संदर्भ
हाल ही में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रो. अजय कुमार सूद ने 'भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) प्रौद्योगिकियों के लिए एलसीए फ्रेमवर्क का विकास' परियोजना के परिणामों और सुझावों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
प्रमुख बिंदु
- वेस्ट टू वेल्थ मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन जैसे राष्ट्रीय मिशनों के दृष्टिकोण के अनुरूप, पीएसए कार्यालय ने 2024 में इस परियोजना को समर्थन प्रदान किया था, जिसे आईआईएससी बेंगलुरु, आईआटी मद्रास और आईआटी (बीएचयू) वाराणसी द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य एक संदर्भ-आधारित और राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक 'लाइफ साइकिल असेसमेंट' (एलसीए) फ्रेमवर्क और एक जीएचजी (ग्रीनहाउस गैस) कैलकुलेटर वेब एप्लिकेशन विकसित करना था, ताकि शहरी स्थानीय निकाय कम कार्बन फुटप्रिंट वाले ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की योजना बनाने, उनकी तुलना करने और उन्हें अनुकूलित करने में सक्षम हो सकें।
जीएचएच कैलकुलेटर ऐप
इस परियोजना के तहत विकसित जीएचएच कैलकुलेटर ऐप निम्नलिखित को सपोर्ट और इनेबल करता है –
- शहरी स्थानीय निकायों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया यह यूजर-फ्रेंडली जीएचजी कैलकुलेटर ऐप मौजूदा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तरीकों से होने वाले उत्सर्जन का सहजता से विश्लेषण करता है।
- यह ऐप एनारोबिक डाइजेशन, वेस्ट-टू-एनर्जी, कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग और लैंडफिलिंग जैसी सामान्य अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रियाओं को समाहित करता है।
- यह ऐप नेट एमिशन, अवॉइडिड एमिशन, लॉजिस्टिक्स एमिशन, कार्बन फुटप्रिंट और विभिन्न जीएचजी एमिशन डेटा (मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, ब्लैक कार्बन) की जानकारी प्रदान करता है।
- यह ऐप शहरी स्थानीय निकायों को अपशिष्ट प्रबंधन के ऐसे सर्वोत्तम परिदृश्यों की परिकल्पना और आकलन करने में मदद करता है, जिनके परिणामस्वरूप सबसे कम कार्बन फुटप्रिंट के साथ न्यूनतम जीएचजी उत्सर्जन होता है।
- इस ऐप का उपयोग नई परियोजनाओं के पर्यावरणीय मूल्यांकन, विभिन्न कंसल्टेंट्स द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), और निविदाओं के लिए आवश्यक अनिवार्य पर्यावरणीय प्रदर्शन मानकों को भरने के लिए किया जा सकता है।
स्वच्छ भारत अभियान (एसबीए) के बारे में
- 2014 में आरंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता बुनियादी ढांचे और जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण माहौल में व्यापक बदलाव ला दिया है। 24 दिसंबर, 2024 तक, 4,75,210 गांवों में ठोस और 5,14,102 गांवों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गयी है।
अपशिष्ट से धन अर्जन पहल के बारे में
- इस पहल के तहत बेकार सामग्रियों को कला और उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। रांची में कबाड़ से बनाई गई हिरण की मूर्तियां उदाहरण हैं कि कैसे कचरे से संधारणीयता को बढ़ावा देते हुए वस्तु की अहमियत बढ़ाई जा सकती है।
- 24 दिसंबर, 2024 तक, 3 लाख से अधिक लोगो को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूक बनाया गया है और अपशिष्ट से धन अर्जन के 800 से अधिक तकनीकों का आकलन कर 80 को कार्यान्वित किया गया है।