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Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर अनुमान रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा : रिपोर्ट एवं सूचकांक)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय) 

संदर्भ

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘बाल मृत्यु दर के स्तर और रुझान’ पर रिपोर्ट जारी की गई।

रिपोर्ट के बारे में

  • शीर्षक : ‘बाल मृत्यु दर के स्तर और रुझान’ (Levels and Trends in Child Mortality)
  • जारीकर्ता : संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु दर आकलन हेतु अंतर-एजेंसी समूह द्वारा (United Nations Inter-Agency Group for Child Mortality Estimation : UN IGME)
  • शामिल भागीदार : यह रिपोर्ट यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग द्वारा एक संयुक्त सहयोगात्मक प्रयास है। 
  • शामिल देश : इस रिपोर्ट में 195 देशों को शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष 

  • वर्ष 2000 के बाद से, वैश्विक स्तर पर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 52% की गिरावट आई है।
    • बाल मृत्यु दर में यह कमी राष्ट्रीय सरकारों, दाताओं, चिकित्सा पेशेवरों, परिवारों और व्यक्तियों द्वारा की गई कार्रवाई का प्रत्यक्ष परिणाम है।
  • वैश्विक स्तर पर और उप-सहारा अफ्रीका सहित कुछ क्षेत्रों में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की प्रगति सतत विकास लक्ष्य (SDG) (2015-2023) में सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (MDG) (2000-2015) की तुलना में धीमी हो गई है और दोनों अवधियों के बीच वार्षिक कमी दर में 42% की गिरावट आई है।
    • अनुमान है कि वर्ष 2030 तक 30 मिलियन बच्चों की मृत्यु उनके पांचवें जन्मदिन से पहले ही हो जाएगी।
  • वर्तमान में विश्व को चुनौतियों के बढ़ते समूह का सामना करना पड़ रहा है जो बच्चों के जीवित रहने के अधिकार को खतरे में डालते हैं, जिससे नए सिरे से प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, जीवन यापन की लागत, आर्थिक अस्थिरता, संस्थागत नाजुकता और बिगड़ते मानवीय संकट लाखों बच्चों को उच्च जोखिम में डाल रहे हैं।
  • रिपोर्ट के निष्कर्ष में बाल मृत्यु के प्रति कार्रवाई एवं निवेश में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

भारत की स्थिति 

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मृत्यु दर और मृत जन्म दर में कमी लाने वाले शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 से 2023 के बीच भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 70% तथा नवजात शिशु मृत्यु दर में 61% की गिरावट आई है।
  • भारत 60-70% की सीमा में मृत जन्म दर में सर्वाधिक कमी लाने वाले शीर्ष 10 देशों में सातवें स्थान पर है।
  • वर्ष 2000-2023 के बीच जहाँ वैश्विक स्तर पर मृत जन्म दर में 37% प्रतिशत की कमी आई है वहीं भारत में 60.4%  कमी दर्ज की गई जो कि भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।
  • रिपोर्ट में भारत द्वारा अपनाई गई विविध रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में तेजी आई है।
  • भारत द्वारा यह उपलब्धि सरकारों द्वारा स्वास्थ्य कवरेज बढ़ाने, उपलब्ध हस्तक्षेपों के बेहतर क्रियान्वयन तथा स्वास्थ्य अवसंरचना और मानव संसाधनों को विकसित करने के लिए किए गए उपायों के परिणामस्वरूप प्राप्त हुई है।
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