संदर्भ
- नासा के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन का प्रक्षेपण 1 अप्रैल 2026 से पहले अपेक्षित नहीं है। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो आधी सदी से भी अधिक समय के अंतराल के बाद इंसान एक बार फिर चंद्र क्षेत्र में कदम रखेगा। यह उपलब्धि अमेरिकी अंतरिक्ष इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।
आर्टेमिस II मिशन के बारे में
- आर्टेमिस II, नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन है। वर्ष 1972 के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान चंद्रमा के आसपास की यात्रा करेंगे।
- लगभग 10 दिनों तक चलने वाले इस मिशन में स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और Orion (ओरियन) अंतरिक्ष यान का परीक्षण किया जाएगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले चंद्र अभियानों के लिए जीवन-समर्थन (लाइफ-सपोर्ट) और नेविगेशन (नेविगेशन) प्रणालियाँ पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद हैं।
- रॉकेट स्टैक को अंतिम परीक्षणों के लिए जनवरी के मध्य में Kennedy Space Center Launch Complex 39B (केनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39बी) पर ले जाया जाएगा।
मिशन की रूपरेखा और तकनीक
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यह मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट की शक्ति और ओरियन कैप्सूल की सुरक्षा पर आधारित है। एसएलएस रॉकेट ओरियन को चंद्रमा के सुदूर हिस्से (फार साइड) की ओर एक फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र पर भेजेगा।
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इस यात्रा के दौरान कैप्सूल चंद्रमा की सतह से मात्र 7,500 किलोमीटर की दूरी तक पहुँचेगा, जिसके बाद पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण इसे स्वतः वापस खींच लेगा। लगभग एक सप्ताह की इस यात्रा का समापन प्रशांत महासागर में लैंडिंग के साथ होगा।
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वस्तुतः इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा पर उतरना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राउंड कंट्रोल, रॉकेट की क्षमता और क्रू के तालमेल का परीक्षण करना है, ताकि भविष्य के ह्यूमन लैंडिंग मिशनों की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
परिचालन प्रक्रिया (मिशन प्रोफाइल)
- प्रारंभिक चरण : पृथ्वी की ऊँची कक्षा में पहले 24 घंटे बिताकर चालक दल कैप्सूल के लाइफ-सपोर्ट और एनवायरनमेंटल सिस्टम की गहन जाँच करेगा।
- चंद्र यात्रा : सभी मानक सही पाए जाने पर ओरियन ट्रांस-लूनर इंजेक्शन प्रक्रिया के जरिए चंद्रमा की ओर प्रस्थान करेगा। दल इस दौरान मैन्युअल पायलटिंग, संचार और नेविगेशन सिस्टम, तथा हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन का परीक्षण करेगा और गहरे अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा।
- वापसी : पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय ओरियन की गति लगभग 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसकी 5 मीटर चौड़ी हीट शील्ड 5,000 डिग्री सेल्सियस तक के भीषण तापमान का सामना करेगी।
- नोट : आर्टमिस वन में देखी गई हीट शील्ड की समस्याओं को दूर करने के लिए इस बार प्रवेश की दिशा (ट्रेजेक्टरी) में बदलाव किया गया है।
आर्टमिस कार्यक्रम में रणनीतिक बदलाव
- आर्टमिस थ्री : अब यह चंद्रमा पर उतरने के बजाय केवल पृथ्वी की कक्षा में स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स के साथ डॉकिंग का अभ्यास करेगा।
- आर्टमिस फोर (2028) : वास्तविक चंद्र अवतरण अब इस मिशन के दौरान होगा।
- संसाधन आवंटन : लूनर गेटवे (चंद्र अंतरिक्ष स्टेशन) परियोजना को स्थगित कर दिया गया है। अब पूरा ध्यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर है।
- एसएलएस अपग्रेड : रॉकेट के कॉन्फ़िगरेशन में फिलहाल कोई बड़े बदलाव नहीं किए जाएंगे ताकि लॉन्च की आवृत्ति बढ़ाई जा सके।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा: चीन की चुनौतियाँ
- चीन अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं का तेज़ी से विस्तार कर रहा है। उसका नया अंतरिक्ष यान मेंगझोऊ और लॉन्ग मार्च टेन रॉकेट परीक्षण के उन्नत चरणों में हैं। चीन का लक्ष्य 2030 तक चंद्रमा पर इंसान उतारना और वहां इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन स्थापित करना है। चांग-ई सेवन और एट जैसे मिशनों के जरिए वे दक्षिणी ध्रुव पर संसाधनों की खोज और उपयोग पर काम कर रहे हैं।
आर्टमिस II मिशन की सफलता के संभावित परिणाम
सफलता की स्थिति में:
- एसएलएस रॉकेट और ओरियन (Orion) कैप्सूल की विश्वसनीयता पूरी दुनिया के सामने सिद्ध हो जाएगी।
- चंद्रमा की दौड़ में अमेरिका को चीन के मुकाबले एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी बढ़त हासिल होगी।
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और निवेशकों का इस कार्यक्रम पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
देरी होने की स्थिति में:
- मिशन की कुल लागत (जो पहले ही $93 अरब से अधिक है) में भारी वृद्धि होगी।
- बार-बार होने वाली देरी से अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का भरोसा डगमगा सकता है।
- मिशन में देरी चीन को अपने चंद्र अभियानों के माध्यम से अंतर पाटने या आगे निकलने का मौका दे सकती है।
विफलता की स्थिति में:
- अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम कई वर्षों के लिए पीछे छूट सकता है।
- नासा को अपनी पूरी रणनीति और भविष्य के मिशनों (जैसे Artemis III और IV) की रूपरेखा को नए सिरे से तैयार करना पड़ सकता है।
- बजट में कटौती और कार्यक्रम की निरंतरता पर राजनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं।
वस्तुतः आर्टमिस II केवल एक उड़ान नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व की पुनर्स्थापना का प्रयास है। जहाँ एक ओर नासा अपनी सुरक्षा और तकनीक को परख रहा है, वहीं चीन अपनी निर्धारित समय-सीमा के साथ इस दौड़ में एक कड़ी चुनौती पेश कर रहा है।