- हाल ही में मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मानसा कस्बे में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें दो लोगों की मृत्यु की खबर ने स्वास्थ्य विभाग और आम जनता को चिंतित कर दिया है।
- यह बीमारी दुर्लभ जरूर है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है।

गिलियन-बैरे सिंड्रोम क्या है ?
परिधीय तंत्रिका तंत्र वह हिस्सा है जो:-
- मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को शरीर के बाकी अंगों से जोड़ता है
- मांसपेशियों की गतिविधि नियंत्रित करता है
- दर्द, तापमान और स्पर्श की संवेदनाएँ पहुंचाता है
- जब यह तंत्रिका तंत्र क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो शरीर में कमजोरी, सुन्नपन और लकवे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- GBS को चिकित्सकीय भाषा मेंAcute Inflammatory Demyelinating Polyneuropathy (AIDP) भी कहा जाता है।
- यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक देखी जाती है।
गिलियन-बैरे सिंड्रोम होने के कारण
GBS का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह अक्सर निम्न स्थितियों के बाद दिखाई देता है:
- वायरल संक्रमण (फ्लू, डेंगू, कोविड, गैस्ट्रो इंफेक्शन)
- बैक्टीरियल संक्रमण
- टीकाकरण के बाद (बहुत दुर्लभ मामलों में)
- बड़ी सर्जरी या गंभीर बीमारी के बाद
इन स्थितियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है और गलती से नसों पर हमला कर देती है।
गिलियन-बैरे सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण
GBS के लक्षण धीरे-धीरे या बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं।
शुरुआती लक्षण:
- हल्का बुखार या संक्रमण का इतिहास
- पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
- कमजोरी महसूस होना
- थकान
गंभीर लक्षण:
- पैरों से ऊपर की ओर फैलता लकवा
- हाथों में कमजोरी
- चलने में कठिनाई
- बोलने या निगलने में परेशानी
- सांस लेने में दिक्कत
- चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी
- लक्षण घंटों, दिनों या हफ्तों में तेजी से बढ़ सकते हैं।
- कुछ मामलों में मरीज खुद से सांस भी नहीं ले पाता, जिससे आईसीयू की जरूरत पड़ती है।
क्या GBS जानलेवा हो सकता है ?
यदि समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा हो सकती है। हालाँकि आधुनिक चिकित्सा से अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं।
मृत्यु का खतरा आमतौर पर:
- सांस की मांसपेशियों के प्रभावित होने
- संक्रमण
- दिल की धड़कन में गड़बड़ी
- देर से इलाज शुरू होने पर बढ़ जाता है।
गिलियन-बैरे सिंड्रोम का इलाज
GBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन उपचार से रोग की गंभीरता कम की जा सकती है और रिकवरी तेज होती है।
मुख्य उपचार:
- इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIG)
- प्लाज्मा फेरसिस (Plasma Exchange)
- फिजियोथेरेपी और पुनर्वास
- सांस संबंधी सपोर्ट (जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर)
अधिकतर मरीज 6 महीने के अंदर चलने-फिरने लगते हैं। हालांकि पूर्ण ठीक होने में 1–2 साल भी लग सकते हैं। कुछ लोगों में कमजोरी, थकान या सुन्नपन लंबे समय तक बना रह सकता है।
बचाव और सावधानियाँ
GBS की पूरी रोकथाम संभव नहीं है, लेकिन सावधानी से जोखिम कम किया जा सकता है:
- संक्रमण से बचाव (स्वच्छता, साफ पानी, हाथ धोना)
- बुखार या संक्रमण के बाद कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे
- खुद से दवा न लें
- टीकाकरण के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखें तो चिकित्सक को बताएं