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भारत में क्षय रोग का घटता बोझ: WHO रिपोर्ट 

(प्रारंभिक परीक्षा: महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट एवं सूचकांक)

चर्चा में क्यों

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ग्लोबल क्षय रोग रिपोर्ट 2025 जारी की गई।

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क्षय रोग (TB) के बारे में

  • क्षय रोग (टीबी) एक रोकथाम योग्य और आमतौर पर इलाज योग्य बीमारी है। 
  • हर साल 1 करोड़ से ज़्यादा लोग टीबी से बीमार पड़ते हैं और 10 लाख से ज़्यादा लोग इस बीमारी से मर जाते हैं।
  • यह दुनिया में किसी एक संक्रामक रोग से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण है और दुनिया भर में मौत के शीर्ष 10 कारणों में से एक है। 
  • वर्ष 2030 तक वैश्विक टीबी महामारी को समाप्त करने के लिए तत्काल कार्रवाई लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सभी सदस्य देशों ने अपनाया है।

ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 के बारे में

  • क्या है : यह वैश्विक, क्षेत्रीय और देश स्तर पर टीबी महामारी और इस रोग की रोकथाम, निदान और उपचार में हुई प्रगति का एक व्यापक और अद्यतन आकलन प्रस्तुत करती है।
  • स्रोत : विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालयों से वार्षिक डेटा संग्रह दौरों में एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित। 
  • शामिल देश : वर्ष 2025 में, दुनिया की 99% से अधिक आबादी और टीबी के मामलों वाले 184 देशों और क्षेत्रों (215 में से) ने डाटा रिपोर्ट किया।

मुख्य निष्कर्ष

  • भारत में क्षय रोग की वार्षिक घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
    • भारत में टीबी के नए मामलों की संख्या वर्ष 2015 से 2024 के बीच 21% प्रतिवर्ष की दर से घटी है, जो वैश्विक औसत गिरावट (12%) से लगभग दोगुनी है।
    • वर्ष 2015 में भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 237 टीबी मरीज दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2024 तक घटकर 187 प्रति लाख रह गए।
  • यह कमी विश्व स्तर पर सबसे तेज़ गिरावटों में से एक है और भारत को टीबी बोझ वाले देशों की सूची में एक उदाहरणात्मक सफलता के रूप में स्थापित करती है।

मृत्यु दर में कमी

  • भारत की टीबी मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है :
  • वर्ष 2015 में यह प्रति लाख जनसंख्या पर 28 मृत्यु थी।
  • जो वर्ष 2024 में घटकर 21 प्रति लाख रह गई है।
  • यह आँकड़ा इस बात को दर्शाता है कि भारत ने न केवल नए संक्रमणों को रोका है बल्कि मृत्यु दर में भी सतत कमी हासिल की है।

मिसिंग केस में भारी कमी

  • वर्ष 2015 में भारत में लगभग 15 लाख मिसिंग केस थे, यानी ऐसे लोग जिन्हें टीबी थी लेकिन उन्हें रिपोर्ट या उपचार नहीं मिला।
  • वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर एक लाख से भी कम रह गई है। यह स्वास्थ्य प्रणाली की पहुँच और रिपोर्टिंग क्षमता में सुधार का संकेत है।

भारत की रणनीतिक पहलें

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस सफलता के पीछे भारत की नवोन्मेषी केस फाइंडिंग रणनीति, नई तकनीकों का तीव्र उपयोग, और सेवाओं का विकेंद्रीकरण जैसे कदम अहम रहे हैं।
  • वर्ष 2024 में 26.18 लाख मरीजों की पहचान की गई, जबकि कुल अनुमानित मामलों की संख्या लगभग 27 लाख थी।
  • इस प्रकार, भारत का उपचार कवरेज (Treatment Coverage) वर्ष 2015 के 53% से बढ़कर वर्ष 2024 में 92% तक पहुँच गया।

दवा-प्रतिरोधी टीबी (MDR-TB) पर नियंत्रण

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) टीबी के मामलों में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है।
  • यह इस बात का संकेत है कि भारत में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम सही दिशा में कार्य कर रहा है, और उपचार प्रणाली प्रभावी है।

टीबी मुक्त भारत अभियान की सफलता

  • भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2024 में शुरू किया गया “टीबी मुक्त भारत अभियान” देशभर में व्यापक स्तर पर चलाया गया है।
  • अब तक 19 करोड़ से अधिक संवेदनशील व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई है।
  • इनमें से 24.5 लाख टीबी मरीज पहचाने गए हैं, जिनमें 8.61 लाख बिना लक्षण वाले (asymptomatic) मरीज भी शामिल हैं।
  • इस अभियान के अंतर्गत उपचार सफलता दर 90% तक पहुँच चुकी है, जो वैश्विक औसत 88% से अधिक है।

निष्कर्ष

भारत की टीबी नियंत्रण यात्रा अब वैश्विक सफलता का उदाहरण बन चुकी है। तकनीकी नवाचार, सामुदायिक भागीदारी, और सशक्त सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के माध्यम से भारत ने यह दिखाया है कि टीबी जैसी पुरानी और घातक बीमारी को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

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