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आय एवं संपत्ति असमानता का मूल्यांकन : G20 रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)

संदर्भ

नोबेल पुरस्कार विजेता जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ (Joseph Stiglitz) के नेतृत्व में प्रकाशित G20 समूह की एक रिपोर्ट ने वैश्विक असमानता के आपातकालीन स्तर तक पहुँचने की चेतावनी दी है। 

वैश्विक असामनता पर G20 रिपोर्ट के बारे में

  • यह रिपोर्ट G20 की “Extraordinary Committee of Independent Experts on Global Inequality” द्वारा तैयार की गई है। 
  • इसका उद्देश्य देशों के बीच और देशों के भीतर आय एवं संपत्ति में बढ़ती असमानता का मूल्यांकन करना है।
  • यह रिपोर्ट दक्षिण अफ्रीकी G20 अध्यक्षता के अंतर्गत तैयार की गई है।

भारत से संबंधित मुख्य निष्कर्ष

  • भारत में शीर्ष 1% लोगों की संपत्ति वर्ष 2000 से 2023 के बीच 62% बढ़ी।
  • चीन में यह वृद्धि लगभग 54% रही।
  • रिपोर्ट का कहना है कि भारत और चीन जैसे देशों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से अंतर-देशीय असमानता थोड़ी घटी है, लेकिन देशों के भीतर असमानता तेज़ी से बढ़ी है।

वैश्विक परिदृश्य 

  • शीर्ष 1% का प्रभुत्व: वर्ष 2000 से 2024 के बीच शीर्ष 1% लोगों ने वैश्विक नई संपत्ति का 41% अपने पास केंद्रित किया; जबकि निचले 50% लोगों को मात्र 1% हिस्सा मिला।
  • गरीबी घटने की गति रुकी : वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक गरीबी घटने की दर लगभग ठहर गई है, और कुछ क्षेत्रों में गरीबी फिर से बढ़ी है।
  • खाद्य असुरक्षा : विश्व की लगभग 2.3 अरब आबादी को मध्यम या गंभीर स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
  • स्वास्थ्य सेवाएँ : दुनिया की आधी आबादी को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच नहीं है, और 1.3 अरब लोग स्वास्थ्य खर्च के कारण गरीबी रेखा से नीचे जा रहे हैं।

लोकतंत्र और असमानता

  • रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों में आय और संपत्ति की असमानता अधिक है, वहाँ लोकतंत्र के कमजोर होने की संभावना सात गुना अधिक होती है। 
  • यह प्रवृत्ति जनविश्वास में कमी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और शासन में “एलीट कैप्चर” को बढ़ावा देती है।
  • सामाजिक प्रभाव:
    • बढ़ती असमानता से समाज में असंतोष, अविश्वास और विभाजन बढ़ता है।
    • सामाजिक एकजुटता और जनसंवाद कमजोर होते हैं।
  • आर्थिक प्रभाव:
    • संपत्ति का संकेंद्रण उपभोग और मांग को सीमित करता है।
    • मानव पूँजी के विकास में बाधा आती है।
    • समावेशी विकास की गति धीमी पड़ती है।
  • राजनीतिक प्रभाव:
    • नीति-निर्माण पर धनी वर्ग का प्रभाव बढ़ता है।
    • समान अवसरों की पहुँच घटती है।
    • शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही कम होती है।

नई सिफारिशें

  • रिपोर्ट ने असमानता की निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पैनल ऑन इनइक्वेलिटी (International Panel on Inequality - IPI) के गठन का प्रस्ताव रखा है।
  • यह पैनल Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) की तरह काम करेगा।
  • इसका उद्देश्य सरकारों को असमानता से संबंधित विश्वसनीय डेटा और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करना होगा।
  • यह संस्था दक्षिण अफ्रीकी G20 अध्यक्षता के तहत शुरू की जाएगी।

निष्कर्ष

  • रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि अत्यधिक असमानता कोई स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नीति-निर्माण का परिणाम है। इसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैश्विक समन्वय के माध्यम से बदला जा सकता है।
  • भारत जैसे देशों के लिए यह रिपोर्ट चेतावनी है कि तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद यदि आय वितरण में संतुलन नहीं लाया गया, तो सामाजिक स्थिरता, लोकतंत्र और समावेशी विकास के लक्ष्य खतरे में पड़ सकते हैं।
  • “विकसित भारत 2047” की दिशा में बढ़ते हुए, भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ केवल शीर्ष 1% तक सीमित न रहे, बल्कि हर नागरिक तक पहुँचे।
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