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मानव–वन्यजीव संघर्ष क्या है ? भारत में स्थिति, कारण, प्रभाव एवं अन्य

मानव–वन्यजीव संघर्ष (HWC) आज विश्वभर में जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रहा है। भारत जैसे जैव विविध देश में, जहां जंगलों से सटे क्षेत्रों में करोड़ों लोग रहते हैं, HWC की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।


मानव–वन्यजीव संघर्ष क्या है ? 

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के अनुसार— जब मानव और वन्यजीवों का संपर्क नकारात्मक परिणाम उत्पन्न करे, जैसे

  • जीवन की हानि,
  • संपत्ति / फसलों को नुकसान,
  • पशुधन की हत्या,
  • मानव बस्तियों में वन्यजीवों की घुसपैठ, — तो उसे मानव–वन्यजीव संघर्ष कहा जाता है।

उदाहरण:

  • 2024 में उत्तर प्रदेश के बहराइच में भेड़िये द्वारा कई बच्चों पर हमला।
  • हाथी, तेंदुए, बाघ, बंदर, नीलगाय आदि द्वारा फसल / घरों / पशुधन को नुकसान।

भारत में HWC की स्थिति

  • भारत में HWC मुख्यतः हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू, बंदर, नीलगाय, भेड़िया आदि प्रजातियों से जुड़ा है।
  • 2022 में देश में 1,510 मौतें वन्यजीवों के हमलों से हुईं (Accidental Deaths & Suicides in India – 2022)।
  • केरल ने हाल ही में HWC को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया है।
  • HWC से निपटना मुख्यतः राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की जिम्मेदारी है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के प्रमुख कारण

(A) पारिस्थितिक (Ecological) कारण

  • मौसमी परिवर्तन (Climate Change): तापमान बढ़ने और वर्षा के पैटर्न बदलने से वन्यजीव नए क्षेत्रों में जाने लगे हैं।
  • चरम मौसमी घटनाएं: उदाहरण: आर्कटिक में समुद्री बर्फ पिघलने से मानव–ध्रुवीय भालू संघर्ष बढ़ा।
  • वन्यजीव आवास का विखंडन / Habitat Fragmentation

(B) मानव-जनित (Anthropogenic) कारण

  • भूमि उपयोग में परिवर्तन, शहरीकरण एवं अवैध अतिक्रमण
  • कृषि का विस्तार, और फसलों का आकर्षक होना
  • संरक्षण प्रयासों के कारण पशु संख्या में बढ़ोतरी (जैसे: सुंदरबन में बाघों की संख्या वहन क्षमता तक पहुँच रही)

(C) वन्यजीव जनित कारण

  • पशुओं के जीवन चक्र में बदलाव (प्रजनन, भोजन खोजने की रणनीति)
  • प्रवास पैटर्न में परिवर्तन
  • नए भू-परिदृश्यों के अनुरूप समायोजन क्षमता की कमी

HWC के प्रभाव

(1) सामाजिक / मनोवैज्ञानिक प्रभाव

  • भय, तनाव, अनिश्चितता
  • जंगल-करीबी समुदायों में मानसिक आघात

(2) आर्थिक प्रभाव

  • फसल नुकसान
  • पशुधन का शिकार → आर्थिक हानि
  • बदले की भावना में वन्यजीवों की हत्या → जैव विविधता पर प्रभाव

(3) स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव

  • जूनोटिक बीमारियों का प्रसार (जैसे: निपाह वायरस)

(4) पारिस्थितिक प्रभाव

  • शिकारी-शिकार संतुलन बिगड़ना
  • मानव गतिविधियों से आवास का सिकुड़ना → संकटग्रस्त प्रजातियों पर खतरा

कानूनी एवं नीतिगत ढांचा

(A) संवैधानिक प्रावधान

  • वन एवं वन्यजीव – समवर्ती सूची (List III) में→ केंद्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी

(B) प्रमुख कानून

1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972

  • वन्यजीवों, पौधों और आवासों की सुरक्षा
  • संरक्षित क्षेत्रों (PA) की स्थापना
  • अपराधों पर कड़ी सजा

(C) नीतिगत पहल

  1. मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs)
    • मानव–हाथी
    • मानव–बाघ
    • मानव–तेंदुआ संघर्ष प्रबंधन
  2. राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (NWAP) 2017–2035
  3. राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष शमन रणनीति और कार्य योजना (2021–26)

हाल की तकनीकी व व्यवहारिक पहलें

  • Project RE-HAB (Reducing Elephant–Human Attacks Using Bees)-मधुमक्खी बाड़ लगाकर हाथियों को गाँवों से दूर रखना
  • जीपीएस आधारित कॉलरिंग हाथी/बाघ की गतिविधियों की निगरानी
  • डिजिटल डेटाबेस हॉटस्पॉट मैपिंग
  • सोलर/फेंसिंग फसल सुरक्षा
  • अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम (SMS, ऐप आधारित सूचना)

आगे की राह (Way Forward)

1. विज्ञान-आधारित प्रबंधन

  • NWAP 2017–2035 के अनुसार प्रजाति-विशिष्ट, क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियाँ
  • वैज्ञानिक कैरींग कैपेसिटी आकलन

2. समुदायों की भागीदारी

  • स्थानीय / वनवासियों का पारंपरिक ज्ञान
  • ईको-डेवलपमेंट कमेटियों की भूमिका
  • फसल मुआवजा/बीमा में पारदर्शिता

3. तकनीकी समाधान

  • ड्रोन निगरानी
  • स्मार्ट बाड़बंदी
  • अस्पतालों/रिस्क्यू केंद्रों की उपलब्धता

4. बेहतर भूमि उपयोग योजना

  • Corridor Restoration
  • शहरी और औद्योगिक विस्तार का वैज्ञानिक मूल्यांकन

5. शिक्षा एवं जागरुकता

  • स्कूलों / पंचायतों में HWC प्रशिक्षण
  • समुदायों के लिए व्यवहारिक दिशानिर्देश

निष्कर्ष

मानव–वन्यजीव संघर्ष केवल जंगल-करीबी समुदायों तक सीमित नहीं, बल्कि यह भारत की जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा बहु-आयामी मुद्दा है। प्रभावी समाधान के लिए कानूनी ढांचे, तकनीकी नवाचार, समुदाय सहभागिता और वैज्ञानिक प्रबंधन—इन चारों स्तंभों को एक साथ उपयोग करना आवश्यक है। इस प्रकार, HWC को कम करना भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेषकर SDG-13 (Climate Action), SDG-15 (Life on Land) की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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