संदर्भ
हाल ही में सरकार ने छोटे करदाताओं की विदेशी संपत्ति – प्रकटीकरण योजना (Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme - FAST-DS) के नाम से एक एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना अधिसूचित की है।
FAST-DS के बारे में
- यह एक बार लागू होने वाली स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना है, जिसे वित्त अधिनियम, 2026 के अध्याय IV में शामिल किया गया है।
- इस योजना के अंतर्गत पात्र करदाता निर्धारित कर या शुल्क का भुगतान करके कुछ अघोषित विदेशी संपत्तियों, अघोषित विदेशी आय अथवा पहले से घोषित न की गई विदेशी संपत्तियों का स्वेच्छा से खुलासा कर सकते हैं।
- योजना के तहत संपत्ति (Asset) में अचल संपत्ति, आभूषण, कलाकृतियाँ, शेयर, प्रतिभूतियाँ तथा अन्य किसी भी प्रकार की संपत्ति या आय को शामिल किया गया है।
संपत्ति/आय का वर्गीकरण:
योजना के अंतर्गत संपत्ति अथवा आय को दो प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है:
श्रेणी 1: अघोषित विदेशी संपत्ति अथवा विदेशी आय
- इस श्रेणी में ऐसी विदेशी संपत्ति या विदेशी आय आती है, जिसे पहले कर के दायरे में घोषित नहीं किया गया था। ऐसी संपत्ति अथवा आय का कुल मूल्य ₹1 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए।
- अभियोजन से छूट पाने के लिए करदाता को संपत्ति के उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) का 30% कर, अथवा अघोषित आय का 30% कर चुकाना होगा; और दंड के बदले 30% अतिरिक्त आयकर का भुगतान करना होगा।
श्रेणी 2: पहले कर के लिए घोषित अथवा गैर-निवासी रहते हुए अर्जित विदेशी संपत्ति
- इस श्रेणी के अंतर्गत ऐसी विदेशी संपत्तियाँ आती हैं, जिनकी आय या संपत्ति पहले ही कर के लिए घोषित की जा चुकी थी; अथवा जिन्हें करदाता ने गैर-निवासी रहते हुए अर्जित किया था, लेकिन संबंधित आयकर रिटर्न की निर्धारित अनुसूची में उनका विवरण दर्ज नहीं किया गया था।
- इस श्रेणी के लिए ऐसी घोषणाओं की अधिकतम सीमा ₹5 करोड़ निर्धारित की गई है। इस मामले में ₹1 लाख शुल्क का भुगतान करने पर करदाता को दंड तथा अभियोजन दोनों से छूट प्राप्त होगी।
छूट:
- योजना के तहत वैध घोषणा करने वाले करदाताओं को ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति) एवं कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के अंतर्गत आगे किसी अतिरिक्त कर, दंड या अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा।