) ने खेती को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए एक अभूतपूर्व स्मार्ट सीड कोटिंग तकनीक (Smart Seed Coating Technology) तैयार की है। यह तकनीक आने वाले समय में फसलों के शुरुआती विकास और उत्पादकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।   

क्या है यह स्मार्ट कोटिंग तकनीक ?

  • यह जैव-बहुलक (Biopolymer) पर आधारित एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है। 
  • इसके तहत बीजों के ऊपर प्राकृतिक रूप से जैवनिम्नीकरण (Biodegradable) पदार्थों की एक बहु-कार्यात्मक परत (Multifunctional Layer) चढ़ाई जाती है, जो बीज को मिट्टी में बोने के बाद कवच की तरह काम करती है।   

तकनीक की विशेषताएं:

यह कोटिंग केवल बीजों को सुरक्षा ही नहीं देती, बल्कि उनके विकास के लिए एक संपूर्ण इकोसिस्टम तैयार करती है:

  • डायरेक्ट डिलीवरी प्लेटफॉर्म: यह कोटिंग बीज और मिट्टी के संपर्क बिंदु (Seed-Soil Interface) पर एक डिलीवरी सिस्टम की तरह काम करती है। इसके माध्यम से पौधे के लिए जरूरी सूक्ष्मजीव (Microorganisms), जरूरी पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) और फसल सुरक्षा एजेंट सीधे बीज तक पहुँचते हैं, जिससे अंकुरण की दर बेहतर होती है। 
  • अनुकूल सूक्ष्म-पर्यावरण (Microenvironment): यह कोटिंग बीज के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा चक्र बनाती है जो उसे तेजी से अंकुरित होने, जड़ों को मजबूती से फैलाने और पौधे की शुरुआती बढ़त को तेज करने में मदद करता है।  
  • तनाव से सुरक्षा: फसल के शुरुआती बेहद नाजुक दौर में यह तकनीक उसे जैविक (कीट-बीमारी) और अजैविक (सूखा, गर्मी) दोनों तरह के तनावों को झेलने की शक्ति देती है। 
  • मल्टी-क्रॉप उपयोग: इस तकनीक का दायित्व बेहद व्यापक है। इसे अनाज, मोटे अनाज (Millets), दालों, सब्जियों और बागवानी फसलों सहित लगभग हर तरह के बीजों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज किया जा सकता है।   

भारतीय खेती के लिए महत्व

  • भारत का एक बहुत बड़ा कृषि क्षेत्र आज भी सिंचाई के लिए पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसम की अनिश्चितता सबसे बड़ी चुनौती है। 
  • यह तकनीक विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती के लिए डिजाइन की गई है, जहाँ पानी की कमी या देरी होने पर भी बीज खुद को सुरक्षित रख कर बेहतर ढंग से अंकुरित हो सकेंगे। 
  • यह अनूठा नवाचार देश की टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture), जलवायु अनुकूलता (Climate Resilience) और देश की बीज प्रणालियों को मजबूत करने की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को गति देने में बेहद मददगार साबित होगा।  
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