भारत राज्य वित्त 2024-25: CAG की रिपोर्ट – बढ़ती सब्सिडी और कर्ज

चर्चा में क्यों?

  • CAG की रिपोर्ट को इस वजह से खास है क्योंकि 2024-25 में राज्यों पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ा है।
  • राज्यों का सब्सिडी खर्च बढ़कर ₹4.37 लाख करोड़ हो गया है, जो लगातार बढ़ते कल्याणकारी खर्च को दर्शाता है। यह राज्यों के बजट में आवर्ती सब्सिडी पर बढ़ती निर्भरता को दिखाता है।
  • ऊर्जा सब्सिडी कुल सब्सिडी का 43.4% (₹1.9 लाख करोड़) रही, जो राज्य कल्याण खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु 

1. बढ़ता सब्सिडी बोझ

सब्सिडी अब कुल राज्य व्यय का लगभग 9% हिस्सा बन गई है, जो राज्य बजट में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। राजस्व व्यय में इसका हिस्सा बढ़कर 10.2% हो गया है, जिससे राज्यों पर नियमित वित्तीय दायित्व बढ़ रहे हैं। यह वृद्धि कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार को दिखाती है, लेकिन विकास कार्यों के लिए वित्तीय लचीलापन कम करती है।

2. ऊर्जा क्षेत्र का प्रभाव 

ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ा सब्सिडी प्राप्तकर्ता है, जो कुल सब्सिडी का 43.4% (लगभग ₹1.9 लाख करोड़) है।
यह मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को सस्ती बिजली देने तथा बिजली वितरण कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए दिया जाता है।

कृषि क्षेत्र दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसे ₹1.30 लाख करोड़ की सब्सिडी मिलती है, जिसमें सिंचाई, उर्वरक और कृषि इनपुट शामिल हैं।

3. राज्यवार वित्तीय दबाव 

कुछ राज्यों में सब्सिडी पर निर्भरता अधिक है, जिससे अलग-अलग राज्यों में वित्तीय तनाव असमान रूप से बढ़ रहा है। कर्नाटक का सब्सिडी बोझ सबसे अधिक 14.01% है। राजस्थान ऊर्जा सब्सिडी में सबसे आगे है (₹32,572 करोड़)। मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य भी उच्च सब्सिडी व्यय वाले राज्यों में शामिल हैं।

4. बढ़ता कर्ज स्तर 

राज्यों का कुल कर्ज 2015-16 में ₹23.92 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹75.52 लाख करोड़ हो गया है।
यह पिछले 10 वर्षों में 216% की वृद्धि है, जिसका मुख्य कारण राजस्व व्यय के लिए उधारी लेना है।
कई राज्यों में कर्ज अब उनकी राजस्व प्राप्तियों के 186% से अधिक हो गया है, जो दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर चिंता बढ़ाता है।

5. उच्च बाध्यकारी व्यय 

राज्य बजट का बड़ा हिस्सा निश्चित खर्चों में लॉक हो गया है जैसे वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान।

  • वेतन : ₹7.71 लाख करोड़
  • पेंशन : ₹5.12 लाख करोड़
  • ब्याज भुगतान : ₹5.7 लाख करोड़

ये अनिवार्य खर्च नए विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों को कम कर देते हैं।

6. विकास के लिए सीमित स्थान

राजस्व व्यय अब कुल खर्च का 83% से अधिक है, जिससे पूंजीगत निवेश के लिए बहुत कम जगह बचती है। इसके कारण बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में निवेश अपेक्षाकृत धीमा है।

  • ऋण पर ब्याज भुगतान ₹5.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो कुल सब्सिडी खर्च से अधिक है।
  • कुल राज्य ऋण ₹75.52 लाख करोड़ हो गया है।
  • पिछले एक दशक में सब्सिडी खर्च में 214% से अधिक वृद्धि हुई है।

यह स्थिति कल्याण और दीर्घकालिक विकास के बीच संरचनात्मक असंतुलन को दर्शाती है।

CAG द्वारा उठाई गई चिंताएँ 

  • बढ़ते अनिवार्य व्यय के कारण नए विकास कार्यों के लिए वित्तीय स्थान कम होना।
  • परिसंपत्ति निर्माण के बजाय रोजमर्रा के खर्च के लिए उधारी पर बढ़ती निर्भरता।
  • बढ़ता सब्सिडी बोझ वित्तीय अनुशासन और बजट लचीलापन को कमजोर कर रहा है।
  • पूंजीगत व्यय की धीमी वृद्धि, जिससे दीर्घकालिक विकास प्रभावित हो रहा है।
  • वर्तमान प्रवृत्ति जारी रहने पर वित्तीय अस्थिरता का जोखिम।

आगे की राह 

  • सब्सिडी योजनाओं की नियमित समीक्षा और तर्कसंगतीकरण ।
  • लक्षित लाभ वितरण सुनिश्चित करना ताकि लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
  • राजस्व बढ़ाने पर ध्यान, ताकि उधारी पर निर्भरता कम हो।
  • राजस्व व्यय से पूंजीगत निवेश की ओर शिफ्ट, जिससे दीर्घकालिक विकास हो।
  • बजट प्रबंधन सुधारकर वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना।
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