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अमेरिका द्वारा भारत को मिसाइल बिक्री को मंज़ूरी

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)

संदर्भ

  • भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में व्यापारिक तनाव कम हुए हैं। इसी सकारात्मक माहौल में अमेरिका ने भारत को ‘जैवलिन मिसाइल’ एवं ‘एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल’ की बिक्री को मंज़ूरी प्रदान की है।
  • अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने भारत को लगभग 92.8 मिलियन डॉलर की रक्षा बिक्री को अनुमोदित किया है। डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस को आवश्यक सूचना भी भेज दी है।

मुख्य बिंदु

एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल

  • भारत ने 216 M982A1 Excalibur टैक्टिकल प्रोजेक्टाइल खरीदने का अनुरोध किया था।
  • ये प्रोजेक्टाइल प्रेसिजन स्ट्राइक क्षमता बढ़ाते हैं। एक्सकैलिबर सौदे की कुल कीमत: 47.1 मिलियन डॉलर है।
  • इसके साथ में मिलने वाले उपकरण हैं-
    • पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक फायर कंट्रोल सिस्टम
    • इम्प्रूवड प्लेटफार्म इंटीग्रेशन किट्स
    • तकनीकी सहायता व लॉजिस्टिक समर्थन 

जैवलिन मिसाइल सिस्टम

  • भारत 100 FGM-148 जैवलिन राउंड, 1 जैवलिन मिसाइल, 25 कमांड लांच यूनिट (CLU) खरीदेगा।
  • जैवलिन सौदे की कुल कीमत 45.7 मिलियन डॉलर है। यह सौदा भारत की होमलैंड डिफेन्स और क्षेत्रीय खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाएगी।

रक्षा सहयोग को बढ़ावा

DSCA ने कहा कि यह बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के अनुरूप है तथा ‘मुख्य रक्षा भागीदार’ के रूप में भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगी।

महत्व

  • भारत की सैन्य क्षमता में वृद्धि : एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल भारत को सटीक मारक क्षमता (Precision Strike) प्रदान करेंगे। जैवलिन मिसाइल सिस्टम भारत की एंटी-टैंक युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा।
  • हिंद-प्रशांत में रणनीतिक स्थिरता : यह सौदा क्षेत्रीय खतरों के बीच भारत की स्थिति को अतिरिक्त रूप से मजबूत करेगा। अमेरिका एवं भारत के बढ़ते सैन्य सहयोग से चीन-पाकिस्तान के संदर्भ में शक्ति संतुलन प्रभावित होगा।
  • व्यापारिक तनाव में कमी का संकेत : अमेरिका ने बिक्री की मंज़ूरी ऐसे समय में दी है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो रहे हैं। इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच अमेरिकन LPG आयात के लिए दीर्घकालिक समझौता हुआ था।
  • द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) में प्रगति : व्यापार विवादों के बाद भी BTA वार्ता फिर से ट्रैक पर आ गई है। रक्षा सहयोग इस समग्र रिश्ते को और स्थिर बनाता है।
  • सामरिक निर्भरता में विस्तार : भारत की सेनाओं को आधुनिक उपकरण और प्रौद्योगिकी मिल रही है। तकनीकी सहायता व प्रशिक्षण लंबी अवधि में क्षमता निर्माण करेंगे।
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