New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

युआन वांग 5

चर्चा में क्यों  

16 अगस्त को चीन का जासूसी पोत ‘युआन वांग 5’ (Yuan Wang 5) श्रीलंका के दक्षिण में स्थित हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुँचा। विदित है कि भारत ने 15 अगस्त को ही श्रीलंका को डोर्नियर 228 समुद्री निगरानी विमान उपहार में दिया था।

प्रमुख बिंदु 

  • चीन के अनुसार युआन वांग 5 एक अनुसंधान एवं सर्वेक्षण पोत है, जिसे वर्ष 2007 में बनाया गया था। इसकी क्षमता 11,000 टन है।
  • यह अत्याधुनिक पोत उपग्रह, रॉकेट और अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को ट्रैक करने में सक्षम है। इस पोत की ट्रैकिंग रेंज 750 किमी. तक विस्तृत है।
  • हंबनटोटा बंदरगाह कोलंबो से लगभग 250 किमी दूर स्थित है। इसे चीनी ऋण द्वारा निर्मित किया गया था।
  • कर्ज वापस चुकाने में असमर्थ श्रीलंका ने वर्ष 2017 में इसे 99 वर्ष के पट्टे पर चीन को सौंप दिया गया था। श्रीलंका के कुल विदेशी ऋण में चीनी ऋण का हिस्सा लगभग 10% है।

भारत की सुरक्षा एवं आर्थिक चिंताएँ

  • इस पोत में समुद्र तल की मैपिंग करने की क्षमता है, जो चीनी नौसेना का पनडुब्बी रोधी अभियान का एक हिस्सा है। साथ ही, यह हिंद महासागर क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी भाग में उपग्रह अनुसंधान कर सकता है।
  • यह पोत अपने डॉकिंग पॉइंट से केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बंदरगाहों की निगरानी कर सकता है। कोच्चि, विशाखापट्टनम और कारवार में भारतीय नौसेना के ठिकाने भी इसके दायरे में हैं।
  • उल्लेखनीय है कि चीन दो पनडुब्बियों के बदले बांग्लादेश (बंगाल की खाड़ी) में पहले ही एक पनडुब्बी बेस स्थापित कर चुका है। चीन ने म्यांमार को भी एक पुरानी पनडुब्बी दी है।
  • अरब सागर की तरफ चीन पाकिस्तान को आठ पनडुब्बियां मुहैया करा रहा है। इन कारकों से हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के प्रभाव में वृद्धि होगी।
  • चीन द्वारा एशिया और यूरोप के बीच शिपिंग मार्गों को अवरुद्ध करने के लिये भी हंबनटोटा का उपयोग किया जा सकता है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X