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सी.सी.टी.वी. बनाम निजता का अधिकार

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने उसी न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश द्वारा स्पा (मसाज एंड थेरेपी) सेंटर में सी.सी.टी.वी. उपकरण लगाने के आदेश को निजता के अधिकार के विपरीत माना है।

के. एस. पुट्टास्वामी मामला

  • स्वामीनाथन ने ‘न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टास्वामी मामले’ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित बिंदुओं का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद- 21 सभी को निजता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता हैं।
  • पुट्टास्वामी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मत फैसले के माध्यम से यह घोषित किया था कि अनुच्छेद- 21 में गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में निजता का अधिकार भी शामिल है।

उच्च न्यायलय का मत

  • निजता के अधिकार को निहित और सहायक दोनों मूल्यों के रूप में देखा जाता है, जिसके तहत निजता प्रत्येक व्यक्ति की बुनियादी गरिमा व मूल्य के लिये महत्त्वपूर्ण होने के साथ-साथ हस्तक्षेप रहित जीवन जीने की क्षमता से है।
  • उच्च न्यायलय का मानना हैं कि अनुच्छेद- 21 में गारंटीकृत निजता के अलग-अलग रूप होते हैं- इसमें शारीरिक स्वायत्तता का अधिकार, सूचनात्मक गोपनीयता का अधिकार और पसंद की गोपनीयता का अधिकार भी शामिल हैं। इस तरह किसी स्पा परिसर के अंदर सी.सी.टी.वी. उपकरण लगाना व्यक्ति की शारीरिक स्वायत्तता का हनन होगा। 
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