- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence–AI) के क्षेत्र में हाल के वर्षों में बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models–LLMs) जैसे GPT-5, Claude, Gemini आदि ने अभूतपूर्व प्रगति की है।
- ये मॉडल मानव भाषा को समझने, विश्लेषण करने और उत्तर उत्पन्न करने में सक्षम हैं। इन मॉडलों की कार्यक्षमता को समझने के लिए Context Window (संदर्भ विंडो) की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही किसी AI मॉडल की “स्मृति सीमा” को निर्धारित करती है।

कॉन्टेक्स्ट विंडो की परिभाषा
- एआई में कॉन्टेक्स्ट विंडो उस अधिकतम मात्रा के पाठ (Text) को कहा जाता है, जिसे कोई एआई मॉडल एक समय में प्रतिक्रिया उत्पन्न करते समय विचार कर सकता है।
- दूसरे शब्दों में, यह वह सीमा है जिसके भीतर मॉडल इनपुट को “याद” रखकर उसका विश्लेषण करता है और आउटपुट तैयार करता है।
कॉन्टेक्स्ट विंडो और टोकन की भूमिका
- एआई मॉडल शब्दों को सीधे नहीं पढ़ते, बल्कि वे टोकन (Tokens) के माध्यम से टेक्स्ट को प्रोसेस करते हैं।
- टोकन अक्षरों, शब्दांशों या पूरे शब्दों का समूह हो सकते हैं।
- कॉन्टेक्स्ट विंडो टेक्स्ट की वही मात्रा है, जिसे टोकन में मापा जाता है, और जिसे मॉडल एक समय में संसाधित कर सकता है।
इस प्रकार, कॉन्टेक्स्ट विंडो यह निर्धारित करती है कि मॉडल कितने टोकन तक की जानकारी को एक साथ ध्यान में रख सकता है।
वर्किंग मेमोरी के रूप में कॉन्टेक्स्ट विंडो
एक Large Language Model (LLM) की कॉन्टेक्स्ट विंडो को उसकी कार्यशील स्मृति (Working Memory) के समकक्ष माना जा सकता है।
- यह मनुष्यों की अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory) की तरह काम करती है।
- यह तय करती है कि मॉडल:
- बातचीत के शुरुआती विवरणों को भूले बिना
- कितनी देर तक संवाद जारी रख सकता है।
कॉन्टेक्स्ट विंडो का व्यावहारिक महत्व
एक बड़ी संदर्भ विंडो AI मॉडल को कई प्रकार से अधिक सक्षम बनाती है:
- लंबे इनपुट (लंबे लेख, रिपोर्ट, कानून, कोड) को एक साथ समझने में सक्षम
- प्रतिक्रियाओं में अधिक संदर्भ और सुसंगतता
- बातचीत के दौरान पहले दिए गए निर्देशों को बेहतर ढंग से याद रखना
- बड़े दस्तावेज़ों या कोड बेस का एक बार में विश्लेषण
यह यह भी निर्धारित करती है कि:
- कोई मॉडल किस आकार तक के दस्तावेज़ या कोड नमूने को एक बार में संसाधित कर सकता है।
संदर्भ सीमा से अधिक इनपुट की स्थिति
जब कोई प्रॉम्प्ट, वार्तालाप, दस्तावेज़ या कोड बेस किसी एआई मॉडल की कॉन्टेक्स्ट विंडो सीमा से अधिक लंबा हो जाता है, तो:
- मॉडल को आगे बढ़ने के लिए
- टेक्स्ट को छोटा (truncate) करना
- या संक्षेप (summarize) करना आवश्यक होता है।
ऐसी स्थिति में शुरुआती संदर्भ के छूट जाने से उत्तर की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
कॉन्टेक्स्ट विंडो बढ़ाने के लाभ
सामान्य तौर पर, एलएलएम की संदर्भ विंडो का आकार बढ़ाने से:
- उत्तरों की सटीकता में वृद्धि
- भ्रम (Hallucinations) में कमी
- प्रतिक्रियाओं में बेहतर तार्किक निरंतरता
- लंबी और अर्थपूर्ण बातचीत संभव
- बड़े और जटिल डेटा अनुक्रमों का बेहतर विश्लेषण
जैसे-जैसे कॉन्टेक्स्ट विंडो बढ़ती है, एआई मॉडल अधिक “समझदार” प्रतीत होते हैं।
कॉन्टेक्स्ट विंडो की सीमाएँ और चुनौतियाँ
हालाँकि बड़ी संदर्भ विंडो लाभकारी है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं:
- अधिक कम्प्यूटेशनल शक्ति की आवश्यकता
- GPU/CPU मेमोरी की अधिक खपत
- लागत में वृद्धि
- संभावित रूप से विरोधी (Adversarial) हमलों के प्रति अधिक संवेदनशीलता
इसलिए, कॉन्टेक्स्ट विंडो का आकार बढ़ाना तकनीकी और आर्थिक संतुलन की माँग करता है।