कमर्शियल एलपीजी महंगा : घरेलू सिलेंडर पर राहत बरकरार
संदर्भ
लगातार दो महीनों तक एलपीजी की कीमतों में गिरावट के बाद तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में करीब 10 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी 1 सितंबर 2026 से लागू हुई है। दिल्ली में अब 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,747.50 रुपये हो गई है। हालांकि, घरेलू उपयोग में आने वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कमर्शियल एलपीजी की कीमत में हुई यह मामूली बढ़ोतरी भले ही सीधे तौर पर आम घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित नहीं करती, लेकिन इसके पीछे घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान यानी अंडर-रिकवरी की भरपाई की कोशिश को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।
घरेलू एलपीजी पर कंपनियों को हो रहा है नुकसान
अंडर-रिकवरी उस स्थिति को कहा जाता है, जब तेल विपणन कंपनियां एलपीजी को जिस कीमत पर उपभोक्ताओं को बेचती हैं, वह उत्पादन और वितरण की वास्तविक लागत की तुलना में कम होती है। ऐसे में कंपनियों को प्रति सिलेंडर नुकसान उठाना पड़ता है।
सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत में सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी के प्रत्येक सिलेंडर पर करीब 188 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही थी। यह आंकड़ा जुलाई में करीब 500 रुपये और जून में 700 रुपये से अधिक था। यानी पिछले कुछ महीनों में कंपनियों के नुकसान में काफी कमी आई है, लेकिन घरेलू एलपीजी की बिक्री पर अभी भी दबाव बना हुआ है।
दरअसल, देश में एलपीजी की कुल खपत का बड़ा हिस्सा घरेलू क्षेत्र से आता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच कुल एलपीजी खपत में पैकेज्ड घरेलू एलपीजी की हिस्सेदारी 90.4 प्रतिशत रही।
उज्ज्वला योजना से बढ़ता सब्सिडी का बोझ
घरेलू एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकार की सब्सिडी नीति की भी बड़ी भूमिका है। करीब 10.6 करोड़ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) लाभार्थियों को प्रत्येक सिलेंडर पर 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है। ये लाभार्थी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं का लगभग 33 प्रतिशत हैं।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 942 रुपये है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद यही सिलेंडर 642 रुपये में मिलता है।
यही वजह है कि घरेलू एलपीजी की कीमत को आम उपभोक्ताओं के लिए अपेक्षाकृत कम रखने की नीति का वित्तीय दबाव तेल विपणन कंपनियों पर पड़ता है।
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और को-ग्रुप हेड, कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स, प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर फिलहाल अंडर-रिकवरी करीब 200 रुपये प्रति सिलेंडर है। उनके मुताबिक कमर्शियल एलपीजी की कीमत में मौजूदा बढ़ोतरी को इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुल एलपीजी बिक्री में कमर्शियल एलपीजी की हिस्सेदारी घरेलू एलपीजी की तुलना में काफी कम है, इसलिए इस बढ़ोतरी को बहुत अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
आयात घटा, घरेलू उत्पादन बढ़ा
एलपीजी की कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति की स्थिति भी इस पूरे परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स (पीओएल) उत्पादों के आयात में 45.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
पीपीएसी के अनुसार, इस गिरावट के प्रमुख कारणों में एलपीजी, पेट कोक और फ्यूल ऑयल आदि के आयात में कमी शामिल है।
हालांकि, कम आयात के असर को कम करने के लिए घरेलू कंपनियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है। तेल विपणन कंपनियों ने बोतलबंद हाइड्रोकार्बन गैस का दैनिक उत्पादन 34,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 55,000 मीट्रिक टन कर दिया है।
इसके अलावा, 13 अगस्त को जारी निर्देश के बाद देश की अपस्ट्रीम कंपनियों के साथ-साथ निजी और सरकारी तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 63,810 मीट्रिक टन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार आयात पर निर्भरता कम करते हुए घरेलू उत्पादन के जरिये आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।
रेस्तरां और कारोबार पर कितना असर?
कमर्शियल एलपीजी की कीमत में करीब 10 रुपये की मौजूदा बढ़ोतरी का तत्काल प्रभाव कारोबार पर बहुत ज्यादा पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, रेस्तरां उद्योग को चिंता इस बात की है कि यदि भविष्य में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर उनकी परिचालन लागत पर पड़ सकता है।
नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह के मुताबिक, मौजूदा बढ़ोतरी अपने आप में नगण्य है। लेकिन भविष्य में होने वाली संभावित कीमत बढ़ोतरी चिंता का विषय हो सकती है।
रेस्तरां पहले से ही खाद्य महंगाई और बढ़ती परिचालन लागत का सामना कर रहे हैं। ऐसे में एलपीजी की कीमत में लगातार वृद्धि होने पर इसका बोझ अंततः कारोबारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
औद्योगिक क्षेत्र में भी बढ़ सकती है मांग
कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल केवल होटल और रेस्तरां क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कांच निर्माण जैसे कई औद्योगिक क्षेत्रों में भट्टियों को चलाने के लिए एलपीजी की जरूरत होती है। त्योहारी मौसम नजदीक आने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और मांग में बढ़ोतरी की संभावना है।
हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र भी धीरे-धीरे एलपीजी के विकल्प के तौर पर पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पाइप के जरिये पहुंचाई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की ओर बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण ईंधन की अपेक्षाकृत सुरक्षित और नियमित आपूर्ति है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच औद्योगिक क्षेत्र में पाइप्ड गैस की बिक्री पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत बढ़ी है।
फिलहाल राहत, लेकिन भविष्य पर नजर
कुल मिलाकर, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 10 रुपये की मौजूदा बढ़ोतरी का तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं होने से आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ा है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी अभी भी बनी हुई है। ऐसे में भविष्य में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है या नहीं, इस पर उद्योग जगत की नजर रहेगी।
साथ ही, एलपीजी के आयात में गिरावट के बीच घरेलू उत्पादन में की गई वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकार और तेल कंपनियां आपूर्ति को बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन पर अधिक जोर दे रही हैं। आने वाले त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने के साथ यह रणनीति कितनी प्रभावी रहती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमत स्थिर है, जबकि कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए मामूली बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अंडर-रिकवरी, आयात में गिरावट, बढ़ती मांग और औद्योगिक क्षेत्र में ईंधन के बदलते विकल्प आने वाले महीनों में एलपीजी के मूल्य और आपूर्ति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।