संदर्भ
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई ने संगीत की दुनिया में रचनात्मकता के नए दरवाजे खोले हैं, लेकिन इसके साथ कॉपीराइट, कलाकारों के अधिकार और संगीत की प्रामाणिकता को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया ने एआई से पूरी तरह तैयार किए गए संगीत को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ऑस्ट्रेलिया के संगीत उद्योग की संस्था ऑस्ट्रेलियन रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन (एआरआईए) ने 25 अगस्त को स्पष्ट किया कि पूरी तरह एआई की मदद से बनाए गए गानों को उसके संगीत चार्ट में जगह नहीं दी जाएगी।
प्रमुख बिंदु
- यह फैसला ऐसे समय आया है जब एआई से तैयार संगीत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और कई बार श्रोताओं को यह पता ही नहीं चलता कि वे जिस गीत को सुन रहे हैं, उसके निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में इस बहस को उस समय खास गति मिली, जब संगीत निर्माता और डिस्क जॉकी जोश फवाज़ ने 1989 में रिलीज मैडोना के चर्चित गीत ‘लाइक अ प्रेयर’ का एआई रीमिक्स तैयार किया। यह गाना ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष 20 चार्ट में कई सप्ताह तक बना रहा और एआरआईए के शीर्ष 20 ऑस्ट्रेलियाई एकल गानों के चार्ट में दूसरे स्थान तक पहुंच गया। यूट्यूब पर इसे 2.3 करोड़ से अधिक बार देखा गया।
- विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि शुरुआत में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया था कि गाने को तैयार करने में एआई का इस्तेमाल हुआ है। श्रोताओं और संगीतकारों ने सवाल उठाया कि यदि किसी रचना में कृत्रिम तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो इसकी जानकारी श्रोताओं को दी जानी चाहिए।
एआई पर पूरी तरह रोक नहीं
- एआरआईए के नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि संगीत निर्माण में एआई के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। संस्था ने ऐसी रिकॉर्डिंग को चार्ट में शामिल करने की गुंजाइश रखी है, जो ‘पर्याप्त रूप से मानव द्वारा तैयार’ हो और जिसमें स्ट्रीम या चार्ट में हेरफेर से जुड़ी कोई समस्या न हो।
- इस व्यवस्था के तहत कलाकार धुन, संगीत संयोजन या उत्पादन के अन्य हिस्सों में जनरेटिव एआई की सहायता ले सकते हैं। लेकिन पूरी तरह एआई से तैयार सामग्री को मानव रचनात्मकता के बराबर मानकर चार्ट में स्थान नहीं दिया जाएगा।
- एआरआईए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐनाबेल हर्ड का कहना है कि चार्ट में उन कलाकारों के लिए जगह बनी रहनी चाहिए जो अपने काम में एआई उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही बिना लाइसेंस तैयार किए गए एआई संगीत को पुरस्कृत करना उस रिकॉर्डेड संगीत की बुनियाद को कमजोर कर सकता है, जिसका प्रतिनिधित्व संस्था करती है।
उल्लंघन पर कार्रवाई
- नियमों के तहत एआरआईए अपात्र रिकॉर्डिंग को चार्ट में शामिल करने से इनकार कर सकती है। यदि कोई गीत पहले ही चार्ट में शामिल हो चुका है और बाद में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो उसे हटाया भी जा सकता है। इसके अलावा चार्ट में उसकी स्थिति बदली जा सकती है, मान्यता वापस ली जा सकती है और पुरस्कार तक रद्द किए जा सकते हैं।
- लेकिन एआई संगीत की चुनौती केवल चार्ट तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में कलाकार और संगीत कंपनियां उन एआई मंचों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं, जिन पर कॉपीराइट वाली रचनाओं का बिना अनुमति इस्तेमाल करने का आरोप है। सूनो और यूडियो जैसे मंच इस विवाद के केंद्र में रहे हैं।
- अगस्त के अंत में सोनी म्यूजिक पब्लिशिंग और वार्नर चैपल समेत कई संगीत प्रकाशकों ने एंथ्रोपिक तथा उसके सह-संस्थापकों डारियो अमोदेई और बेंजामिन मैन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। प्रकाशकों ने डिजिटल पायरेसी और कॉपीराइट वाली सामग्री से डेटा एकत्र करने के आरोप लगाए हैं। एंथ्रोपिक ने आरोपों से असहमति जताई है और अदालत में अपना पक्ष रखने की बात कही है।
संगीत मंचों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
- एआई संगीत की पहचान के लिए केवल उद्योग के नियम पर्याप्त नहीं होंगे। आम श्रोताओं को भी यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि कोई गीत मानव द्वारा तैयार किया गया है या एआई की मदद से। इसलिए स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक जैसे मंचों पर पारदर्शी लेबलिंग की मांग बढ़ रही है।
- स्पॉटिफाई ने ‘एआई पर्सोना’ लेबल की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। इसके जरिए पूरी तरह एआई से बनाए गए कलाकारों की पहचान की जा सकेगी। ऐसे कलाकारों को श्रोताओं की संपादकीय और एल्गोरिदम आधारित सिफारिशों में शामिल नहीं किया जाएगा। स्पॉटिफाई कलाकारों की स्वयं दी गई जानकारी के साथ अपनी जांच प्रक्रिया का भी इस्तेमाल करेगा।
- इसके अलावा एआई क्रेडिट्स और सॉन्गडीएनए जैसी सुविधाओं के जरिए यह पता लगाने में मदद की जाएगी कि किसी गीत के निर्माण में एआई की भूमिका रही है या नहीं।
चुनौती सिर्फ ऑनलाइन नहीं
- एआई संगीत का असर सोशल मीडिया और संगीत मंचों से आगे भी दिखाई दे रहा है। बिना लेबल वाले एआई गानों के बढ़ते इस्तेमाल से सामग्री निर्माताओं के लिए अपने वीडियो और तस्वीरों में संगीत का चयन कठिन हो रहा है। छोटे कारोबारों के लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है। कोई कारोबारी अनजाने में एआई संगीत वाली रील प्रकाशित कर सकता है और बाद में आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। रील हटाकर दोबारा डालने पर उसकी पहुंच और पहले हासिल किए गए दृश्य प्रभावित हो सकते हैं।
- दुकानों और कैफे जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी एआई संगीत का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका है। लाइसेंस प्राप्त लोकप्रिय संगीत के लिए शुल्क देना पड़ता है, जबकि सामान्य एआई संगीत अपेक्षाकृत आसान विकल्प हो सकता है। इससे मानव कलाकारों की आय और संगीत उद्योग के पारंपरिक कारोबारी मॉडल पर भी दबाव पड़ सकता है।
तकनीक और मानवीय रचनात्मकता में संतुलन
- एआई संगीत को पूरी तरह खारिज करना शायद व्यावहारिक रास्ता नहीं है। यह कलाकारों को नए प्रयोगों और रचनात्मक संभावनाओं के अवसर देता है। लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि तकनीक के विकास की कीमत मानव कलाकारों के अधिकारों और कॉपीराइट संरक्षण के रूप में न चुकानी पड़े।
- ऑस्ट्रेलिया का कदम इसी संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले समय में संगीत उद्योग के सामने असली चुनौती एआई को रोकना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के लिए ऐसे स्पष्ट नियम बनाना होगी, जिनमें मानवीय रचनात्मकता, पारदर्शिता, उचित पारिश्रमिक और कॉपीराइट संरक्षण सुरक्षित रह सकें। श्रोताओं को भी यह जानने का अधिकार होगा कि वे जो संगीत सुन रहे हैं, उसके पीछे मानव कलाकार की रचनात्मकता कितनी है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका कितनी।