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फिल्म प्रमाणन श्रेणी में संशोधन

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन व कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ

केंद्र सरकार ने फिल्मों के लिए संशोधित आयु-आधारित प्रमाणन की शुरुआत की है जिससे माता-पिता के मार्गदर्शन के साथ सार्वजनिक प्रदर्शन से संबंधित यू/ए (U/A) श्रेणी प्रमाणन का विस्तार किया जा सके।

क्या है संशोधित फिल्म प्रमाणन रेटिंग

नवीनतम राजपत्र अधिसूचना में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दिसंबर 1991 में अधिसूचित नियमों में संशोधन किया है जिसमें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को मंजूरी देने के सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं।

पुरानी प्रमाणन श्रेणियाँ

  • केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा पहले चार मुख्य प्रमाणन श्रेणियाँ जारी की जाती थीं, जो निम्नलिखित थीं:
    • यू (Unrestricted): सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त, परिवार के साथ देखने योग्य फिल्में
    • यू/ए (Unrestricted with Parental Guidance): 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता के मार्गदर्शन के साथ उपयुक्त
    • ए (Adult): केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के लिए, जिसमें नग्नता या अश्लील सामग्री की अनुमति नहीं थी।
    • एस (Special): विशेष दर्शकों (जैसे- डॉक्टर, इंजीनियर) के लिए सीमित
  • ये श्रेणियाँ सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 1983 के तहत संचालित होती थीं।

नई प्रमाणन श्रेणियाँ

  • सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम 2024 के तहत यू/ए श्रेणी को और अधिक विशिष्ट आयु-आधारित उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
  • ये नई श्रेणियाँ हैं:
    • यू/ए 7+: 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए उपयुक्त, लेकिन 7 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता के मार्गदर्शन की आवश्यकता
    • यू/ए 13+: 13 वर्ष और उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए उपयुक्त, लेकिन 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता के मार्गदर्शन की आवश्यकता
    • यू/ए 16+: 16 वर्ष और उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए उपयुक्त, लेकिन 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए माता-पिता के मार्गदर्शन की आवश्यकता
  • ये बदलाव 1 जून, 2025 को भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य आयु-उपयुक्त दर्शकों के लिए सामग्री को अधिक विशिष्ट बनाना है। 
  • इसके अतिरिक्त, प्रमाणपत्रों की वैधता को 10 वर्ष की सीमा से हटा दिया गया है, जिससे प्रमाणपत्र अब स्थायी रूप से मान्य होंगे।
  • हालाँकि, टेलीविजन प्रसारण के लिए संपादित फिल्मों को पुनः प्रमाणन की आवश्यकता होगी।

महत्त्व

  • यह संशोधित आयु-आधारित प्रमाणन प्रणाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उपभोक्ता की पसंद के सिद्धांतों के साथ बच्चों जैसे संवेदनशील दर्शकों की सुरक्षा की आवश्यकता को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • यू/ए 7+, यू/ए 13+ और यू/ए 16+ जैसी श्रेणियाँ माता-पिता को बच्चों के लिए उपयुक्त सामग्री चुनने में मदद करेंगी। इससे बच्चों पर हिंसा, अश्लीलता या अनुचित सामग्री का प्रभाव कम होगा।

फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया संबंधित कानून

  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952: यह फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को विनियमित करने वाला मुख्य कानून है। 
    • इसकी धारा 5बी(1) के तहत कोई भी फिल्म, जिसका कोई हिस्सा भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य (देश) की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता, मानहानि या अपराध को उकसाने के खिलाफ हो, उसे प्रमाणन नहीं दिया जाएगा।
  • सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 1983: ये नियम प्रमाणन प्रक्रिया को विस्तार से बताते हैं, जिसमें आवेदन, जांच समिति एवं अपील प्रक्रिया शामिल है। वर्ष 2024 में इन्हें नए नियमों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
  • सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023: इसने आयु-आधारित श्रेणियों को लागू किया और पायरेसी के खिलाफ सख्त प्रावधान जोड़े, जैसे- भारी जुर्माना व कारावास।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: ये नियम मुख्यत: ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया को कवर करते हैं किंतु इन्होंने डिजिटल सामग्री के लिए व्यापक नियामक ढांचे को प्रभावित किया है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के बारे में

  • परिचय : यह भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है।
  • स्थापना : सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत 
  • मुख्य भूमिकाएँ
    • फिल्मों का प्रमाणन
      • यह फिल्मों को उनकी सामग्री के आधार पर यू, यू/ए, ए एवं एस श्रेणियों में प्रमाणित करता है।
      • नई आयु-आधारित श्रेणियाँ (यू/ए 7+, 13+, 16+) इस प्रक्रिया को और परिष्कृत करती हैं।
    • सामाजिक मूल्यों की रक्षा
      • यह सुनिश्चित करता है कि फिल्में सामाजिक मानकों, नैतिकता एवं राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हों।
      • यह हिंसा, अश्लीलता या संवेदनशील विषयों को सीमित करने के लिए कटौती या संशोधन का सुझाव दे सकता है।
    • पारदर्शिता एवं दक्षता
      • ऑनलाइन प्रमाणन प्रक्रिया और ई-गवर्नेंस के कार्यान्वयन से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
    • अपील तंत्र
      • यदि कोई फिल्म निर्माता सी.बी.एफ.सी. के निर्णय से असंतुष्ट है तो वह फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण (FCAT) में अपील कर सकता था, किंतु वर्ष 2021 में एफ.सी.ए.टी. को समाप्त कर दिया गया। अब अपील सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय या न्यायालय में की जा सकती है।
  • हालांकि, सी.बी.एफ.सी. को प्राय: अत्यधिक सेंसरशिप एवं राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है, जैसे- लिपस्टिक अंडर माय बुरखा और संतोष जैसी फिल्मों के मामले में।
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