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स्टोलेन डंकी, स्टोलेन फ्यूचर: डंकी सैंक्चुअरी रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: बायो-टैक्नोलॉजी, संरक्षण)

संदर्भ

यूनाइटेड किंगडम आधारित एक एन.जी.ओ. ‘डंकी सैंक्चुअरी’ की जून 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘Stolen Donkeys, Stolen Future’ के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख गधों को ‘एजियाओ (Ejiao)’ दवा के उत्पादन के लिए मारा जा रहा है। 

एजियाओ (Ejiao) के बारे में

परिचय 

  • यह एक पारंपरिक चीनी दवा है जो गधों की खाल से निकाले गए जिलेटिन से बनाई जाती है। यह हजारों वर्षों से चीनी चिकित्सा में उपयोग की जाती रही है।
  • इसे बनाने के लिए गधों की खाल को उबाला जाता है और फिर इसे जड़ी-बूटियों एवं अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर पेस्ट, गोलियाँ या तरल रूप में तैयार किया जाता है। 

वर्तमान उपयोग

  • दवाएँ : रक्त संचार, एनीमिया और अनिद्रा जैसी समस्याओं के उपचार के लिए
  • सौंदर्य उत्पाद : त्वचा को जवां एवं स्वस्थ रखने के लिए विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय
  • खाद्य उत्पाद : स्नैक्स (जैसे- तिल के लड्डू या एनर्जी बार्स) में एजियाओ को मिलाना

व्यापार

  • बाजार का आकार : वर्ष 2013 में एजियाओ बाजार का मूल्य 3.2 बिलियन डॉलर था जो वर्ष 2023 तक 58 बिलियन युआन (8 बिलियन डॉलर) तक पहुँच गया।
  • आयात : चीन में घरेलू गधों की संख्या इस मांग को पूरा करने में असमर्थ होने के कारण वह अफ्रीका (51%), दक्षिण अमेरिका एवं एशिया से गधे की खाल आयात करता है।
  • अवैध व्यापार : कई देशों में प्रतिबंध के बावजूद चोरी एवं अवैध वध के माध्यम से खालों की आपूर्ति जारी है।

हालिया रिपोर्ट के बारे में

  • ‘Stolen Donkeys, Stolen Future’ नामक रिपोर्ट डंकी सैंक्चुअरी संस्था द्वारा तैयार की गई है, जो गधों के कल्याण एवं उनके संरक्षण के लिए काम करती है। 
  • यह रिपोर्ट गधों की चोरी, अवैध व्यापार एवं एजियाओ के उत्पादन के लिए उनके अविवेकपूर्ण वध पर केंद्रित है। 
  • यह चीन में एजियाओ (Ejiao) की मांग और इसके वैश्विक प्रभावों को उजागर करती है। यह विशेष रूप से आजीविका के लिए गधों पर निर्भर अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका के समुदायों पर प्रभाव को प्रदर्शित करती है।
  • रिपोर्ट का डाटा संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और चीन के सामान्य सीमा शुल्क प्रशासन (GACC) जैसे स्रोतों से लिया गया है। 

रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • चीन में गधों की संख्या में कमी : वर्ष 1990 में चीन में गधों की संख्या 1.1 करोड़ थी, जो वर्ष 2023 तक घटकर 15 लाख रह गई, अर्थात 87% की कमी आई है। यह कमी एजियाओ की मांग में वृद्धि के कारण हुई है।
  • वैश्विक व्यापार : मांग को पूरा करने के लिए चीन ने अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से गधों की खाल आयात करना शुरू किया। वर्ष 2015-2025 के बीच 51% खालें अफ्रीका से, उसके बाद दक्षिण अमेरिका और एशिया से आयात की गईं।
  • उत्पादन में वृद्धि : वर्ष 2013 में एजियाओ का उत्पादन 3200 टन था, जो वर्ष 2021 तक 390% बढ़कर 15,700 टन हो गया। इसके लिए 60 लाख गधों की खाल की आवश्यकता थी। वर्ष 2027 तक इसके 18,000 टन होने का अनुमान है, जिसके लिए 68 लाख खालें चाहिए होंगी।
  • अमानवीय व्यवहार : गधों को अमानवीय परिस्थितियों में लंबी दूरी तक ले जाया जाता है और अवैध बूचड़खानों में क्रूरता से मारा जाता है, जिससे ज़ूनोटिक रोगों का खतरा बढ़ता है।
  • सामुदायिक प्रभाव : अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका के समुदायों में गधे परिवहन व घरेलू जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनकी चोरी और वध ने गरीब परिवारों की आजीविका को नुकसान पहुँचाया है।
  • अवैध व्यापार : वर्ष 2024 में अफ्रीकी संघ द्वारा गधों के निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध व्यापार में वृद्धि हुई है, जिसमें 25-35% खाल चोरी किए गए गधों से प्राप्त होती हैं।

चुनौतियाँ

  • गधों की घटती आबादी : अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में गधों की संख्या में भारी कमी आई है, जैसे- 1996 से 2019 तक मिस्र में 68% और दक्षिण अफ्रीका में 30% की कमी।
  • सामुदायिक प्रभाव : गधों की चोरी से गरीब समुदायों, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों की आजीविका प्रभावित हुई है। घाना में लड़कियों को स्कूल छोड़कर गधों का काम करना पड़ रहा है।
  • अवैध व्यापार : वर्ष 2024 में अफ्रीकी संघ के प्रतिबंध के बावजूद अवैध व्यापार और चोरी बढ़ रही है।
  • पशु कल्याण : गधों के साथ क्रूर व्यवहार और अस्वच्छ परिस्थितियों में वध से ज़ूनोटिक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
  • नैतिक व पर्यावरणीय चिंताएँ : व्यापार से जैव-विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो रहा है।

आगे की राह

  • नियामक मानक : चीन को एजियाओ उद्योग में अवैध खालों के उपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने चाहिए।
  • वैकल्पिक समाधान : वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से लैब में निर्मित खाल या अन्य विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग : अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर अवैध व्यापार को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • जागरूकता अभियान : उपभोक्ताओं को एजियाओ के प्रभावों और इसके वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
  • स्थानीय समुदायों का समर्थन : गधों पर निर्भर समुदायों को वैकल्पिक आजीविका और संरक्षण योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।
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