भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच कारोबार को संबल दे रही ईसीएलजीएस 5.0
संदर्भ
वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं, लॉजिस्टिक्स लागत और कारोबार की तरलता पर पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों को गति देने के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है। सरकार ने 5 मई 2026 को इस योजना को मंजूरी देते हुए व्यवसायों के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
योजना को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पात्र व्यावसायिक उधारकर्ताओं को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने के लिए सदस्य ऋणदाता संस्थानों को सरकार समर्थित क्रेडिट गारंटी प्रदान करना है। इसके तहत 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
ईसीएलजीएस 5.0 का व्यापक उद्देश्य बाहरी आर्थिक झटकों के बीच व्यवसायों की कार्यशील पूंजी जरूरतों को पूरा करना, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखना तथा रोजगार की सुरक्षा करना है। बढ़ी हुई तरलता से उद्यमों को अपने अल्पकालिक परिचालन खर्चों और वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
कोविड संकट से शुरू हुई योजना का नया विस्तार
ईसीएलजीएस की शुरुआत वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत हुई थी। उस समय कोविड-19 महामारी के कारण कारोबारों पर गंभीर वित्तीय दबाव था। योजना के माध्यम से सदस्य ऋणदाता संस्थानों को अतिरिक्त ऋण देने के लिए 100 प्रतिशत तक सरकार समर्थित गारंटी उपलब्ध कराई गई। समय के साथ अर्थव्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार योजना के दायरे में विस्तार किया गया।
ईसीएलजीएस 1.0के तहत एमएसएमई, व्यावसायिक उद्यम, मुद्रा उधारकर्ता और व्यक्तिगत व्यावसायिक ऋण लेने वाले शामिल थे। 29 फरवरी 2020 तक 50 करोड़ रुपये तक के बकाया ऋण और अधिकतम 60 दिनों तक के ओवरड्यू वाले उधारकर्ता इसके पात्र थे।
ईसीएलजीएस 2.0में कामथ समिति द्वारा चिन्हित 26 संकटग्रस्त क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को शामिल किया गया। इसमें 29 फरवरी 2020 तक 50 करोड़ रुपये से अधिक और 500 करोड़ रुपये तक के बकाया ऋण वाले तथा 60 दिनों तक के ओवरड्यू वाले उधारकर्ता पात्र थे।
ईसीएलजीएस 3.0ने हॉस्पिटैलिटी, यात्रा एवं पर्यटन, अवकाश एवं खेल तथा नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों को सहायता प्रदान की। वहीं, ईसीएलजीएस 4.0 का मुख्य जोर कोविड महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर रहा। अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, मेडिकल कॉलेजों तथा तरल ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे चिकित्सा संसाधनों के निर्माताओं को इसमें शामिल किया गया।
ईसीएलजीएस 1.0 से 4.0 तक कुल 3.68 लाख करोड़ रुपये की 1.19 करोड़ गारंटियां जारी की गईं। इन योजनाओं की अवधि 31 मार्च 2023 को समाप्त हो गई।
ईसीएलजीएस 5.0 में एमएसएमई पर खास जोर
ईसीएलजीएस 5.0 को 31 मार्च 2027 तक या 2.55 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, लागू किया जाना है। इसमें एमएसएमई के साथ पात्र गैर-एमएसएमई व्यावसायिक उधारकर्ता और अनुसूचित यात्री एयरलाइन कंपनियां भी शामिल हैं।
योजना के तहत पात्र उधारकर्ताओं को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। ऋण सहायता अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पात्र गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
एमएसएमई के मामले में वे उधारकर्ता पात्र होंगे, जिनके पास 31 मार्च 2026 तक सदस्य ऋणदाता संस्थानों के साथ मौजूदा कार्यशील पूंजी सुविधाएं थीं और जिनके ऋण खाते में 60 दिनों से अधिक का ओवरड्यू नहीं था।
हालांकि, जिन उधारकर्ताओं ने निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSE) के तहत अतिरिक्त ऋण प्राप्त किया है, वे उस योजना के तहत प्राप्त राशि की सीमा तक ईसीएलजीएस 5.0 के तहत सहायता के पात्र नहीं होंगे।
कुछ गैर-एमएसएमई क्षेत्रों को दायरे से बाहर रखा गया
ईसीएलजीएस 5.0 सभी क्षेत्रों के एमएसएमई के लिए उपलब्ध है। हालांकि पात्र गैर-एमएसएमई उधारकर्ताओं के लिए कुछ क्षेत्रों को योजना से बाहर रखा गया है।
इनमें एनबीएफसी, विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, दूरसंचार सेवा प्रदाता, चीनी एवं एथेनॉल, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां, कागज एवं कागज उत्पाद, शैक्षणिक संस्थान, चाय और कॉफी को छोड़कर अन्य पेय पदार्थ तथा तंबाकू क्षेत्र शामिल हैं।
यदि कोई उधारकर्ता पात्र और गैर-पात्र दोनों क्षेत्रों में कारोबार करता है, तो उसकी पात्रता वित्त वर्ष 2025-26 में पात्र क्षेत्रों से हुए कारोबार के अनुपात के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
100 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी
ईसीएलजीएस 5.0 में एमएसएमई को दिए जाने वाले पात्र ऋण पर 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी का प्रावधान है। पात्र गैर-एमएसएमई के लिए यह कवरेज 90 प्रतिशत है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि योजना के तहत एमएसएमई से कोई गारंटी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
योजना के अंतर्गत सदस्य ऋणदाता संस्थानों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, विदेशी बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, एनबीएफसी और वित्तीय संस्थान शामिल हैं।
कार्यशील पूंजी के 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत पात्र उधारकर्ता वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान अपने उच्चतम फंड-आधारित कार्यशील पूंजी बकाया के 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इसकी अधिकतम सीमा प्रति उधारकर्ता 100 करोड़ रुपये रखी गई है।
ब्याज दरों को भी विनियमित रखने का प्रावधान है। एमएसएमई के लिए ब्याज दर ईबीएलआर से जुड़ी होगी, जबकि पात्र गैर-एमएसएमई के लिए एमसीएलआर आधारित दर लागू होगी। ऋणदाता संस्थान संबंधित बेंचमार्क से अधिकतम 0.75 प्रतिशत तक अतिरिक्त मार्जिन ले सकते हैं, लेकिन कुल ब्याज दर 9 प्रतिशत सालाना की सीमा के अधीन होगी।
पात्र एनबीएफसी द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर 13 प्रतिशत सालाना से अधिक नहीं होगी।
ऋण की अवधि पहले संवितरण की तारीख से पांच वर्ष होगी, जिसमें एक वर्ष की मोहलत अवधि शामिल होगी।
एयरलाइंस के लिए भी विशेष प्रावधान
ईसीएलजीएस 5.0 में अनुसूचित यात्री एयरलाइन कंपनियों को भी शामिल किया गया है। पात्र एयरलाइन कंपनियों के पास 31 मार्च 2026 तक सदस्य ऋणदाता संस्थानों से बकाया फंड-आधारित और गैर-फंड-आधारित क्रेडिट सुविधाएं होनी चाहिए। संबंधित तारीख को उनकी क्रेडिट सुविधाएं 'मानक' श्रेणी में होनी चाहिए, हालांकि SMA-2 खातों को इससे बाहर रखा गया है।
इन एयरलाइनों के लिए उपलब्ध ऋण पर 90 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। प्रति उधारकर्ता अतिरिक्त ऋण की सीमा 1,500 करोड़ रुपये तक है और निर्धारित पात्रता शर्तों के तहत 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध हो सकता है।
हालांकि, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक और 1,500 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि के लिए प्रमोटरों या मालिकों को आनुपातिक इक्विटी योगदान करना होगा।
एयरलाइनों के लिए ब्याज दर ऋणदाता संस्थान की बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार निर्धारित होगी। ऋण की अवधि पहले वितरण की तारीख से सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की मोहलत अवधि शामिल होगी।
अगस्त 2026 तक 2.50 लाख करोड़ रुपये की गारंटी
ईसीएलजीएस 5.0 को लागू हुए कुछ ही महीनों में इसका प्रभाव ऋण प्रवाह में दिखाई देने लगा है। 20 अगस्त 2026 तक योजना के तहत 6,73,979 गारंटियां जारी की जा चुकी थीं और गारंटीशुदा राशि 2,50,024 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
कुल जारी गारंटियों की संख्या में एमएसएमई की हिस्सेदारी 97.3 प्रतिशत, जबकि कुल गारंटीशुदा राशि में उनकी हिस्सेदारी 80.79 प्रतिशत रही। ये आंकड़े बताते हैं कि योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी आधार एमएसएमई क्षेत्र बना हुआ है।
जन समर्थ पोर्टल से आवेदन की सुविधा
पात्र उधारकर्ता जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। डिजिटल माध्यम से आवेदन की सुविधा का उद्देश्य पात्र व्यवसायों के लिए ऋण सहायता तक पहुंच को आसान बनाना है।
सरकार योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आउटरीच अभियान भी चला रही है। पहले चरण में 20 मई से 6 जून 2026 के बीच नौ स्थानों पर अभियान आयोजित किए गए। इन अभियानों में राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों, एनसीजीटीसी, पीएसबी अलायंस, बैंकों, उद्योग संघों और उद्यमों ने भाग लिया।
दूसरे चरण में 10 अतिरिक्त स्थानों पर आउटरीच गतिविधियां जारी हैं, जिनमें से चार अभियान पूरे हो चुके हैं। बैंकों और एनबीएफसी के व्यापक नेटवर्क के जरिए योजना की भौगोलिक और क्षेत्रीय पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
आर्थिक लचीलेपन की दिशा में अहम कदम
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच कारोबारी क्षेत्र के सामने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और कार्यशील पूंजी की जरूरत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे समय में ईसीएलजीएस 5.0 केवल अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह कारोबारों को वित्तीय झटकों से उबरने और अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
एमएसएमई देश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए उन्हें समय पर और अपेक्षाकृत सुलभ ऋण उपलब्ध कराना उत्पादन, रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण है।
ईसीएलजीएस 5.0 के माध्यम से सरकार ने संस्थागत ऋण तक पहुंच मजबूत करने और निजी क्षेत्र के वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए सरकारी गारंटी का इस्तेमाल किया है। यदि योजना के तहत लक्षित ऋण प्रवाह प्रभावी ढंग से व्यवसायों तक पहुंचता है, तो यह बाहरी आर्थिक झटकों के बीच उद्यमों की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और देश की विकास गति को कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस तरह, ईसीएलजीएस 5.0 को भारत की आर्थिक लचीलापन, रोजगार सुरक्षा और निर्बाध कारोबारी गतिविधियों को बनाए रखने की व्यापक रणनीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।