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इबोला वायरस

चर्चा में क्यों ? 

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस संक्रमण को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। वस्तुतः डब्ल्यूएचओ  ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) माना है, क्योंकि यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और कई देशों के लिए खतरा बन सकती है। 

इबोला वायरस के बारे में 

  • इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और अन्य प्राइमेट जीवों (जैसे बंदर और गोरिल्ला) को प्रभावित करती है।
  • यह बीमारी इबोला वायरस से होती है। वायरस पहले जंगली जानवरों, जैसे फल खाने वाले चमगादड़, साही और बंदरों से इंसानों में फैलता है। इसके बाद यह संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ, अंगों या दूषित वस्तुओं जैसे कपड़े और बिस्तर के संपर्क से दूसरे लोगों में फैलता है।
  • इबोला में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। औसतन लगभग 50% संक्रमित लोगों की मौत हो जाती है। अलग-अलग प्रकोपों में यह दर 25% से 90% तक रही है।
  • इबोला का पहला प्रकोप मध्य अफ्रीका के दूरदराज के जंगलों वाले गांवों में सामने आया था।
  • 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला प्रकोप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक प्रकोप माना जाता है। यह बीमारी सबसे पहले गिनी में फैली और बाद में सिएरा लियोन तथा लाइबेरिया जैसे देशों तक पहुंच गई। इस दौरान हजारों लोगों की मौत हुई।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, टेरोपोडिडे परिवार के फल खाने वाले चमगादड़ इबोला वायरस के प्राकृतिक मेजबान माने जाते हैं।

प्रमुख लक्षण 

  • इबोला वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन तक का समय लग सकता है। इस अवधि को ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) कहा जाता है।
  • इबोला से संक्रमित व्यक्ति तब तक दूसरों में बीमारी नहीं फैलाता, जब तक उसके लक्षण दिखाई नहीं देने लगते।
  • इबोला के लक्षण अचानक शुरू होते हैं। इनमें शामिल हैं:
    • तेज बुखार
    • अत्यधिक थकान और कमजोरी
    • मांसपेशियों में दर्द
    • सिरदर्द
    • गले में खराश 
  • इसके बाद अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
    • उल्टी
    • दस्त
    • पेट दर्द
    • त्वचा पर चकत्ते
    • गुर्दे और यकृत की कार्यक्षमता में गड़बड़ी 
    • कुछ गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर रक्तस्राव भी हो सकता है, जैसे:
    • मसूड़ों से खून आना
    • मल में खून आना 

उपचार और रोकथाम 

  • इबोला वायरस रोग के इलाज के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाओं - mAb114 (AnsuvimabTM) और REGN-EB3 (InmazebTM) के उपयोग की सलाह देता है। ये दवाएँ मरीज की जान बचाने और बीमारी की गंभीरता कम करने में मदद करती हैं।
  • इबोला वायरस रोग से बचाव के लिए दो टीकों को मंजूरी दी गई है:
    • एर्वेबो® (Ervebo®) और 
    • ज़ाब्डेनो और म्वाबेआ® (Zabdeno® और Mvabea®)
  • इनमें से Ervebo® टीके का उपयोग इबोला प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए अधिक किया जाता है। 

महामारी को नियंत्रित करने के अन्य उपाय 

  • संक्रमित लोगों का इलाज
  • मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी
  • संपर्क ट्रेसिंग
  • प्रयोगशाला जांच
  • अस्पतालों में संक्रमण रोकने के उपाय
  • सुरक्षित और सम्मानजनक अंतिम संस्कार
  • टीकाकरण
  • लोगों में जागरूकता फैलाना और सामुदायिक सहयोग बढ़ाना। 
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