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लाल चंदन पर मंडराता संकट

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, लाल चंदन (रेड सैंडर्स) को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आई.यू.सी.एन) की 'लुप्तप्राय' (Endangered) श्रेणी में पुनः शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में ही इसे आई.यू.सी.एन की ‘लुप्तप्राय’ श्रेणी से ‘संकटापन्न’ (Near Threatened) में शामिल किया गया था। 

लाल चंदन

  • इसका वैज्ञानिक नाम ‘पटरोकार्पस सैंटलिनस’ है। एक मुख्यतः पूर्वी घाट में पाई जाने वाली भारत की एक स्थानिक वृक्ष प्रजाति है। आंध्र प्रदेश में यह चित्तूर, कडपा, नंद्याल (कुर्नूल), नेल्लोर और प्रकाशम जिलों में पाई जाती है।
  • इस प्रजाति के प्राकृतिक आवास में कमी आ रही है। इसे ‘लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय’ (साइट्स) के परिशिष्ट-II के अतिरिक्त ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972’ के अंतर्गत भी शामिल किया गया है।

लाल चंदन का उपयोग

यह भारत और विदेशों में सौंदर्य प्रसाधनों और पारंपरिक दवाओं का एक प्रमुख घटक है। भारत सहित पड़ोसी देशों में धार्मिक कार्यों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। चीन और जापान में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर फर्नीचर और वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है। 

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